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Updated Tue, 27 Jun 2017 12:47 AM IST
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जीएसटी से पहले सन्नाटे में जिले के उद्योग
प्रवीण शर्मा
रेवाड़ी।
वस्तु एवं बिक्री कर (जीएसटी) पूरे देश में एक जुलाई से लागू होना है, लेकिन इससे पहले उद्योगों में सन्नाटा छा गया है। सरकार की तरफ से अपने स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित कर उद्योगपतियों को इससे होने वाले लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसके बाद भी उद्योगपति आशंकित हैं। इसका सीधा असर उद्योगों पर पड़ रहा है। रेवाड़ी के बावल और धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में मिलाकर करीब 1200 इकाइयां हैं। यहां से प्रतिदिन करीब 600 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। जीएसटी की आहट के बाद से ही उद्योगों पर असर पड़ना शुरू हो गया है। उद्योगपतियों का कहना है कि जीएसटी के संबंध में अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक यह बिल्कुल साधारण रहेगी। फिर भी वे आशंकित हैं, इसका कारण यह है कि औद्योगिक क्षेत्र में अधिकांश इकाइयों में उत्पादन ठप है।
पहले नोटबंदी अब जीएसटी की मार
जनवरी माह में नोटबंदी के बाद अब उद्योगों पर सीधा असर देखने को मिला। इससे कई इकाइयां काफी दिनों तक बंद रही। सर्वाधिक असर ठेके पर लगे लोगों को मानदेय देने में देखा गया। खाते नहीं होने के कारण इन्हें कैश में मानदेय दिया जाता था, लेकिन नोटबंदी ने इस पर बहुत असर डाला। रही सही कसर अब जीएसटी की आहट ने पूरी कर दी है। औद्योगिक इकाइयां पूरा माल नहीं मंगा पा रही हैं। इससे उद्योगों पर असर पड़ रहा है।
ट्रांसपोर्टर भी कर रहे आनाकानी
इतना ही नहीं ट्रांसपोर्टर भी अपना माल यहां तक पहुंचाने में अब आनाकानी करने लगे हैं। वह भी अब 30 जून तक की प्रतीक्षा में लगे हैं। उनका मानना है कि इससे उन्हें इतने दिन का क्रेडिट नहीं मिलेगा। ऐसे में वे इन इकाइयों तक माल नहीं पहुंचा रहे हैं। जिससे सीधे तौर पर औद्योगिक इकाइयां प्रभावित हो रही हैं। यह सही है कि जीएसटी के आने से पूर्व औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उद्योगपति यह भी मानते हैं कि जीएसटी के बाद इन्हें लाभ होगा। पहले जहां तीन से चार तरह की रिटर्न और सात से आठ तरह के टैक्स भरने पड़ते थे। अब वह एक तरह से भरे जाएंगे। सरकार इसके लिए जगह-जगह वर्कशॉप भी लगा रही है। पहले रिटर्न भरने के बाद उसे जांचने के लिए आते थे, लेकिन अभी भरी हुई रिटर्न को ही मान लिया जाएगा।
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यह सही है कि अभी उद्योगों पर प्रभाव पड़ रहा है। लेकिन यह केवल एक भय है। जीएसटी लागू होने के बाद उद्योगों को बहुत लाभ होगा। कई तरह के झंझटों से भी मुक्ति मिलेगी। - ब्रह्मप्रकाश भारद्वाज, डीजेएम कामर्शियल, पैरामाउंट कम्यूनिकेशन लिमिटेड
जीएसटी को लेकर उद्योगपति आशंकित जरूर हैं। चिंता करने की कोई बात नहीं है। जीएसटी में काफी कुछ उद्योपतियों के फायदे के लिए ही है। - रामपाल, एचआर हेड, एनटीएन बैरिंग
सरकार की ओर से जीएसटी को लेकर कार्यशालाएं लगाई गई। इसमें जीएसटी से होने वाले लाभ बताए हैं, इसमें अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं है। - विनोद जोशी, जीएम, शंकाई
जीएसटी को लेकर उद्योगपतियों को अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसमें हमारे लाभ का ही समावेश है। कई झंझटों से मुक्ति मिलेगी। - अनुराधा, एचआर हैड, डी डायमंड
