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नगर निगम और गोशाला संचालक का गड़बड़झाला या घोटाला
Updated Mon, 02 Oct 2017 01:59 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
गायों की सेवा के नाम पर नगर निगम और गोशाला पहरावर संचालक बढ़ता विवाद किसी बड़ी गड़बड़ी या घोटाले की ओर इशारा कर रहा है। गोशाला के रिकॉर्ड में साफ है कि गोवंश अखिल भारतीय गोशाला में छोडे़ गए वह नगर निगम के अधिकारियों ने रिसीव कर लिए। इस पर निगम के एमई से लेकर सेनेटरी इंस्पेक्टर के हस्ताक्षर तक हैं। अब निगम का कहना है कि पहरावार गोशाला में 1314 गोवंश छोडे़ थे, लेकिन उन्हें वापस 566 गोवंश ही मिले हैं। जबकि इसका गोवंश के लिए हर माह निगम खर्च भी देता था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निगम को 748 गोवंश वापस नहीं मिले तो उन्होंने पहरावर गोशाला के रिकॉर्ड में क्यों लिखा कि सभी गोवंश रिसीव हो गए।
गोवंश में हेर फेर के मामले में निगम अधिकारियों का कहना है कि मामले को कोर्ट में ले जाया जाएगा और वहीं गोशाला संचालक से जवाब मांगा जाएगा। वहीं गोशाला प्रबंधन का कहना है कि निगम एक तरफ तो खुद लिखकर दे रहा है कि जितने पशु छोड़े थे, वे मिल गए हैं। गोशाला से उनके सभी गोवंश दे दिए गए हैं।
गोशाला दे रही थी हर माह 15 लाख से ज्यादा का बिल
निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर सुंदर ने बताया कि उन्होंने एक बार 936, दूसरी बार 147 और तीसरी बार 241 सहित कुल 1314 गोवंश छोड़ा। प्रतिदिन प्रति गोवंश 45 रुपये के हिसाब से गोशाला 15 लाख से भी ज्यादा का बिल निगम को थमा रही थी। अब निगम की गोशाला में इससे कम पशु आए हैं। हाईकोर्ट में गोशाला प्रबंधन से इसका जवाब मांगा जाएगा, आखिर 748 गोवंश कहां गया। अगर नहीं था तो बिल क्यों दिया गया। गोवंश की मौत हुई है तो उसका रिकॉर्ड दिया जाए।
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निगम के अधिकारी दोहरा खेल खेल रहे : पूर्व सरपंच
गोशाला के संरक्षक और पहरावर गांव के पूर्व सरपंच प्रवीण कौशिक का कहना है कि निगम के अधिकारी दोहरा खेल खेल रहे हैं। एक तरफ लिखकर देते हैं कि जो पशु छोड़े थे, वे मिल गए हैं। दूसरी तरफ संख्या कम बता रहे हैं। वे सोमवार को निगम के अधिकारियों को बुलाकर निगम की अभी चालू हुई गोशाला में पशुओं की गिनती करवाना चाहते हैं, ताकि सही स्थिति सामने आ सके। अगर निगम के अधिकारी फिर भी संख्या कम बता रहे हैं तो पूरे 1314 गोवंश दे दिया जाएगा। चाहे उन्हें अपनी गोशाला से गोवंश देना पड़े।
मेरे पास आए केवल 566 गोवंश
निगम की गोशाला चल रहे राधे-राधे गोशाला संचालक एवं व्यापारी नेता राजेश लूंबा उर्फ टीनू का कहना है कि उनके पास पहले से चल रही गोशाला से केवल 566 गोवंश मिला। उसमें दो की मौत हो गई है। जो गोवंश आए हैं वे बेहद कमजोर है। सभी की मेडिकल जांच करवाई जा रही है।
सवालों में उलझा मामला
: अगर 1314 गोवंश निगम को नहीं मिले तो क्यों लिखा जितने छोड़े, पूरे मिल गए हैं।
: रजिस्टर में छोड़े और मिले गोवंश की संख्या क्यों नहीं लिखी गई।
: गोशाला प्रबंधन के भी रजिस्टर में हस्ताक्षर हैं, फिर सभी पशु छोड़ने के बाद भी और पशु क्यों देने की जा रही बात।
