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नीडल आई, एनएस के लिए भटक रहे मरीज
Updated Tue, 21 Nov 2017 03:06 AM IST
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निडिल आई, एनएस के लिए भटक रहे मरीज
- हजारों रुपये में हो रहा है बुखार का उपचार
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में दवाओं का टोटा इतना है कि यहां बुखार के उपचार में भी मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि संस्थान का दावा है कि उनके यहां मुख्यमंत्री उपचार योजना के तहत नि:शुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जाती है। आपातकालीन विभाग में लगातार दूसरे दिन भी मरीजों को एनएस के लिए भटकना पड़ा। सोमवार को आपात विभाग में सिर्फ निडिल ही उपलब्ध रही।
रविवार देर रात से ही संस्थान के आपातकालीन विभाग में नार्मल स्लाइन एनएस और निडिल समाप्त हो गई थी। खींचतान के बाद प्रशासन ने निडिल तो मंगा ली हैं, लेकिन अभी भी एनएस के लिए मरीजों के परिजनों को भटकना पड़ रहा है। वहीं मरीजों ने रोष जताया है कि सरकारी संस्थान में निजी अस्पताल की तरह उपचार कराना महंगा हो गया है।
मुडलाना निवासी राममेहर ने बताया कि उन्हें बुखार की शिकायत है। तीन दिन में 5000 रुपये खर्च हो गए हैं, बुखार से राहत नहीं मिली है। मदीना की सामोदेवी ने बताया कि उन्हें पेट दर्द और बुखार है, उनके उपचार में 5000 खर्च हो गए हैं। वह दो दिन गोहाना में भी इस बीमारी के लिए घूमती रही, वह जिला अस्पताल में भर्ती थी। कहीं पर भी उपचार नहीं मिल रहा है। महम निवासी महेंद्र ने बताया कि उन्हें बुखार के साथ लीवर में समस्या है।
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वह 22 दिन से संस्थान में है, उसके रोजाना 500 से 1000 रुपये खर्च हो रहे हैं। कंसाला निवासी राजेश ने बताया कि उसे पथरी की समस्या है और वह 11 दिन से संस्थान में है। उसके अभी तक नौ हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। जसिया निवासी कविता ने बताया कि वह बाइक से गिरी थी। उसके सिर व कमर में चोट आई उस पर चार दिनों में 6000 रुपये खर्च हो चुके हैं। खेड़ी निवासी सुमित ने बताया कि उसे पीलिया और बुखार है। एक दिन में उसको 1500 रुपये की दवा मंगा ली है। कथूरा निवासी रोहताश ने बताया कि उसे बुखार है और दो दिन से पेट में दर्द है। उसने अभी तक उपचार में 3000 रुपये खर्च कर दिए हैं। गोहाना निवासी अमित ने बताया कि वह छत से गिरा और उपचार के चलते उसे पांच दिन हो गए हैं। अब तक उसका 15 हजार रुपया खर्च हो गया है। मदनपुर अकेडी झज्जर की सुनीता ने बताया कि उसे पेट दर्द है और चार दिन में उसके उपचार में 7000 रुपये खर्च हो गए हैं। सभी मरीजों ने बताया कि संस्थान लगभग सभी दवाएं बाहर से मंगा रहा है। सबसे हैरानी की बात है कि संस्थान में एनएस तक उपलब्ध नहीं है।
खाते में रुपये हैं तो लेते क्यों नहीं
पीजीआईएमएस की खामियों पर सहकारिता मंत्री ने उठाए सवाल
रोहतक।
संस्थान के सूत्रों की मानें तो सोमवार को पीजीआईएमएस के वार्ड एक में सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर पहुंचे। वह अपने दो करीबी लोगों का हाल चाल जानने पहुंचे थे। यहां जब कुछ खामियों पर सवाल उठे तो मंत्री ने कहा कि क्या संस्थान के खाते में रुपये नहीं है। इस पर प्रशासन ने कहा कि रुपये तो हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि फिर वह अपनी जरूरत की चीजों को खरीदते क्यों नहीं हैं। गौरतलब है कि मंत्री के समक्ष बल्ब, पेंट, गीजर आदि कई प्रकार की समस्याएं सामने आई। हालांकि मंत्री ने कहा कि यदि उनके पास रुपये नहीं हैं तो वह दे देते हैं।
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- हजारों रुपये में हो रहा है बुखार का उपचार
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में दवाओं का टोटा इतना है कि यहां बुखार के उपचार में भी मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि संस्थान का दावा है कि उनके यहां मुख्यमंत्री उपचार योजना के तहत नि:शुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जाती है। आपातकालीन विभाग में लगातार दूसरे दिन भी मरीजों को एनएस के लिए भटकना पड़ा। सोमवार को आपात विभाग में सिर्फ निडिल ही उपलब्ध रही।
रविवार देर रात से ही संस्थान के आपातकालीन विभाग में नार्मल स्लाइन एनएस और निडिल समाप्त हो गई थी। खींचतान के बाद प्रशासन ने निडिल तो मंगा ली हैं, लेकिन अभी भी एनएस के लिए मरीजों के परिजनों को भटकना पड़ रहा है। वहीं मरीजों ने रोष जताया है कि सरकारी संस्थान में निजी अस्पताल की तरह उपचार कराना महंगा हो गया है।
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मुडलाना निवासी राममेहर ने बताया कि उन्हें बुखार की शिकायत है। तीन दिन में 5000 रुपये खर्च हो गए हैं, बुखार से राहत नहीं मिली है। मदीना की सामोदेवी ने बताया कि उन्हें पेट दर्द और बुखार है, उनके उपचार में 5000 खर्च हो गए हैं। वह दो दिन गोहाना में भी इस बीमारी के लिए घूमती रही, वह जिला अस्पताल में भर्ती थी। कहीं पर भी उपचार नहीं मिल रहा है। महम निवासी महेंद्र ने बताया कि उन्हें बुखार के साथ लीवर में समस्या है।
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वह 22 दिन से संस्थान में है, उसके रोजाना 500 से 1000 रुपये खर्च हो रहे हैं। कंसाला निवासी राजेश ने बताया कि उसे पथरी की समस्या है और वह 11 दिन से संस्थान में है। उसके अभी तक नौ हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। जसिया निवासी कविता ने बताया कि वह बाइक से गिरी थी। उसके सिर व कमर में चोट आई उस पर चार दिनों में 6000 रुपये खर्च हो चुके हैं। खेड़ी निवासी सुमित ने बताया कि उसे पीलिया और बुखार है। एक दिन में उसको 1500 रुपये की दवा मंगा ली है। कथूरा निवासी रोहताश ने बताया कि उसे बुखार है और दो दिन से पेट में दर्द है। उसने अभी तक उपचार में 3000 रुपये खर्च कर दिए हैं। गोहाना निवासी अमित ने बताया कि वह छत से गिरा और उपचार के चलते उसे पांच दिन हो गए हैं। अब तक उसका 15 हजार रुपया खर्च हो गया है। मदनपुर अकेडी झज्जर की सुनीता ने बताया कि उसे पेट दर्द है और चार दिन में उसके उपचार में 7000 रुपये खर्च हो गए हैं। सभी मरीजों ने बताया कि संस्थान लगभग सभी दवाएं बाहर से मंगा रहा है। सबसे हैरानी की बात है कि संस्थान में एनएस तक उपलब्ध नहीं है।
खाते में रुपये हैं तो लेते क्यों नहीं
पीजीआईएमएस की खामियों पर सहकारिता मंत्री ने उठाए सवाल
रोहतक।
संस्थान के सूत्रों की मानें तो सोमवार को पीजीआईएमएस के वार्ड एक में सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर पहुंचे। वह अपने दो करीबी लोगों का हाल चाल जानने पहुंचे थे। यहां जब कुछ खामियों पर सवाल उठे तो मंत्री ने कहा कि क्या संस्थान के खाते में रुपये नहीं है। इस पर प्रशासन ने कहा कि रुपये तो हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि फिर वह अपनी जरूरत की चीजों को खरीदते क्यों नहीं हैं। गौरतलब है कि मंत्री के समक्ष बल्ब, पेंट, गीजर आदि कई प्रकार की समस्याएं सामने आई। हालांकि मंत्री ने कहा कि यदि उनके पास रुपये नहीं हैं तो वह दे देते हैं।