{"_id":"5b75f38042c7926d5046edba","slug":"31534456704-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अटल बिहारी वाजपेयी का गहरा रहा रोहतक से नाता....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अटल बिहारी वाजपेयी का गहरा रहा रोहतक से नाता....
Updated Fri, 17 Aug 2018 03:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोहतक से जुड़ी अटल यादें........
फ्लैग : रोहतक से गहरा रहा अटल प्रेम, तीन माह बड़ा बाजार में गुजारे, बुजुर्ग भाजपाई बोले-देखकर ही कार्यकर्ताओं में आ जाता था जोश, याद आ जाती थी उनकी कविता
हेडिंग : सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा
: 2005 के विधानसभा चुनाव में आए थे आखिरी बार रोहतक
: डॉक्टर मंगलसेन से रहा करीबी रिश्ता
विजेंद्र कौशिक
रोहतक। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का रोहतक से गहरा जुड़ाव रहा। 1960 में जनसंघ के समय तो तीन माह तक बड़ा बाजार स्थित पार्टी कार्यालय में गुजारे। भाजपा के दिग्गज नेता रहे डॉक्टर मंगलसेन से उनका करीबी रिश्ता था। आखिरी बार पूर्व प्रधानमंत्री 2005 के विधानसभा चुनाव में आए और जाट कॉलेज में जनसभा को संबोधित किया। उनको नजदीक से जानने वाले भाजपा के बुजुर्ग नेता व कार्यकर्ताओं का कहना है कि अटल नेता नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत थे, जिनको देखकर ही जोश आ जाता था। उनकी कविता आज भी याद है....
बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा,
कदम मिलाकर चलना होगा।
हर पल मुस्कराते रहते थे अटल
सल्लारा मोहल्ला निवासी 67 वर्षीय मदनलाल ने बताया कि 1960 की बात है, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष होते थे। वह रोहतक आए और बड़ा बाजार स्थित कार्यालय में तीन माह तक रहे। मैं अटल बिहारी वाजपेयी, डॉक्टर मंगलसेन व किशन लाल शर्मा के कपड़े धुलाकर लाता था। उनकी सेवा करने का मौका मिला। वह हर पल मुस्कराते रहते थे। उनके निधन से बेहद आहत हूं।
विज्ञापन
..जब अटल ने मुझे गोद में उठा लिया
प्रताप मोहल्ला निवासी अजय खनिजो ने बताया कि 1985 में रोहतक विधानसभा का उपचुनाव था। भाजपा से डॉक्टर मंगलसेन मैदान में थे, जबकि कांग्रेस की ओर से लाला सेठ किशनदास मैदान में थे। उस समय मेरे पिता चमनलाल खनिजो जिलाध्यक्ष थे। हिंदू कॉलेज में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं की मीटिंग ली। इसके बाद वे हमारे घर चाय पीने आए थे, जब फोटो खींची जा रही थी, तब उन्होंने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया था।
मिसरी व काली मिर्च रखते थे हर पल
भाजपा कार्यकर्ता गुलशन भाटिया ने बताया कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी जब भी रोहतक आते थे, उनके लिए मिसरी व काली मिर्च की स्पेशल व्यवस्था करते थे। क्योंकि अपने संबोधन के दौरान कभी भी मिसरी व काली मिर्च मांग लेते थे।
जब अटल देने लगे 40 रुपये चप्पल के
भिवानी स्टैंड पर जूतों की दुकान चलाने वाले 93 वर्षीय शिवदत्ता ने बताया कि 1963 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कलानौर में जनसभा थी। इसी बीच उनकी चप्पल गायब हो गई। मैं 40 रुपये में उनके लिए चप्पल खरीद कर लाया। अटल जी, पैसे देने लगे, मैंने मना कर दिया। फिर भी जबरन पैसे उन्होंने दिए थे।
आगे कैसे बढ़ू , स्टेज से गिर जाऊंगा
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र बंसल ने बताया कि वाजपेयी काफी हंसमुख थे। 1997 में पुलिस लाइन में जनसभा थी। जब अटल संबोधन करने के लिए मंच पर आए तो कार्यकर्ता नारे लगाने लगे कि, अटल जी आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं। मजाक में अटल बोले, आगे कैसे बढ़ू, स्टेज से गिर जाऊंगा। यह सुनकर कार्यकर्ता हंसने लगे।
बाबरा के रसगुल्ले बेहद पसंद थे अटल को
भाजपा चंद्रभान सिंगला ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बाबरा मोहल्ला के रसगुल्ले काफी पसंद थे। जब वे बाबरा मोहल्ला में लाला हुकमचंद गोयल के घर आए तो उनके सामने स्पेशल तौर पर रस्सगुल्ले रखे गए।
जब सीढ़ियां बनानी पड़ी छोटी-छोटी
भाजपा के निवर्तमान पार्षद अशोक खुराना ने बताया कि 2005 में अटल की जाट कॉलेज में जनसभा थी। उस समय उनके पैरों में दर्द रहता था। इस कारण जब स्टेज का निर्माण करवाया गया तो सीढ़ियां काफी छोटी-छोटी बनाई गईं, ताकि अटल को ऊपर चढ़ने समय परेशानी न हो।
विज्ञापन
फ्लैग : रोहतक से गहरा रहा अटल प्रेम, तीन माह बड़ा बाजार में गुजारे, बुजुर्ग भाजपाई बोले-देखकर ही कार्यकर्ताओं में आ जाता था जोश, याद आ जाती थी उनकी कविता
हेडिंग : सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा
: 2005 के विधानसभा चुनाव में आए थे आखिरी बार रोहतक
: डॉक्टर मंगलसेन से रहा करीबी रिश्ता
विजेंद्र कौशिक
रोहतक। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का रोहतक से गहरा जुड़ाव रहा। 1960 में जनसंघ के समय तो तीन माह तक बड़ा बाजार स्थित पार्टी कार्यालय में गुजारे। भाजपा के दिग्गज नेता रहे डॉक्टर मंगलसेन से उनका करीबी रिश्ता था। आखिरी बार पूर्व प्रधानमंत्री 2005 के विधानसभा चुनाव में आए और जाट कॉलेज में जनसभा को संबोधित किया। उनको नजदीक से जानने वाले भाजपा के बुजुर्ग नेता व कार्यकर्ताओं का कहना है कि अटल नेता नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत थे, जिनको देखकर ही जोश आ जाता था। उनकी कविता आज भी याद है....
