{"_id":"5a81ff154f1c1bcb268b99b7","slug":"201518468885-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्राह्मणवास व सांघी में गठित होंगे स्वयं सहायता समूह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्राह्मणवास व सांघी में गठित होंगे स्वयं सहायता समूह
Updated Tue, 13 Feb 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में 725 स्वयं सहायता समूह कर रहे कार्य : एडीसी
रोहतक। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रोहतक खंड के गांव ब्राह्मणवास और सांघी में स्वयं सहायता समूहों का निर्माण किया जा रहा है। एडीसी एवं मिशन निदेशक अजय कुमार ने बताया की जिले में अब तक 725 स्वयं सहायता समूहों का निर्माण किया जा चुका है। इन समूहों को बनाने की विशेषता यह है की इनका निर्माण अन्य गांव के समूहों की महिलाओं द्वारा ही किया जाता है। कलानौर और लाखनमाजरा खंड के गांव के समूह की महिलाओं को आजीविका मिशन टीम द्वारा प्रशिक्षण देकर इन टीमों को तैयार किया गया है। इन महिलाओं की टीम को सीआरपी टीम कहा जाता है, जो संबधित गांव में घर-2 जाकर गरीब परिवारों की पहचान करती है। वहीं, आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डाक्टर विनोद धनखड़ ने बताया की पिछली योजना और आजीविका मिशन में मुख्य अंतर यह है की इसमें आवंटन-आधारित रणनीति की बजाय मांग-संचालित रणनीति अपनायी जाती है।
विज्ञापन
रोहतक। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रोहतक खंड के गांव ब्राह्मणवास और सांघी में स्वयं सहायता समूहों का निर्माण किया जा रहा है। एडीसी एवं मिशन निदेशक अजय कुमार ने बताया की जिले में अब तक 725 स्वयं सहायता समूहों का निर्माण किया जा चुका है। इन समूहों को बनाने की विशेषता यह है की इनका निर्माण अन्य गांव के समूहों की महिलाओं द्वारा ही किया जाता है। कलानौर और लाखनमाजरा खंड के गांव के समूह की महिलाओं को आजीविका मिशन टीम द्वारा प्रशिक्षण देकर इन टीमों को तैयार किया गया है। इन महिलाओं की टीम को सीआरपी टीम कहा जाता है, जो संबधित गांव में घर-2 जाकर गरीब परिवारों की पहचान करती है। वहीं, आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डाक्टर विनोद धनखड़ ने बताया की पिछली योजना और आजीविका मिशन में मुख्य अंतर यह है की इसमें आवंटन-आधारित रणनीति की बजाय मांग-संचालित रणनीति अपनायी जाती है।