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इमरजेंसी के दौरान जेल में बंद रहे लोगों को केंद्रीय मंत्री ने किया सम्मानित

Mon, 26 Jun 2017 01:31 AM IST
Updated Mon, 26 Jun 2017 01:31 AM IST
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इमरजेंसी के दौरान जेल में बंद रहे लोगों को केंद्रीय मंत्री ने किया सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक। सामाजिक न्याय और अधिकारिता केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर का कहना है कि आजादी के बाद 25 जून 1975 का दिन अब तक सबसे काला दिन है। देश में इमरजेंसी लगाकर सैकड़ों लोगों को जेलों में डाल दिया गया था। उस समय को याद करके आज भी रोंगटे खडे़ हो जाते हैं। वह रविवार को जिला विकास भवन में लोकतंत्र सेनानी संगठन की ओर से हुए सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने 25 जून को आपातकाल विरोधी दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन उन लोगों को सम्मानित किया जाता है, जिन्हें आपातकाल में जेलों में बंद कर दिया गया और यातनाएं दी गईं। सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा कि आपातकाल के दौरान यातनाएं देने का रोहतक प्रमुख केंद्र रहा।
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यहीं पर लाल कृष्ण आडवाणी और भैरो सिंह शेखावत जैसे बड़े नेता बंद रहे थे। बाद में उन्हें दूसरी जेलों में शिफ्ट किया गया।

79 में से 33 लोग ही पहुंचे सम्मान लेने
लोकतंत्र सेनानी संगठन की ओर से इमरजेंसी में जेल में गए 79 लोगों की सूची तैयार की गई थी। सम्मान समारोह में 33 लोग ही पहुंचे। इसमें गुलशन भाटिया, सतीश कत्याल, ओम प्रकाश दुआ, कृष्णलाल पोपली, धर्मपाल कक्कड़, गुलशन कुमार, विजय तुल्ली, अरविंद, राजकुमार बहल, श्याम सुन्दर पसरिजा, वेद प्रकाश दुआ, राम प्रकाश खेरडी, मंडल सैन, संजय मल्होत्रा, विजय गुप्ता, अनिल कुमार जैन, सुशील अरोड़ा और जोगेंद्र गुगनानी आए।
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इसके साथ ही मनोहर विरमानी, अमर नाथ भाटिया, सुशीला भाटिया, बसंत बैंसी, ज्वाला, जतिन, संजीव पसरिजा, लखपत, मनोज तुल्ली, राकेश साहनी, ईश्वर अग्घी, मदन हरजाई, गुलशन भाटिया, नवीन भाटिया और अजय बंसल शामिल हुए। संगठन के जिला अध्यक्ष सतीश पसरीजा का कहना है कि कई बुजुर्ग का देहांत हो चुका है। कई दूसरी जगह चले गए, इस कारण संख्या कम रही।

बुजुर्ग बोले, एक ताम्रपत्र ही दे देते
बैंसी से आए बुजुर्ग बसंत ने कहा कि वे तीन माह इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे। अब बैंसी में गोशाला चलाते हैं। आयोजकों की तरफ से एक शॉल देकर सम्मानित किया गया है। कम से कम ताम्रपत्र या शील्ड देनी चाहिए थी।


चाचा कहते थे कि राजनीति अच्छी चीज नहीं, इससे दूर ही रहना
भाजपा के कद्दावर नेता और डिप्टी सीएम रहे डॉक्टर मंगलसेन के भतीजे अरविंद दिल्ली से समारोह में भाग लेने के लिए आए। अरविंद 17 साल की उम्र में इमरजेंसी के दौरान जेल में गए थे। हालांकि 15 दिन बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। अब वे दिल्ली में कारोबारी हैं। अरविंद का कहना है कि अच्छे दिन जरूर आएंगे। पीएम मोदी की नीतियों में पूरा विश्वास है। हालांकि डॉक्टर मंगलसेन कहते थे कि राजनीति अच्छी चीज नहीं, इससे दूर ही रहना।
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