विज्ञापन
बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा,
कदम मिलाकर चलना होगा।
हर पल मुस्कराते रहते थे अटल
सल्लारा मोहल्ला निवासी 67 वर्षीय मदनलाल ने बताया कि 1960 की बात है, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष होते थे। वह रोहतक आए और बड़ा बाजार स्थित कार्यालय में तीन माह तक रहे। मैं अटल बिहारी वाजपेयी, डॉक्टर मंगलसेन व किशन लाल शर्मा के कपड़े धुलाकर लाता था। उनकी सेवा करने का मौका मिला। वह हर पल मुस्कराते रहते थे। उनके निधन से बेहद आहत हूं।
विज्ञापन
..जब अटल ने मुझे गोद में उठा लिया
प्रताप मोहल्ला निवासी अजय खनिजो ने बताया कि 1985 में रोहतक विधानसभा का उपचुनाव था। भाजपा से डॉक्टर मंगलसेन मैदान में थे, जबकि कांग्रेस की ओर से लाला सेठ किशनदास मैदान में थे। उस समय मेरे पिता चमनलाल खनिजो जिलाध्यक्ष थे। हिंदू कॉलेज में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं की मीटिंग ली। इसके बाद वे हमारे घर चाय पीने आए थे, जब फोटो खींची जा रही थी, तब उन्होंने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया था।
मिसरी व काली मिर्च रखते थे हर पल
भाजपा कार्यकर्ता गुलशन भाटिया ने बताया कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी जब भी रोहतक आते थे, उनके लिए मिसरी व काली मिर्च की स्पेशल व्यवस्था करते थे। क्योंकि अपने संबोधन के दौरान कभी भी मिसरी व काली मिर्च मांग लेते थे।
जब अटल देने लगे 40 रुपये चप्पल के
भिवानी स्टैंड पर जूतों की दुकान चलाने वाले 93 वर्षीय शिवदत्ता ने बताया कि 1963 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कलानौर में जनसभा थी। इसी बीच उनकी चप्पल गायब हो गई। मैं 40 रुपये में उनके लिए चप्पल खरीद कर लाया। अटल जी, पैसे देने लगे, मैंने मना कर दिया। फिर भी जबरन पैसे उन्होंने दिए थे।
आगे कैसे बढ़ू , स्टेज से गिर जाऊंगा
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र बंसल ने बताया कि वाजपेयी काफी हंसमुख थे। 1997 में पुलिस लाइन में जनसभा थी। जब अटल संबोधन करने के लिए मंच पर आए तो कार्यकर्ता नारे लगाने लगे कि, अटल जी आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं। मजाक में अटल बोले, आगे कैसे बढ़ू, स्टेज से गिर जाऊंगा। यह सुनकर कार्यकर्ता हंसने लगे।
बाबरा के रसगुल्ले बेहद पसंद थे अटल को
भाजपा चंद्रभान सिंगला ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बाबरा मोहल्ला के रसगुल्ले काफी पसंद थे। जब वे बाबरा मोहल्ला में लाला हुकमचंद गोयल के घर आए तो उनके सामने स्पेशल तौर पर रस्सगुल्ले रखे गए।
जब सीढ़ियां बनानी पड़ी छोटी-छोटी
भाजपा के निवर्तमान पार्षद अशोक खुराना ने बताया कि 2005 में अटल की जाट कॉलेज में जनसभा थी। उस समय उनके पैरों में दर्द रहता था। इस कारण जब स्टेज का निर्माण करवाया गया तो सीढ़ियां काफी छोटी-छोटी बनाई गईं, ताकि अटल को ऊपर चढ़ने समय परेशानी न हो।