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नीली क्रांति : बिना पानी व जमीन के पलेगी आस्ट्रेलियन मछली
Updated Mon, 26 Mar 2018 02:59 AM IST
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नीली क्रांति : अब टैंक में पैदा होंगी 50 गुना ज्यादा मछलियां
: इजराइल की तकनीक से नीलोखेड़ी के किसान ने लगाया प्रदेश का पहला प्लांट
: 3 हजार वर्ग गज में लग सकते हैं 50 लाख में आठ टैंक
: मत्स्य विभाग ने की प्रदेश सरकार को 50 प्रतिशत सब्सिडी की सिफारिश
: एग्री लीडरशिप सम्मिट में माडल बना किसानों की जिज्ञासा का केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
नीलोखेड़ी के किसान ने इजराइल की तकनीकी से आरएएस यानि रिक्यूलेटरी एक्यूटर सिस्टम ऐसा प्लांट लगाया है, जिसमें तालाब की तुलना में 50 गुणा तक मछली पैदा हो सकती है। इस प्लांट का माडल रोहतक में लगे तीसरे एग्री लीडरशिप सम्मिट में किसानों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।
मत्स्य विभाग के अधिकारी रमेश कुमार दांगी ने बताया कि किसान सुल्तान अपने खर्च पर विदेश गया था, जहां कम जमीन व पानी से ज्यादा मछली पैदा करने तकनीक सीख कर आया है। उसने नीलोखेड़ी में 3 हजार वर्ग गज में प्लांट लगाया है। प्लांट के अंदर एक टैंक बनाया गया है, जहां 60 क्यूबिक पानी में 5 फीट ऊंचाई तक पानी के लेवल में 3 हजार किलोग्राम वजन की मछली पैदा की जा सकती हैं। जो सामान्य तालाब से 50 गुणा अधिक हैं। इसमें रोहू, कतला, मिरकल के अलावा विदेशी मछली पाली जा सकती है। बाजार में विदेशी मछली की कीमत 400 रुपये किलो तक है। इस तरह एक टैंक से छह माह में सवा लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। इस तरह एक-एक फैक्टरियल व बेक्टरियल यूनिट से आठ टैंक जोड़े जा सकते हैं।
यूं काम करेगा सिस्टम
वाटर टैंक में एक बार पानी भरा जाएगा, जहां से पानी के साथ मछलियों का मल फैक्टरियल यूनिट में आएगा। वहां पर पानी जहां बेक्टरियल यूनिट में चला जाएगा, जबकि मल दूसरे रास्ते से बाहर आ जाएगा। बेक्टरियल यूनिट में पानी के अंदर आमोनिया को नाइट्रेट में बदल दिया जाएगा। वहां से पानी आक्सीजन यूनिट में चला जाएगा। वहां उसके अंदर आक्सीजन घोली जाएगी। इसके बाद वहीं पानी दोबारा से टैंक में चला जाएगा। इस तरह बार-बार पानी की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ में मछलियों के मल व बचे भोजन से जैविक खाद भी बनेगी, जो खेती में काम आएगी।
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सरकार से की 50 प्रतिशत सब्सिडी की सिफारिश
मत्स्य अधिकारी आरके दांगी ने बताया कि मत्स्य उत्पादन के लिए यह तकनीकी बेहद कारगर है। क्योंकि किसानों के लिए अक्सर मछली पालने के लिए पानी व जमीन की किल्लत रहती है। आठ टैंक का प्लांट 50 लाख में लग जाता है। सरकार से किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी देने की सिफारिश की गई है। हालांकि अभी सरकार से मंजूरी नहीं मिली है।
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नीली क्रांति : अब टैंक में पैदा होंगी 50 गुना ज्यादा मछलियां
: इजराइल की तकनीक से नीलोखेड़ी के किसान ने लगाया प्रदेश का पहला प्लांट
: 3 हजार वर्ग गज में लग सकते हैं 50 लाख में आठ टैंक
: मत्स्य विभाग ने की प्रदेश सरकार को 50 प्रतिशत सब्सिडी की सिफारिश
: एग्री लीडरशिप सम्मिट में माडल बना किसानों की जिज्ञासा का केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
नीलोखेड़ी के किसान ने इजराइल की तकनीकी से आरएएस यानि रिक्यूलेटरी एक्यूटर सिस्टम ऐसा प्लांट लगाया है, जिसमें तालाब की तुलना में 50 गुणा तक मछली पैदा हो सकती है। इस प्लांट का माडल रोहतक में लगे तीसरे एग्री लीडरशिप सम्मिट में किसानों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।
मत्स्य विभाग के अधिकारी रमेश कुमार दांगी ने बताया कि किसान सुल्तान अपने खर्च पर विदेश गया था, जहां कम जमीन व पानी से ज्यादा मछली पैदा करने तकनीक सीख कर आया है। उसने नीलोखेड़ी में 3 हजार वर्ग गज में प्लांट लगाया है। प्लांट के अंदर एक टैंक बनाया गया है, जहां 60 क्यूबिक पानी में 5 फीट ऊंचाई तक पानी के लेवल में 3 हजार किलोग्राम वजन की मछली पैदा की जा सकती हैं। जो सामान्य तालाब से 50 गुणा अधिक हैं। इसमें रोहू, कतला, मिरकल के अलावा विदेशी मछली पाली जा सकती है। बाजार में विदेशी मछली की कीमत 400 रुपये किलो तक है। इस तरह एक टैंक से छह माह में सवा लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। इस तरह एक-एक फैक्टरियल व बेक्टरियल यूनिट से आठ टैंक जोड़े जा सकते हैं।
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यूं काम करेगा सिस्टम
वाटर टैंक में एक बार पानी भरा जाएगा, जहां से पानी के साथ मछलियों का मल फैक्टरियल यूनिट में आएगा। वहां पर पानी जहां बेक्टरियल यूनिट में चला जाएगा, जबकि मल दूसरे रास्ते से बाहर आ जाएगा। बेक्टरियल यूनिट में पानी के अंदर आमोनिया को नाइट्रेट में बदल दिया जाएगा। वहां से पानी आक्सीजन यूनिट में चला जाएगा। वहां उसके अंदर आक्सीजन घोली जाएगी। इसके बाद वहीं पानी दोबारा से टैंक में चला जाएगा। इस तरह बार-बार पानी की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ में मछलियों के मल व बचे भोजन से जैविक खाद भी बनेगी, जो खेती में काम आएगी।
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सरकार से की 50 प्रतिशत सब्सिडी की सिफारिश
मत्स्य अधिकारी आरके दांगी ने बताया कि मत्स्य उत्पादन के लिए यह तकनीकी बेहद कारगर है। क्योंकि किसानों के लिए अक्सर मछली पालने के लिए पानी व जमीन की किल्लत रहती है। आठ टैंक का प्लांट 50 लाख में लग जाता है। सरकार से किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी देने की सिफारिश की गई है। हालांकि अभी सरकार से मंजूरी नहीं मिली है।