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झूठी शिकायत पर किया था निलंबन, कोर्ट से मांगेंगे न्याय : फार्मासिस्ट
Updated Sun, 11 Feb 2018 02:36 AM IST
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झूठी शिकायत पर किया निलंबन, कोर्ट से मांगेंगे न्याय : फार्मासिस्ट
- मैने अपना काम किया था, जिसको जो करना है वह करें : पूर्व सीवीओ
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के फार्मासिस्ट प्रेम कुमार और पूर्व सीवीओ डॉ. आर.बी. सिंह के बीच चला बहुचर्चित विवाद स्टेट विजिलेंस के बाद अब न्यायालय तक पहुंचने की ओर अग्रसर है। प्रेम कुमार का कहना है कि उन्हें झूठी शिकायत पर निलंबित किया गया था। आरटीआई से उन्होंने सारा रिकॉर्ड ले लिया है, इसमें पूर्व जांच अधिकारी ने माना है कि उन्होंने बगैर सबूत के कार्रवाई की थी। इस पर डॉ. आरबी सिंह का कहना है कि उन्होंने अपना कार्य किया था, अब जिसको जो करना है वह कर सकता है।
फार्मासिस्ट प्रेम कुमार ने पूर्व चीफ विजिलेंस अधिकारी डॉ. आरबी सिंह पर सवाल उठाते हुए कहा कि संस्थान के बीयरर जगदीश से उनके खिलाफ फरवरी 2016 में शिकायत कराई गई कि उसने 3000 एंटीबायोटिक गोलियों के अलावा ठेके के कर्मचारियों के रिकार्ड में हेराफेरी की। इस पर जांच बैठाते हुए कुलपति ने डॉ. सिंह को जांच सौंप दी। यहां जांच अधिकारी ने बगैर सबूत और बगैर गवाह के जांच पूरी कर दी और 30 जून को उस पर 75 हजार रुपये की रिकवरी डालते हुए उनके निलंबन और ठेके पर कार्यरत प्रीति बंसल व रविंद्र फार्मासिस्ट तथा सविता, देवेंद्र डॉटा एंट्री आपरेटर को नौकरी से बर्खास्त करवा दिया।
हैरानी की बात थी कि शिकायतकर्ता कर्मचारी ने साजिश के तहत उसकी शिकायत की थी। उसने आरटीआई के तहत जानकारी जुटाई तो पता चला कि उक्त कर्मचारी संस्थान में स्वयं को उपस्थित दिखाता है और वह कार्य अवधि में ही सुनारिया जेल में भी मिलाई के लिए जाता है। इस मामले में जांच अधिकारी ने न तो चीफ फार्मासिस्ट परमानंद, न ठेकेदार को और न ही उसे बुलाया पूछताछ के लिए बुलाया। अधिकारी ने किसी भी रिकार्ड को जांचने की जहमत तक नहीं उठाई। यह मामले की जांच करने जब स्टेट विजिलेंस की टीम आई तो जांच अधिकारी कोई ठोस प्रमाण नहीं दे पाए। टीम संस्थान से सारा रिकार्ड और बयान कलमबद्ध करके ले गई। स्टेट विजिलेंस ने जांच के बाद कई बार जांच अधिकारी को बुलाया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। इस पर टीम ने अधिकारी को नोटिस तक दिया। जब टीम ने डॉ. सिंह से बातचीत की तो उन्होंने माना की उन्होंने बगैर किसी ठोस सबूत के उनको आरोपी बना दिया था। इस पर 31 अक्तूबर को उनकी बहाली के निर्देश हो गए थे। प्रेम ने बताया कि उसने स्टेट विजिलेंस से पूरी जांच प्रक्रिया की फाइल आरटीआई के तहत मांगी। इसमें जवाब आया कि मामले में फार्मासिस्ट का कोई दोष नहीं मिला है और जांच अधिकारी ने स्वयं माना है कि उन्होंने सारी जांच अपने कार्यालय में बैठकर की है। पीड़ित ने बताया कि अब वह इस मामले में पूर्व जांच अधिकारी, शिकायतकर्ता बीयरर और चीफ फार्मासिस्ट के खिलाफ साजिश रचने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के अलावा मानहानि का मुकदमा करेगा।
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अकसर चर्चाओं में रहे हैं डॉ. आरबी सिंह
विवाद और डॉ. आरबी सिंह दोनों पीजीआईएमएस में हमेशा समान रूप से चले हैं। डॉ. सिंह ने बतौर सीवीओ कई जांचें कीं, इन पर सवाल भी उठते रहे। कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों में इस बात की चर्चा बनी रही कि संस्थान में झूठी शिकायतें और बगैर सबूत कार्रवाई करने का सिलसिला लंबे समय तक जारी रहा। यही कारण रहा कि डॉ. सिंह की संस्थान में सेवानिवृत्ति के बाद पुन: नियुक्ति नहीं होने दी गई। जबकि संस्थान ने इसके लिए सरकार से अनुमति मांगी थी और इसके लिए सरकार भी तैयार थी। लेकिन विवाद से बचने के लिए संस्थान स्वयं डॉ. सिंह की पुन: नियुक्ति करने से पीछे हट गया था।
बोले अधिकारी
शिकायत के आधार पर जो जांच फाइल मुझे मिली थी, उस पर कार्रवाई की गई थी। सारे तथ्य संस्थान को दे दिए गए हैं। इस पर यदि किसी को कोई कार्रवाई करनी है तो वह स्वतंत्र है।
