{"_id":"5ad267b94f1c1b9d098b496b","slug":"21523738553-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विनेश ने जीता गोल्ड तो झूम उठा बलाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विनेश ने जीता गोल्ड तो झूम उठा बलाली
Updated Sun, 15 Apr 2018 02:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विनेश ने जीता गोल्ड तो झूम उठा बलाली
चरखी दादरी।
गांव की लाडली विनेश फौगाट के गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक जीतते ही बलाली गांव झूम उठा। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे ही विनेश के परिजन व ग्रामीण टीवी सेट के सामने नजर गड़ाकर बैठ गए थे। कनाडा मूल की पहलवान व पूर्व वर्ल्ड चैंपियन जैसिका मैकडोनाल्ड फाइनल मुकाबले में विनेश के सामने पूरे छह मिनट भी नहीं टिक पाई और निर्धारित समय से 86 सेकेंड पहले ही विनेश ने मैच अपने नाम कर लिया। पहले हाफ में भी टेक्निकल सुपीयरिटी के आधार पर विनेश विजेता बनी थी लेकिन प्रतिद्वंदी खेमे के रेफरी के फैसले को चैलेंज देने पर 13-2 के स्कोर को बदलकर 10-3 किया गया। इसके बाद मैच दूसरे हाफ में करीब एक मिनट 34 सेकेंड तक चला और विनेश ने 13-3 से बाजी अपने नाम कर कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया।
सुबह छह बजे ही बलाली के ग्रामीण व विनेश के परिजन टीवी सेट पर नजरें गड़ाकर बैठ गए थे लेकिन नाइजीरिया व आस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच का प्रसारण न दिखाए जाने से ग्रामीणों को मायूसी हाथ लगी। विनेश ने पहले नाइजीरियन पहलवान को संघर्षपूर्ण मुकाबले में पटखनी दी तो आस्ट्रेलिया महिला पहलवान को एकतरफ पटखनी दे डाली। दोपहर करीब एक बजे विनेश की गोल्ड मेडल के लिए बाउट कनाडा की पहलवान से हुई। वर्ल्ड चैंपियन जैसिका मैकडोनाल्ड से कड़ी टक्कर मिलने की आशंका पर मैच से पहले टीवी सेट के सामने बैठे बलाली के ग्रामीण चिंतित मुद्रा में नतर आए। विनेश के शुरुआत में ही दोपहरी पट दांव लगाकर प्रतिद्वंदी पहलवान को कंधे पर उठाते ही बुजुर्ग ग्रामीण झूम उठे और लाडली के सम्मान में तालियां बजाकर खुशी का इजहार किया। मैच विनेश के पक्ष में रहने के बाद ग्रामीण इक्ट्ठे होकर विनेश फौगाट के घर पहुंचे और परिजनों का मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया।
गोल्ड मेडल जीतते ही गांव की महिलाएं विनेश की मां प्रेमलता को बधाई देने पहुंची और बेटी के पदक जीतने की खुशी में प्रेमलता खुद को नाचने से नहीं रोक पाई। देखते ही देखते विनेश के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। विनेश के भाई हरविंद्र फौगाट ने बताया कि पहले दो मैच का प्रसारण तो वो नहीं देख पाए लेकिन कनाडाई पहलवान के खिलाफ विनेश ने दोहरी पट दांव का दो बार इस्तेमाल कर चार-चार अंक बटोरे और इसका फायदा विनेश को मिला। रेफरी ने टेक्निकल सुपीयरिटी के आधार पर विनेश को बाउट पूरी होने से पहले ही विजेता घोषित कर दिया।
विज्ञापन
महावीर फौगाट बोले: गोल्ड जीतकर विनेश ने दी दोहरी खुशी
गीता व बबीता फौगाट के पिता व कोच तथा विनेश के ताऊ द्रोणाचार्य अवार्डी पहलवान महावीर फौगाट ने बताया कि बबीता ने रजत पदक जीता था लेकिन उन्हें विनेश से गोल्ड मेडल की उम्मीद थी। उनकी दूसरी बेटी विनेश उम्मीदों पर खरी उतरी। उसने गोल्ड मेडल जीतकर उन्हें दोहरी खुशी दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि दोनों बेटियां कॉमनवेल्थ गेम्स से गोल्ड और सिल्वर मेडल लेकर लौटीं हैं।
डेढ़ साल से नहीं आई घर, बेटी को देखने को हूं बैचेन: प्रेमलता
अमर उजाला से बातचीत में विनेश फौगाट की मां प्रेमलता ने बताया कि ओलंपिक के दौरान घुटने में चोट लगने पर ही विनेश कुछ दिन के लिए घर आई थी। अब पिछले डेढ़ साल से वह घर नहीं आई और बैंगलूरू कैंप में ही अभ्यास कर रही थी। उन्होेंने कहा कि अब उन्हें बेटी के घर आने का इंतजार है।
देशवासियों की उम्मीदों पर खरी उतरी बहन: हरविंद्र
विनेश के भाई हरविंद्र फौगाट ने बताया कि विनेश से ओलंपिक गेम में भी देशवासियों को गोल्ड मेडल की उम्मीदें थी लेकिन दुर्भाग्यवश चोट लगने से बाउट के दौरान ही उसे बाहर होना पड़ा। हरविंद्र ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम में भी विनेश से देशवासियों को बेहतरीन प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद थी और उसे खुशी है कि उसकी बहन देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरी।
