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Rohtak News: ट्रॉमा सेंटर में एक साथ पहुंचे 30 घायल, आरडीए ने निभाया मानवता का फर्ज
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रोहतक। पीजीआई के ट्रामा सेंटर में शनिवार सुबह 30 से ज्यादा घायल पहुंचे। यहां एक के बाद एक अनेक एंबुलेंस खून में लथपथ विद्यार्थी, शिक्षक व अन्य लोगों को लेकर पहुंची। मरीजों की इस भीड़ के कारण यहां अफरा-तफरी मच गई। हादसे की सूचना आरडीए (रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) को भी लगी। इसके बाद हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों की टीम तुरंत ट्रॉमा सेंटर पहुंची। यहां घायल बच्चों व मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की परेशानी न होने देने की जिम्मेदारी लेते हुए उनका उपचार कर मानवता का परिचय दिया।
जींद में शनिवार सुबह बड़ा सड़क हादसा हुआ। इसमें करीब 21 विद्यार्थी समेत करीब 50 लोग घायल हो गए। इनमें से 37 मरीज पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। इन मरीजों के लिए एक बार यहां स्टाफ कम पड़ गया। इससे पहले कहीं कोई गड़बड़ी होती, वहां आरडीए की टीम पहुंच गई। इन्होंने वहां मौजूद स्टाफ को सहयोग करते हुए मरीजों के उपचार की प्रक्रिया शुरू कराई। यहां एसडीएम राकेश कुमार के बाद स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, पीजीआई निदेशक डॉ. एसएस लोहचब व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ईश्वर भी पहुंचे। इन्होंने भी व्यवस्था बनाने के लिए ट्रामा के ऊपर वार्ड से चिकित्सकों व नर्सों को बुला कर व्यवस्था बनाने में सहयोग की अपील की। ज्यादातर को हलकी चोटें होने के कारण इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। अधिक चोट वालों की जांच के बाद इलाज किया गया। इसके चलते उन्हें कुछ समय वहां रुकना पड़ा। घटना की सूचना मिलने के बाद उपायुक्त यशपाल, एडीसी महेंद्रपाल, पुलिस अधीक्षक उदय सिंह मीना, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर भी मौके पर पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। साथ ही चिकित्सकों से उनके बेहतर उपचार की व्यवस्था की अपील की।
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नाक व मुंह से खून बहता रहा और घायल बच्चों को बाहर निकालता रहा
- रेडक्रॉस के जिला प्रशिक्षण अधिकारी जतिन शर्मा बोले-एक धमका सुनाई दिया था, इसके बाद हर तरफ चीख पुकार मची थी
फोटो: 26 सीटीवाई 157 पीएएन
विकास सैनी
रोहतक। हम सब तो सो रहे थे। सुबह अचानक एक धमाका सुनाई दिया। इसके साथ ही अपनी सीट से उछल कर दूसरी सीट पर जा गिरा। कुछ पल बाद होश संभाला तो हर तरफ चीख पुकार सुनाई दी। बस का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका था। लोग खून से लथपथ पड़े थे। बच्चे दर्द से कराह रहे थे। यह देखकर एक बार तो रो पड़ा। खुद को रोक ही नहीं पाया। फिर हिम्मत कर बच्चों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। यह कहना है रेडक्रॉस के जिला प्रशिक्षण अधिकारी जतिन शर्मा का। वे शनिवार को पीजीआई में उपचार के दौरान अमर उजाला से घटना के दर्दनाक पल साझा कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि मेरी नाक व मुंह पर चोट लगी थी। उनसे खून बह रहा था। हाथ लगा कर देखा तो खून हथेली में आ गया। इसे साफ कर बच्चों की मदद के लिए आवाज लगाई। आसपास मौजूद शिक्षक व अन्य लोगों की मदद से छह बच्चों को बस से बाहर निकाला। साथ ही अपने घर, मुख्यालय व अन्य अधिकारियों को हादसे की सूचना दी। इसके चलते कुछ देर बाद ही वहां मदद पहुंच गई। एंबुलेंस हमें एक के बाद एक वहां से पीजीआई ले आई। अब इलाज के बाद कुछ राहत मिली है।
पीजीआई में पहुंचे ये घायल
