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एक तीर से कई निशाने साध गए पूर्व सीएम हुड्डा

Fri, 30 Nov 2018 02:13 AM IST
Updated Fri, 30 Nov 2018 02:13 AM IST
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एक तीर से कई निशाने साध गए पूर्व सीएम हुड्डा
विजेंद्र कौशिक
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। एक तरफ कांग्रेस पंजाब व यूपी में पंजे पर चुनाव लड़ती है, जबकि हरियाणा में 50 साल से पार्टी चिन्ह पर निकाय चुनाव नहीं लड़ा। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए वीरवार को कांग्रेस आलाकमान द्वारा प्रदेश के पांच निगमों रोहतक, पानीपत, करनाल, हिसार व यमुनानगर और जाखल मंडी और पुंडरी नगर पालिका चुनाव पार्टी चिन्ह पर न लड़ने का फैसला लिया गया है। इससे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कांग्रेस की सियासत के अंदर वजन बढ़ा है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। एक तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर गुरुग्राम नगर निगम चुनाव की तरह मौजूदा पांच निगमों के निकाय चुनाव पार्टी चिन्ह पर लड़ने के लिए पार्टी आलाकमान को नहीं मना पाए। इससे उनके समर्थकों में निराशा है, दूसरा मेयर के टिकट के चक्कर में रोहतक के अंदर समर्थकों के नाराज होने की संभावना से भी पूर्व सीएम हुड्डा को राहत मिल गई है। क्योंकि नाराजगी से लोकसभा चुनाव में उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा को नुकसान हो सकता था।
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जीत पार्टी समर्थक की, हार व्यक्तिगत : नगर निगम चुनाव में कांग्रेस समर्थक निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अब मेयर का चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरेंगे। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक करियर में रोहतक शहर का अहम योगदान रहा है। मेयर का टिकट लेने के लिए लगातार समर्थक हुड्डा परिवार से संपर्क साध रहे थे। टिकट किसी एक को मिलना था। बाकी के नाराज होने की संभावना थी, क्योंकि रोहतक में कांग्रेस हुड्डा की मर्जी के बिना टिकट दे ही नहीं सकती। ऐसे में जो पार्टी नेता या कार्यकर्ता जीतेगा, वह कांग्रेस या हुड्डा समर्थक कहलाएगा, जबकि हार मिली तो कह सकेंगे पार्टी ने चिन्ह पर चुनाव ही नहीं लड़ा।
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लोकसभा चुनाव : शहर की रहेगी अहम भूमिका
भाजपा लगातार कांग्रेस को रोहतक में घेरने की तैयारी करती रही है। क्योंकि मोदी लहर के बावजूद सांसद दीपेंद्र हुड्डा लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीत गए थे। 10 में से मात्र यही सीट कांग्रेस के खाते में आई थी। ऐसे में भाजपा किसी तरह रोहतक में कांग्र्रेस को हराना चाहती है। फरवरी 2016 की आगजनी के बाद भाजपा शहर के अंदर कांग्रेस को घेरने के लिए पूरा जोर लगाए हुए है। निकाय चुनाव में टिकट के चक्कर में हुड्डा परिवार समर्थकों को नाराज नहीं करना चाहता था। ताकि लोकसभा व फिर विधानसभा चुनाव के समीकरण प्रभावित न हों। क्योंकि जिले के अंदर रोहतक शहर में ही भाजपा जीती थी। महम, कलानौर व गढ़ी सांपला में अब भी कांग्रेसी विधायक हैं।
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32 मांग रहे थे हुड्डा से टिकट, अब ज्यादातर हट रहे पीछे
दो दिन पहले हुई मीटिंग में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से 32 दावेदारों ने मेयर का टिकट मांगा था। उस समय पूर्व सीएम ने कहा था कि अभी पार्टी ने फैसला नहीं लिया है कि चुनाव चिन्ह पर लड़ेंगे या नहीं। अगर चिन्ह मिलता है तो दावेदारों की मीटिंग लेकर फैसला लेंगे, किसको मैदान में उतारा जाए। अब हुड्डा की टिकट को लेकर पार्टी ने सिरदर्दी दूर कर दी है। मेयर बनने के लिए ताल ठोक रहे ज्यादातर कह रहे हैं कि अगर पार्टी समर्थन देकर उतारती है तो चुनाव लड़ेंगे।
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मैं तो पार्षद का ही लड़ूंगा चुनाव
पार्टी चुनाव चिन्ह पर मैदान में नहीं उतर रही। ऐसे में मैं तो अपने वार्ड नंबर 15 से पार्षद का ही चुनाव लड़ूंगा। इसके लिए एनओसी आवेदन कर दिया है।
-गुलशन ईशपुनियानी, निवर्तमान पार्षद नगर निगम
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मैं तो जिंदगी का जो भी चुनाव लड़ूंगा पार्टी के चिन्ह पर लड़ूंगा। अब तो कांग्रेसियों को एकत्रित होकर किसी एक उम्मीदवार को मैदान में उतारना चाहिए, ताकि जीत हासिल हो सके।
-गुलशन डंग, व्यापारी नेता
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पार्टी ने सोच समझकर फैसला लिया होगा। अगर पार्टी समर्थन देकर मैदान में उतारती है तो निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी मेयर का चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं।
-गुलशन ईशपुनियानी, प्रधान शौरी मार्केट
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कांग्रेस सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ रही तो कोई बात नहीं है। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मेयर का चुनाव लड़ूंगा। हुड्डा परिवार का आशीर्वाद है।
-सीताराम सचदेवा, पूर्व नगर सुधार मंडल चेयरमैन
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नगर निगम चुनाव में हार के डर से कांग्रेस ने लिया यू टर्न : ग्रोवर
सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर का कहना है कि निकाय चुनावों में कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के दबाव के चलते सिंबल पर चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। हुड्डा ने जमीनी हकीकत को पार्टी हाई कमान के सामने रखते हुए हार का डर दिखाकर आला कमान को फैसला लेने के लिए तैयार किया। जबकि पहले कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर लगातार सिंबल पर चुनाव लड़ने की बात कह रहे थे। अब कांग्रेस का निकाय चुनाव सिंबल पर न लड़ना हताशा को दिखाता है। रोहतक में हो रहे विकास के कार्यों को देखते हुए भूपेंद्र हुड्डा पहले ही हार मान चुके हैं। जिला मीडिया प्रभारी शमशेर खरक ने बताया कि पार्टी जल्द ही मेयर और पार्षद उम्मीदवारों की घोषणा करेगी।

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50 साल से नहीं लड़ा पंजे पर निकाय चुनाव
कांग्रेस ने 50 साल से पार्टी के चिन्ह पर निकाय चुनाव नहीं लड़ा। अब ऐसा क्या हो गया। 2013 में रोहतक नगर निगम चुनाव में बिना चुनाव चिन्ह के कांग्रेस समर्थकों को शानदार जीत मिली थी।
-भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व सीएम
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