विज्ञापन
चरखी दादरी।
गांव की लाडली विनेश फौगाट के गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक जीतते ही बलाली गांव झूम उठा। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे ही विनेश के परिजन व ग्रामीण टीवी सेट के सामने नजर गड़ाकर बैठ गए थे। कनाडा मूल की पहलवान व पूर्व वर्ल्ड चैंपियन जैसिका मैकडोनाल्ड फाइनल मुकाबले में विनेश के सामने पूरे छह मिनट भी नहीं टिक पाई और निर्धारित समय से 86 सेकेंड पहले ही विनेश ने मैच अपने नाम कर लिया। पहले हाफ में भी टेक्निकल सुपीयरिटी के आधार पर विनेश विजेता बनी थी लेकिन प्रतिद्वंदी खेमे के रेफरी के फैसले को चैलेंज देने पर 13-2 के स्कोर को बदलकर 10-3 किया गया। इसके बाद मैच दूसरे हाफ में करीब एक मिनट 34 सेकेंड तक चला और विनेश ने 13-3 से बाजी अपने नाम कर कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया।
सुबह छह बजे ही बलाली के ग्रामीण व विनेश के परिजन टीवी सेट पर नजरें गड़ाकर बैठ गए थे लेकिन नाइजीरिया व आस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच का प्रसारण न दिखाए जाने से ग्रामीणों को मायूसी हाथ लगी। विनेश ने पहले नाइजीरियन पहलवान को संघर्षपूर्ण मुकाबले में पटखनी दी तो आस्ट्रेलिया महिला पहलवान को एकतरफ पटखनी दे डाली। दोपहर करीब एक बजे विनेश की गोल्ड मेडल के लिए बाउट कनाडा की पहलवान से हुई। वर्ल्ड चैंपियन जैसिका मैकडोनाल्ड से कड़ी टक्कर मिलने की आशंका पर मैच से पहले टीवी सेट के सामने बैठे बलाली के ग्रामीण चिंतित मुद्रा में नतर आए। विनेश के शुरुआत में ही दोपहरी पट दांव लगाकर प्रतिद्वंदी पहलवान को कंधे पर उठाते ही बुजुर्ग ग्रामीण झूम उठे और लाडली के सम्मान में तालियां बजाकर खुशी का इजहार किया। मैच विनेश के पक्ष में रहने के बाद ग्रामीण इक्ट्ठे होकर विनेश फौगाट के घर पहुंचे और परिजनों का मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया।
विज्ञापन
गोल्ड मेडल जीतते ही गांव की महिलाएं विनेश की मां प्रेमलता को बधाई देने पहुंची और बेटी के पदक जीतने की खुशी में प्रेमलता खुद को नाचने से नहीं रोक पाई। देखते ही देखते विनेश के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। विनेश के भाई हरविंद्र फौगाट ने बताया कि पहले दो मैच का प्रसारण तो वो नहीं देख पाए लेकिन कनाडाई पहलवान के खिलाफ विनेश ने दोहरी पट दांव का दो बार इस्तेमाल कर चार-चार अंक बटोरे और इसका फायदा विनेश को मिला। रेफरी ने टेक्निकल सुपीयरिटी के आधार पर विनेश को बाउट पूरी होने से पहले ही विजेता घोषित कर दिया।
विज्ञापन
महावीर फौगाट बोले: गोल्ड जीतकर विनेश ने दी दोहरी खुशी
गीता व बबीता फौगाट के पिता व कोच तथा विनेश के ताऊ द्रोणाचार्य अवार्डी पहलवान महावीर फौगाट ने बताया कि बबीता ने रजत पदक जीता था लेकिन उन्हें विनेश से गोल्ड मेडल की उम्मीद थी। उनकी दूसरी बेटी विनेश उम्मीदों पर खरी उतरी। उसने गोल्ड मेडल जीतकर उन्हें दोहरी खुशी दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि दोनों बेटियां कॉमनवेल्थ गेम्स से गोल्ड और सिल्वर मेडल लेकर लौटीं हैं।
डेढ़ साल से नहीं आई घर, बेटी को देखने को हूं बैचेन: प्रेमलता
अमर उजाला से बातचीत में विनेश फौगाट की मां प्रेमलता ने बताया कि ओलंपिक के दौरान घुटने में चोट लगने पर ही विनेश कुछ दिन के लिए घर आई थी। अब पिछले डेढ़ साल से वह घर नहीं आई और बैंगलूरू कैंप में ही अभ्यास कर रही थी। उन्होेंने कहा कि अब उन्हें बेटी के घर आने का इंतजार है।
देशवासियों की उम्मीदों पर खरी उतरी बहन: हरविंद्र
विनेश के भाई हरविंद्र फौगाट ने बताया कि विनेश से ओलंपिक गेम में भी देशवासियों को गोल्ड मेडल की उम्मीदें थी लेकिन दुर्भाग्यवश चोट लगने से बाउट के दौरान ही उसे बाहर होना पड़ा। हरविंद्र ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम में भी विनेश से देशवासियों को बेहतरीन प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद थी और उसे खुशी है कि उसकी बहन देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरी।