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कॉलेज जुड़े पर स्टाफ और संसाधन बढ़े तो बने बात
Updated Tue, 27 Jun 2017 12:35 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
काफी मशक्कत के बाद इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) से रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले के कॉलेज तो जुड़ गये, लेकिन अब यूनिवर्सिटी के सामने कठिन चुनौतियां होंगी, जिन्हें पार पाना बहुत मुश्किल होगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास सबसे बड़ी समस्या स्टाफ और संसाधन जुटाना रहेगा जिसकी अभी कमी खल रही है। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन इन सबसे पार पाने की बात कह रहा है।
आईजीयू में सर्वाधिक समस्या स्टाफ की है। दो जिलों के स्टूडेंट्स बढ़ने के कारण आईजीयू के सामने अब और अधिक चुनौती हो जाएगी। अभी हाल में आईजीयू में करीब 3500 बच्चे अध्ययनरत हैं। लेकिन अब रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ के 110 कॉलेज जुड़ने के बाद इनकी संख्या 50000 से अधिक हो जाएगी। ऐसे में स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ी समस्या रहेगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन यह दावा करता है कि यह समस्या शीघ्र समाप्त हो जाएगी। सरकारी और अपने स्तर पर स्टाफ भर्ती कर इस चुनौती से पार पा लेंगे।
अभी यह है स्थिति
फिलहाल इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी में करीब 50 से ज्यादा कोर्सेज चल रहे हैं। इनमें 29 टीचर स्थायी और 7 डेपुटेशन पर हैं। इसके अतिरिक्त 40 टीचर अतिथि अध्यापक हैं। वहीं 24 स्थायी नॉन टीचिंग स्टाफ है। ऐसे यूनिवर्सिटी पहले ही स्टाफ की समस्या से जूझ रहा है। लेकिन अब वर्कलोड भरने के बाद यूनिवर्सिटी के सामने इस समस्या से पार पाना बड़ा मुश्किल होगा।
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यहां करना होगा अधिक काम
अभी बहुत से कोर्स ऐसे हैं जो कॉलेजों में तो हैं लेकिन आईजीयू में नहीं हैं। ऐेसे में इन कोर्सों को पीजी तक चलाने के लिए यूनिवर्सिटी को काम करना होगा। इसके लिए अलग से ब्रांच बनेगी। अलग से ही इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप होगा। बच्चों की रजिस्ट्रेशन एवं स्कॉलरशिप ब्रांच पर भी काम बढ़ेगा। इतने सारे बच्चों की परीक्षाएं कराना भी यूनिवर्सिटी के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि अब सारा एग्जामिनेशन शेड्यूल सेंट्रलाइज होगा। एग्जामिनेशन के सारे नियम आईजीयू ही बनाएगी। इनके पेपर सेटिंग भी आईजीयू करेगी।
यूथ और वेलफेयर में करना होगा फोकस
यूथ एवं वेलफेयर मामले में भी आईजीयू को बहुत काम करना होगा। अभी तक यूथ फेस्टिवल एमडीयू कराती थी, लेकिन अब यूथ फेस्टिवल आईजीयू ही कराएगी। इसके लिए भी योजना बनाकर संसाधन जुटाने होंगे। वहीं समय-समय पर एथलीट मीट एवं स्पोर्ट्स प्रोग्राम भी कराए जाएंगे।
हमने सारी तैयारी कर ली है। स्टाफ की समस्या दूर करने के लिए सरकार और यूनिवर्सिटी स्तर पर काम किया जाएगा। संसाधन भी डेवलप किए जाएंगे। हम जानते हैं कि यह बड़ी चुनौती है, लेकिन इस पर शीघ्र पार पा लेंगे। -डॉ. मदनलाल, कुल सचिव, आईजीयू
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रेवाड़ी।
काफी मशक्कत के बाद इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) से रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले के कॉलेज तो जुड़ गये, लेकिन अब यूनिवर्सिटी के सामने कठिन चुनौतियां होंगी, जिन्हें पार पाना बहुत मुश्किल होगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास सबसे बड़ी समस्या स्टाफ और संसाधन जुटाना रहेगा जिसकी अभी कमी खल रही है। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन इन सबसे पार पाने की बात कह रहा है।
आईजीयू में सर्वाधिक समस्या स्टाफ की है। दो जिलों के स्टूडेंट्स बढ़ने के कारण आईजीयू के सामने अब और अधिक चुनौती हो जाएगी। अभी हाल में आईजीयू में करीब 3500 बच्चे अध्ययनरत हैं। लेकिन अब रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ के 110 कॉलेज जुड़ने के बाद इनकी संख्या 50000 से अधिक हो जाएगी। ऐसे में स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ी समस्या रहेगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन यह दावा करता है कि यह समस्या शीघ्र समाप्त हो जाएगी। सरकारी और अपने स्तर पर स्टाफ भर्ती कर इस चुनौती से पार पा लेंगे।
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अभी यह है स्थिति
फिलहाल इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी में करीब 50 से ज्यादा कोर्सेज चल रहे हैं। इनमें 29 टीचर स्थायी और 7 डेपुटेशन पर हैं। इसके अतिरिक्त 40 टीचर अतिथि अध्यापक हैं। वहीं 24 स्थायी नॉन टीचिंग स्टाफ है। ऐसे यूनिवर्सिटी पहले ही स्टाफ की समस्या से जूझ रहा है। लेकिन अब वर्कलोड भरने के बाद यूनिवर्सिटी के सामने इस समस्या से पार पाना बड़ा मुश्किल होगा।
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यहां करना होगा अधिक काम
अभी बहुत से कोर्स ऐसे हैं जो कॉलेजों में तो हैं लेकिन आईजीयू में नहीं हैं। ऐेसे में इन कोर्सों को पीजी तक चलाने के लिए यूनिवर्सिटी को काम करना होगा। इसके लिए अलग से ब्रांच बनेगी। अलग से ही इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप होगा। बच्चों की रजिस्ट्रेशन एवं स्कॉलरशिप ब्रांच पर भी काम बढ़ेगा। इतने सारे बच्चों की परीक्षाएं कराना भी यूनिवर्सिटी के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि अब सारा एग्जामिनेशन शेड्यूल सेंट्रलाइज होगा। एग्जामिनेशन के सारे नियम आईजीयू ही बनाएगी। इनके पेपर सेटिंग भी आईजीयू करेगी।
यूथ और वेलफेयर में करना होगा फोकस
यूथ एवं वेलफेयर मामले में भी आईजीयू को बहुत काम करना होगा। अभी तक यूथ फेस्टिवल एमडीयू कराती थी, लेकिन अब यूथ फेस्टिवल आईजीयू ही कराएगी। इसके लिए भी योजना बनाकर संसाधन जुटाने होंगे। वहीं समय-समय पर एथलीट मीट एवं स्पोर्ट्स प्रोग्राम भी कराए जाएंगे।
हमने सारी तैयारी कर ली है। स्टाफ की समस्या दूर करने के लिए सरकार और यूनिवर्सिटी स्तर पर काम किया जाएगा। संसाधन भी डेवलप किए जाएंगे। हम जानते हैं कि यह बड़ी चुनौती है, लेकिन इस पर शीघ्र पार पा लेंगे। -डॉ. मदनलाल, कुल सचिव, आईजीयू