फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   52 children freed from child labor at the age of playing and eating

Rohtak News: खेलने-खाने की उम्र में कर रहे बालश्रम, 52 बच्चों को कराया मुक्त

Sun, 13 Oct 2024 10:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 13 Oct 2024 10:51 PM IST
विज्ञापन
52 children freed from child labor at the age of playing and eating
13सीटीके11.. स्कूली बच्चों को बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी देती संस्था की टीम। स्रोत:संस्था
रोहतक। खेलने-खाने की उम्र में बच्चों से श्रम कराया जा रहा है। शहर के होटल, ढाबे, चाय की दुकान, घरों व अन्य जगहों पर बच्चों से काम करवाया जा रहा है। दिनभर काम के बदले इन्हें चंद रुपये थमा दिए जाते हैं। जिले में हर माह ऐसे 10 से 11 मामले सामने आ रहे हैं। यह खुलासा एमडीडी ऑफ इंडिया के आंकड़े के बाद हुआ है। इस संस्था ने इस वर्ष 52 बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया है। उत्पीड़न का शिकार हो रहे इन बच्चों को 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक छुड़ाया गया है। यही नहीं, स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम अब तक कुल 144 बच्चों को उनके परिजनों को सौंप चुका है।
विज्ञापन

एमडीडी ऑफ इंडिया की ओर से कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन के सहयोग से ‘न्याय तक पहुंच-3’ के तहत बाल विवाह व बालश्रम मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। इसकी सफलता के लिए संस्था के कार्यकर्ता जिले के गांवों में स्वयं सहायता समूहों, युवा क्लबों, आंगनबाड़ियों, स्कूलों व अन्य सामाजिक व धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर जागरूक बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
विज्ञापन

एमडीडी आफ इंडिया के सहायक विक्टिम सपोर्ट कोऑर्डिनेटर रजनी के अनुसार बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया गया है। संस्था ने पुलिस की मानव तस्करी विरोधी इकाई (एएचटीयू) टीम की मदद से बच्चों को उत्पीड़न का शिकार बनने से बचाया है। इन बच्चों को बाल कल्याण समिति में प्रस्तुत किया गया। यहां बच्चों के माता-पिता की काउंसिलिंग के बाद बच्चे उन्हें सौंप दिए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह है बालश्रम का मुख्य कारण
बाल मजदूरी करते पाए गए बच्चों के माता-पिता की काउंसिलिंग के दौरान यह बात निकल कर आई कि बाल मजदूरी एक मुख्य कारण गरीबी है। बेरोजगारी और गरीबी के कारण माता-पिता स्वयं मजदूरी करने के साथ बच्चों को काम पर भेजते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असमर्थ हैं। बाल मजदूरी करने वाले बच्चों के माता-पिता और नियोक्ता को बालश्रम कानूनों की जानकारी न होना भी एक मुख्य कारण सामने आया है। इसके साथ ही बच्चे थोड़े रुपये में अधिक काम करते हैं। अधिकतर बाल मजदूरी करने वाले बच्चे या तो स्कूल से ड्राप आउट हो जाते हैं या फिर स्कूल में गए ही नहीं। इसी कड़ी में एमडीडी ऑफ इंडिया संस्था ने 11 अक्तूबर को गांधी कैंप के सरकारी स्कूल में लगाए मेगा कैंप में संस्था की स्टाल लगाकर बाल विवाह एवं बालश्रम के बारे में जानकारी दी।
स्कूलों में बाल विवाह मुक्त भारत की शपथ दिलवाई
एमडीडी आफ इंडिया संस्था ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण साथ मिलकर जिले के चुनिंदा स्कूलों में पौधरोपरण अभियान चलाया गया। यहां बाल विवाह न करने की शपथ दिलाई गई।

संस्था उत्पीड़न के शिकार बच्चों के लिए काम कर रही है। बालश्रम कराने वाले बच्चों को उत्पीड़न से बचाया गया है। इस वित्त वर्ष में 30 सितंबर तक 52 बच्चे छुड़वाए जा चुके है। एमडीडी आफ इंडिया संस्था के प्रयास से उत्पीड़न का शिकार बच्चों को उनके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया है।

रजनी, सहायक विक्टिम सपोर्ट कोऑर्डिनेटर, एमडीडी आफ इंडिया।

विभाग इस वर्ष अब तक बालश्रम कर रहे 52 लड़कों व दो लड़कियों को मुक्त करा चुके हैं। इसके अलावा इधर-उधर मांगने वाले 66 व गुमशुदा 24 बच्चों को भी उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। विभाग की टीम बच्चों के मामले में पूरी सक्रियता से काम कर रही है।
जगबीर सिंह, प्रभारी, एंटी ह्मूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, स्टेट क्राइम ब्रांच।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed