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पिता के जज्बे से बॉक्सर बनी कविता, अब महिलाओं को दिलाएगी न्याय
Updated Fri, 01 Dec 2017 02:58 AM IST
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फोटो समेत
पिता के जज्बे से बॉक्सर बनी कविता, अब महिलाओं को दिलाएगी न्याय
- भिवानी के निमड़ी गांव की रहने वाली बॉक्सर कविता को पहली बार मिली महिला थाने में तैनाती
- 13 साल पहले सेना में तैनात बॉक्सर पिता का हो गया था एक्सीडेंट, तब बेटी को बनाया बॉक्सर
- पति भी दिल्ली पुलिस में कार्यरत, दो साल के बेटे के साथ जाती है स्टेडियम में प्रेक्टिस करने
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
करीब 13 साल पहले इस बेटी को पिता के जज्बे ने बॉक्सर बनाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना एक अलग मुकाम बनाकर नाम रोशन कर दिया। पारिवारिक परिस्थितियों के बीच आज यही बेटी खेलों के साथ-साथ अब महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए भी काम करेगी। यहां बात हो रही है अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर कविता चहल की। हरियाणा पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर कार्यरत कविता को पहली बार महिला थाने में तैनाती मिली है, जहां वह काननू की मदद से महिलाओं को न्याय दिलाएगी। मूलरूप से कविता चहल भिवानी के निमड़ी गांव की रहने वाली है, जिन्होंने 2004 में बॉक्सिंग शुरू की थी। अंतरराष्ट्रीय पर पहुंचने के बाद कविता को वर्ष 2014 में खेल कोटे के तहत हरियाणा पुलिस में नौकरी दी गई। लंबे समय तक उन्होंने मधुबन में ट्रेनिंग की और इसी साल जुलाई माह में पुलिस लाइन में भेज दिया गया। वीरवार को पहली बार कविता को महिला थाने में तैनाती दी गई। बॉक्सर बनने से लेकर पुलिस में आने तक क्या-क्या दिक्कतों का सामना करना पड़ा है पेश है अमर उजाला से विशेष बातचीत।
एक्सीडेंट के बाद पिता ने बेटी को बनाया बॉक्सर
बकौल कविता, उसके पिता भूप सिंह सेना में बॉक्सर थे। इसी बीच उनका एक्सीडेंट हो गया और वह करीब एक माह तक कोमा में रहे। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्होंने बेटी कविता को बॉक्सिंग सिखाने के लिए कहा। बॉक्सिंग के प्रति पिता के जज्बे को देखते हुए कविता ने वर्ष 2004 में भिवानी में कोच जगदीश के पास प्रशिक्षण शुरू कर दिया। कविता के परिवार में सबसे बड़ी बहन संतोष, रेखा, सोनू और दो छोटू भाई कर्मवीर और नीरज है। कविता को बॉक्सिंग करता देख दोनों छोटे भाई भी बॉक्सिंग में आ गए। तमाम परिस्थितियों से निकलने के बाद आज कविता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुकी है। जबकि भाई कर्मवीर एकेडमी में बॉक्सिंग करता और सबसे छोटा भाई नीरज सेना में बॉक्सर है।
2011 में हुई थी शादी, पुलिस में पहली प्राथमिकता महिलाओं को न्याय दिलाना
कविता की शादी वर्ष 2011 में रोहतक के उत्तम विहार निवासी सुधीर खरब के साथ हुई थी। सुधीर दिल्ली पुलिस में कार्यरत है। फिलहाल में कविता अपने दो साल के बच्चे, सास कृष्ण और ससुर राज सिंह के साथ रोहतक में रहती है। कविता का कहना है कि वह राजीव गांधी स्टेडियम स्थित नेशनल बॉक्सिंग एकेडमी में प्रेक्टिस करती है। हर रोज सुबह पांच बजे बच्चे को सास-ससुर के पास छोड़कर स्टेडियम में जाती है। कविता का कहना है कि पुलिस में आने के बाद महिलाओं की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें न्याय दिलाना पहली प्राथमिकता रहेगी।
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यह है उपलब्धि
कविता को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 मे अर्जुन अवार्ड और वर्ष 2014 में भीम अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। कविता दो बार वर्ल्ड चैंपियनशिप, 4 बार एशियन चैंपियनशिप और 4 बार एशिया कप में पदक विजेता रही है। इसके अलावा 8 बार नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, 5 बार फेडरेशन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, 6 बार अखिल भारतीय पुलिस गेम्स में स्वर्ण पदक और 2 बार वर्ल्ड पुलिस गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुकी है।
एसपी ने किया सम्मानित
कविता ने हाल में 27 से 31 अक्तूबर तक पुणे में आयोजित अखिल भारतीय पुलिस रेस्लिंग क्लस्टर चैंपियनशिप 2017 में हरियाणा पुलिस का प्रतिनिधित्व किया था। इसमें कविता ने फाइनल मुकाबले में एसएसबी की ईबेमचा को हराकर स्वर्ण पदक झटका। वीरवार को एसपी पंकज नैन ने अपने कार्यालय में कविता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कविता से अन्य बेटियों को प्रेरणा लेनी चाहिए।
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पिता के जज्बे से बॉक्सर बनी कविता, अब महिलाओं को दिलाएगी न्याय
- भिवानी के निमड़ी गांव की रहने वाली बॉक्सर कविता को पहली बार मिली महिला थाने में तैनाती
- 13 साल पहले सेना में तैनात बॉक्सर पिता का हो गया था एक्सीडेंट, तब बेटी को बनाया बॉक्सर
- पति भी दिल्ली पुलिस में कार्यरत, दो साल के बेटे के साथ जाती है स्टेडियम में प्रेक्टिस करने
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
करीब 13 साल पहले इस बेटी को पिता के जज्बे ने बॉक्सर बनाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना एक अलग मुकाम बनाकर नाम रोशन कर दिया। पारिवारिक परिस्थितियों के बीच आज यही बेटी खेलों के साथ-साथ अब महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए भी काम करेगी। यहां बात हो रही है अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर कविता चहल की। हरियाणा पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर कार्यरत कविता को पहली बार महिला थाने में तैनाती मिली है, जहां वह काननू की मदद से महिलाओं को न्याय दिलाएगी। मूलरूप से कविता चहल भिवानी के निमड़ी गांव की रहने वाली है, जिन्होंने 2004 में बॉक्सिंग शुरू की थी। अंतरराष्ट्रीय पर पहुंचने के बाद कविता को वर्ष 2014 में खेल कोटे के तहत हरियाणा पुलिस में नौकरी दी गई। लंबे समय तक उन्होंने मधुबन में ट्रेनिंग की और इसी साल जुलाई माह में पुलिस लाइन में भेज दिया गया। वीरवार को पहली बार कविता को महिला थाने में तैनाती दी गई। बॉक्सर बनने से लेकर पुलिस में आने तक क्या-क्या दिक्कतों का सामना करना पड़ा है पेश है अमर उजाला से विशेष बातचीत।
एक्सीडेंट के बाद पिता ने बेटी को बनाया बॉक्सर
बकौल कविता, उसके पिता भूप सिंह सेना में बॉक्सर थे। इसी बीच उनका एक्सीडेंट हो गया और वह करीब एक माह तक कोमा में रहे। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्होंने बेटी कविता को बॉक्सिंग सिखाने के लिए कहा। बॉक्सिंग के प्रति पिता के जज्बे को देखते हुए कविता ने वर्ष 2004 में भिवानी में कोच जगदीश के पास प्रशिक्षण शुरू कर दिया। कविता के परिवार में सबसे बड़ी बहन संतोष, रेखा, सोनू और दो छोटू भाई कर्मवीर और नीरज है। कविता को बॉक्सिंग करता देख दोनों छोटे भाई भी बॉक्सिंग में आ गए। तमाम परिस्थितियों से निकलने के बाद आज कविता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुकी है। जबकि भाई कर्मवीर एकेडमी में बॉक्सिंग करता और सबसे छोटा भाई नीरज सेना में बॉक्सर है।
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2011 में हुई थी शादी, पुलिस में पहली प्राथमिकता महिलाओं को न्याय दिलाना
कविता की शादी वर्ष 2011 में रोहतक के उत्तम विहार निवासी सुधीर खरब के साथ हुई थी। सुधीर दिल्ली पुलिस में कार्यरत है। फिलहाल में कविता अपने दो साल के बच्चे, सास कृष्ण और ससुर राज सिंह के साथ रोहतक में रहती है। कविता का कहना है कि वह राजीव गांधी स्टेडियम स्थित नेशनल बॉक्सिंग एकेडमी में प्रेक्टिस करती है। हर रोज सुबह पांच बजे बच्चे को सास-ससुर के पास छोड़कर स्टेडियम में जाती है। कविता का कहना है कि पुलिस में आने के बाद महिलाओं की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें न्याय दिलाना पहली प्राथमिकता रहेगी।
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यह है उपलब्धि
कविता को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 मे अर्जुन अवार्ड और वर्ष 2014 में भीम अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। कविता दो बार वर्ल्ड चैंपियनशिप, 4 बार एशियन चैंपियनशिप और 4 बार एशिया कप में पदक विजेता रही है। इसके अलावा 8 बार नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, 5 बार फेडरेशन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, 6 बार अखिल भारतीय पुलिस गेम्स में स्वर्ण पदक और 2 बार वर्ल्ड पुलिस गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुकी है।
एसपी ने किया सम्मानित
कविता ने हाल में 27 से 31 अक्तूबर तक पुणे में आयोजित अखिल भारतीय पुलिस रेस्लिंग क्लस्टर चैंपियनशिप 2017 में हरियाणा पुलिस का प्रतिनिधित्व किया था। इसमें कविता ने फाइनल मुकाबले में एसएसबी की ईबेमचा को हराकर स्वर्ण पदक झटका। वीरवार को एसपी पंकज नैन ने अपने कार्यालय में कविता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कविता से अन्य बेटियों को प्रेरणा लेनी चाहिए।