घायलों में राजकुमार, नेहा, विक्रम कुमार, चालक (अज्ञात), अंकित, अर्पित, राजेश, सुशीला, प्रियंका, रॉकी, जतिन शर्मा, ललिता, इशिता, कीर्ति, अंशुल, मानवी, सुनीता, मूर्ति, साहिल, निकिता, छात्र (अज्ञात), निकिता, यशविंदर, कृष्ण, रामकृष्ण, रॉकी, मानसी, हिमांशी, घायल (अज्ञात), विक्रम, प्रोमिला, आंचल, प्रिया, रोहताश, घायल (घायल), सिमरन, जयोति, सीमा शामिल है।
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जींद में शनिवार सुबह बड़ा सड़क हादसा हुआ। इसमें करीब 21 विद्यार्थी समेत करीब 50 लोग घायल हो गए। इनमें से 37 मरीज पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। इन मरीजों के लिए एक बार यहां स्टाफ कम पड़ गया। इससे पहले कहीं कोई गड़बड़ी होती, वहां आरडीए की टीम पहुंच गई। इन्होंने वहां मौजूद स्टाफ को सहयोग करते हुए मरीजों के उपचार की प्रक्रिया शुरू कराई। यहां एसडीएम राकेश कुमार के बाद स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, पीजीआई निदेशक डॉ. एसएस लोहचब व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ईश्वर भी पहुंचे। इन्होंने भी व्यवस्था बनाने के लिए ट्रामा के ऊपर वार्ड से चिकित्सकों व नर्सों को बुला कर व्यवस्था बनाने में सहयोग की अपील की। ज्यादातर को हलकी चोटें होने के कारण इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। अधिक चोट वालों की जांच के बाद इलाज किया गया। इसके चलते उन्हें कुछ समय वहां रुकना पड़ा। घटना की सूचना मिलने के बाद उपायुक्त यशपाल, एडीसी महेंद्रपाल, पुलिस अधीक्षक उदय सिंह मीना, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर भी मौके पर पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। साथ ही चिकित्सकों से उनके बेहतर उपचार की व्यवस्था की अपील की।
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नाक व मुंह से खून बहता रहा और घायल बच्चों को बाहर निकालता रहा
- रेडक्रॉस के जिला प्रशिक्षण अधिकारी जतिन शर्मा बोले-एक धमका सुनाई दिया था, इसके बाद हर तरफ चीख पुकार मची थी
फोटो: 26 सीटीवाई 157 पीएएन
विकास सैनी
रोहतक। हम सब तो सो रहे थे। सुबह अचानक एक धमाका सुनाई दिया। इसके साथ ही अपनी सीट से उछल कर दूसरी सीट पर जा गिरा। कुछ पल बाद होश संभाला तो हर तरफ चीख पुकार सुनाई दी। बस का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका था। लोग खून से लथपथ पड़े थे। बच्चे दर्द से कराह रहे थे। यह देखकर एक बार तो रो पड़ा। खुद को रोक ही नहीं पाया। फिर हिम्मत कर बच्चों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। यह कहना है रेडक्रॉस के जिला प्रशिक्षण अधिकारी जतिन शर्मा का। वे शनिवार को पीजीआई में उपचार के दौरान अमर उजाला से घटना के दर्दनाक पल साझा कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि मेरी नाक व मुंह पर चोट लगी थी। उनसे खून बह रहा था। हाथ लगा कर देखा तो खून हथेली में आ गया। इसे साफ कर बच्चों की मदद के लिए आवाज लगाई। आसपास मौजूद शिक्षक व अन्य लोगों की मदद से छह बच्चों को बस से बाहर निकाला। साथ ही अपने घर, मुख्यालय व अन्य अधिकारियों को हादसे की सूचना दी। इसके चलते कुछ देर बाद ही वहां मदद पहुंच गई। एंबुलेंस हमें एक के बाद एक वहां से पीजीआई ले आई। अब इलाज के बाद कुछ राहत मिली है।
पीजीआई में पहुंचे ये घायल
घायलों में राजकुमार, नेहा, विक्रम कुमार, चालक (अज्ञात), अंकित, अर्पित, राजेश, सुशीला, प्रियंका, रॉकी, जतिन शर्मा, ललिता, इशिता, कीर्ति, अंशुल, मानवी, सुनीता, मूर्ति, साहिल, निकिता, छात्र (अज्ञात), निकिता, यशविंदर, कृष्ण, रामकृष्ण, रॉकी, मानसी, हिमांशी, घायल (अज्ञात), विक्रम, प्रोमिला, आंचल, प्रिया, रोहताश, घायल (घायल), सिमरन, जयोति, सीमा शामिल है।