- डॉ. आर.बी. सिंह, पूर्व सीवीओ, पीजीआईएमएस
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- मैने अपना काम किया था, जिसको जो करना है वह करें : पूर्व सीवीओ
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के फार्मासिस्ट प्रेम कुमार और पूर्व सीवीओ डॉ. आर.बी. सिंह के बीच चला बहुचर्चित विवाद स्टेट विजिलेंस के बाद अब न्यायालय तक पहुंचने की ओर अग्रसर है। प्रेम कुमार का कहना है कि उन्हें झूठी शिकायत पर निलंबित किया गया था। आरटीआई से उन्होंने सारा रिकॉर्ड ले लिया है, इसमें पूर्व जांच अधिकारी ने माना है कि उन्होंने बगैर सबूत के कार्रवाई की थी। इस पर डॉ. आरबी सिंह का कहना है कि उन्होंने अपना कार्य किया था, अब जिसको जो करना है वह कर सकता है।
फार्मासिस्ट प्रेम कुमार ने पूर्व चीफ विजिलेंस अधिकारी डॉ. आरबी सिंह पर सवाल उठाते हुए कहा कि संस्थान के बीयरर जगदीश से उनके खिलाफ फरवरी 2016 में शिकायत कराई गई कि उसने 3000 एंटीबायोटिक गोलियों के अलावा ठेके के कर्मचारियों के रिकार्ड में हेराफेरी की। इस पर जांच बैठाते हुए कुलपति ने डॉ. सिंह को जांच सौंप दी। यहां जांच अधिकारी ने बगैर सबूत और बगैर गवाह के जांच पूरी कर दी और 30 जून को उस पर 75 हजार रुपये की रिकवरी डालते हुए उनके निलंबन और ठेके पर कार्यरत प्रीति बंसल व रविंद्र फार्मासिस्ट तथा सविता, देवेंद्र डॉटा एंट्री आपरेटर को नौकरी से बर्खास्त करवा दिया।
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हैरानी की बात थी कि शिकायतकर्ता कर्मचारी ने साजिश के तहत उसकी शिकायत की थी। उसने आरटीआई के तहत जानकारी जुटाई तो पता चला कि उक्त कर्मचारी संस्थान में स्वयं को उपस्थित दिखाता है और वह कार्य अवधि में ही सुनारिया जेल में भी मिलाई के लिए जाता है। इस मामले में जांच अधिकारी ने न तो चीफ फार्मासिस्ट परमानंद, न ठेकेदार को और न ही उसे बुलाया पूछताछ के लिए बुलाया। अधिकारी ने किसी भी रिकार्ड को जांचने की जहमत तक नहीं उठाई। यह मामले की जांच करने जब स्टेट विजिलेंस की टीम आई तो जांच अधिकारी कोई ठोस प्रमाण नहीं दे पाए। टीम संस्थान से सारा रिकार्ड और बयान कलमबद्ध करके ले गई। स्टेट विजिलेंस ने जांच के बाद कई बार जांच अधिकारी को बुलाया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। इस पर टीम ने अधिकारी को नोटिस तक दिया। जब टीम ने डॉ. सिंह से बातचीत की तो उन्होंने माना की उन्होंने बगैर किसी ठोस सबूत के उनको आरोपी बना दिया था। इस पर 31 अक्तूबर को उनकी बहाली के निर्देश हो गए थे। प्रेम ने बताया कि उसने स्टेट विजिलेंस से पूरी जांच प्रक्रिया की फाइल आरटीआई के तहत मांगी। इसमें जवाब आया कि मामले में फार्मासिस्ट का कोई दोष नहीं मिला है और जांच अधिकारी ने स्वयं माना है कि उन्होंने सारी जांच अपने कार्यालय में बैठकर की है। पीड़ित ने बताया कि अब वह इस मामले में पूर्व जांच अधिकारी, शिकायतकर्ता बीयरर और चीफ फार्मासिस्ट के खिलाफ साजिश रचने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के अलावा मानहानि का मुकदमा करेगा।
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अकसर चर्चाओं में रहे हैं डॉ. आरबी सिंह
विवाद और डॉ. आरबी सिंह दोनों पीजीआईएमएस में हमेशा समान रूप से चले हैं। डॉ. सिंह ने बतौर सीवीओ कई जांचें कीं, इन पर सवाल भी उठते रहे। कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों में इस बात की चर्चा बनी रही कि संस्थान में झूठी शिकायतें और बगैर सबूत कार्रवाई करने का सिलसिला लंबे समय तक जारी रहा। यही कारण रहा कि डॉ. सिंह की संस्थान में सेवानिवृत्ति के बाद पुन: नियुक्ति नहीं होने दी गई। जबकि संस्थान ने इसके लिए सरकार से अनुमति मांगी थी और इसके लिए सरकार भी तैयार थी। लेकिन विवाद से बचने के लिए संस्थान स्वयं डॉ. सिंह की पुन: नियुक्ति करने से पीछे हट गया था।
बोले अधिकारी
शिकायत के आधार पर जो जांच फाइल मुझे मिली थी, उस पर कार्रवाई की गई थी। सारे तथ्य संस्थान को दे दिए गए हैं। इस पर यदि किसी को कोई कार्रवाई करनी है तो वह स्वतंत्र है।
- डॉ. आर.बी. सिंह, पूर्व सीवीओ, पीजीआईएमएस