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रोहतक।
गायों की सेवा के नाम पर नगर निगम और गोशाला पहरावर संचालक बढ़ता विवाद किसी बड़ी गड़बड़ी या घोटाले की ओर इशारा कर रहा है। गोशाला के रिकॉर्ड में साफ है कि गोवंश अखिल भारतीय गोशाला में छोडे़ गए वह नगर निगम के अधिकारियों ने रिसीव कर लिए। इस पर निगम के एमई से लेकर सेनेटरी इंस्पेक्टर के हस्ताक्षर तक हैं। अब निगम का कहना है कि पहरावार गोशाला में 1314 गोवंश छोडे़ थे, लेकिन उन्हें वापस 566 गोवंश ही मिले हैं। जबकि इसका गोवंश के लिए हर माह निगम खर्च भी देता था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निगम को 748 गोवंश वापस नहीं मिले तो उन्होंने पहरावर गोशाला के रिकॉर्ड में क्यों लिखा कि सभी गोवंश रिसीव हो गए।
गोवंश में हेर फेर के मामले में निगम अधिकारियों का कहना है कि मामले को कोर्ट में ले जाया जाएगा और वहीं गोशाला संचालक से जवाब मांगा जाएगा। वहीं गोशाला प्रबंधन का कहना है कि निगम एक तरफ तो खुद लिखकर दे रहा है कि जितने पशु छोड़े थे, वे मिल गए हैं। गोशाला से उनके सभी गोवंश दे दिए गए हैं।
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गोशाला दे रही थी हर माह 15 लाख से ज्यादा का बिल
निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर सुंदर ने बताया कि उन्होंने एक बार 936, दूसरी बार 147 और तीसरी बार 241 सहित कुल 1314 गोवंश छोड़ा। प्रतिदिन प्रति गोवंश 45 रुपये के हिसाब से गोशाला 15 लाख से भी ज्यादा का बिल निगम को थमा रही थी। अब निगम की गोशाला में इससे कम पशु आए हैं। हाईकोर्ट में गोशाला प्रबंधन से इसका जवाब मांगा जाएगा, आखिर 748 गोवंश कहां गया। अगर नहीं था तो बिल क्यों दिया गया। गोवंश की मौत हुई है तो उसका रिकॉर्ड दिया जाए।
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निगम के अधिकारी दोहरा खेल खेल रहे : पूर्व सरपंच
गोशाला के संरक्षक और पहरावर गांव के पूर्व सरपंच प्रवीण कौशिक का कहना है कि निगम के अधिकारी दोहरा खेल खेल रहे हैं। एक तरफ लिखकर देते हैं कि जो पशु छोड़े थे, वे मिल गए हैं। दूसरी तरफ संख्या कम बता रहे हैं। वे सोमवार को निगम के अधिकारियों को बुलाकर निगम की अभी चालू हुई गोशाला में पशुओं की गिनती करवाना चाहते हैं, ताकि सही स्थिति सामने आ सके। अगर निगम के अधिकारी फिर भी संख्या कम बता रहे हैं तो पूरे 1314 गोवंश दे दिया जाएगा। चाहे उन्हें अपनी गोशाला से गोवंश देना पड़े।
मेरे पास आए केवल 566 गोवंश
निगम की गोशाला चल रहे राधे-राधे गोशाला संचालक एवं व्यापारी नेता राजेश लूंबा उर्फ टीनू का कहना है कि उनके पास पहले से चल रही गोशाला से केवल 566 गोवंश मिला। उसमें दो की मौत हो गई है। जो गोवंश आए हैं वे बेहद कमजोर है। सभी की मेडिकल जांच करवाई जा रही है।
सवालों में उलझा मामला
: अगर 1314 गोवंश निगम को नहीं मिले तो क्यों लिखा जितने छोड़े, पूरे मिल गए हैं।
: रजिस्टर में छोड़े और मिले गोवंश की संख्या क्यों नहीं लिखी गई।
: गोशाला प्रबंधन के भी रजिस्टर में हस्ताक्षर हैं, फिर सभी पशु छोड़ने के बाद भी और पशु क्यों देने की जा रही बात।