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प्रवीण शर्मा
रेवाड़ी।
वस्तु एवं बिक्री कर (जीएसटी) पूरे देश में एक जुलाई से लागू होना है, लेकिन इससे पहले उद्योगों में सन्नाटा छा गया है। सरकार की तरफ से अपने स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित कर उद्योगपतियों को इससे होने वाले लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसके बाद भी उद्योगपति आशंकित हैं। इसका सीधा असर उद्योगों पर पड़ रहा है। रेवाड़ी के बावल और धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में मिलाकर करीब 1200 इकाइयां हैं। यहां से प्रतिदिन करीब 600 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। जीएसटी की आहट के बाद से ही उद्योगों पर असर पड़ना शुरू हो गया है। उद्योगपतियों का कहना है कि जीएसटी के संबंध में अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक यह बिल्कुल साधारण रहेगी। फिर भी वे आशंकित हैं, इसका कारण यह है कि औद्योगिक क्षेत्र में अधिकांश इकाइयों में उत्पादन ठप है।
पहले नोटबंदी अब जीएसटी की मार
जनवरी माह में नोटबंदी के बाद अब उद्योगों पर सीधा असर देखने को मिला। इससे कई इकाइयां काफी दिनों तक बंद रही। सर्वाधिक असर ठेके पर लगे लोगों को मानदेय देने में देखा गया। खाते नहीं होने के कारण इन्हें कैश में मानदेय दिया जाता था, लेकिन नोटबंदी ने इस पर बहुत असर डाला। रही सही कसर अब जीएसटी की आहट ने पूरी कर दी है। औद्योगिक इकाइयां पूरा माल नहीं मंगा पा रही हैं। इससे उद्योगों पर असर पड़ रहा है।
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ट्रांसपोर्टर भी कर रहे आनाकानी
इतना ही नहीं ट्रांसपोर्टर भी अपना माल यहां तक पहुंचाने में अब आनाकानी करने लगे हैं। वह भी अब 30 जून तक की प्रतीक्षा में लगे हैं। उनका मानना है कि इससे उन्हें इतने दिन का क्रेडिट नहीं मिलेगा। ऐसे में वे इन इकाइयों तक माल नहीं पहुंचा रहे हैं। जिससे सीधे तौर पर औद्योगिक इकाइयां प्रभावित हो रही हैं। यह सही है कि जीएसटी के आने से पूर्व औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उद्योगपति यह भी मानते हैं कि जीएसटी के बाद इन्हें लाभ होगा। पहले जहां तीन से चार तरह की रिटर्न और सात से आठ तरह के टैक्स भरने पड़ते थे। अब वह एक तरह से भरे जाएंगे। सरकार इसके लिए जगह-जगह वर्कशॉप भी लगा रही है। पहले रिटर्न भरने के बाद उसे जांचने के लिए आते थे, लेकिन अभी भरी हुई रिटर्न को ही मान लिया जाएगा।
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यह सही है कि अभी उद्योगों पर प्रभाव पड़ रहा है। लेकिन यह केवल एक भय है। जीएसटी लागू होने के बाद उद्योगों को बहुत लाभ होगा। कई तरह के झंझटों से भी मुक्ति मिलेगी। - ब्रह्मप्रकाश भारद्वाज, डीजेएम कामर्शियल, पैरामाउंट कम्यूनिकेशन लिमिटेड
जीएसटी को लेकर उद्योगपति आशंकित जरूर हैं। चिंता करने की कोई बात नहीं है। जीएसटी में काफी कुछ उद्योपतियों के फायदे के लिए ही है। - रामपाल, एचआर हेड, एनटीएन बैरिंग
सरकार की ओर से जीएसटी को लेकर कार्यशालाएं लगाई गई। इसमें जीएसटी से होने वाले लाभ बताए हैं, इसमें अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं है। - विनोद जोशी, जीएम, शंकाई
जीएसटी को लेकर उद्योगपतियों को अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसमें हमारे लाभ का ही समावेश है। कई झंझटों से मुक्ति मिलेगी। - अनुराधा, एचआर हैड, डी डायमंड