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तीन करोड़ के सीवरेज-पेयजल एस्टिमेट पर ऑब्जेक्शन
Updated Mon, 17 Jul 2017 12:03 AM IST
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तीन करोड़ के सीवरेज-पेयजल एस्टिमेट पर ऑब्जेक्शन
चरखी दादरी।
हेड ऑफिस ने ओवरलेपिंग के शक में तीन करोड़ के एस्टिमेट पर ऑब्जेक्शन लगा दिया है। इससे शहर के 75 हजार लोगों की सीवरेज-पेयजल समस्याओं से छुटकारा पाने की उम्मीद धूमिल हो गई है। शहर के पार्षदों की मांग पर वार्डों की सर्वे के बाद विकास का खाका तैयार किया गया था। पार्षदों के तीखे तेवर देख विभाग ने तीन दिन में ही पूरे शहर की सर्वे का काम पूरा कर दिया था। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने करीब पांच माह पहले एस्टिमेट तैयार कर भेजा था। इसके बाद इस मसले पर नगर परिषद कार्यकारिणी और जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच गत तीन अप्रैल को जमकर तू-तड़ाक भी हुई थी। दोनों पक्षों ने थाने में भी शिकायत दर्ज कराई थी। अमर उजाला ने चार अप्रैल के संस्करण में नगर परिषद चेयरमैन व पार्षदों की एक्सईएन से झड़प नामक शीर्षक से यह खबर प्रकाशित की थी। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी फिलहाल ऑब्जेक्शन वाले बिंदुओं को दुरुस्त कर दोबारा से एस्टिमेट भेजने का तर्क दे रहे हैं। ऐसे में अभी शहरवासियों को पेयजल व सीवरेज संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
शहर में विकास कार्य शुरू न होने पर पार्षद एकत्र होकर जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिले थे और वार्डों की जनसमस्याओं को जानकारी दी थी। इस दौरान कुछ पार्षदों और विभाग के अधिकारियों के बीच आपसी नोकझोंक होने से मामला पुुलिस तक पहुंच गया था। अमर उजाला ने तीन अप्रैल के अंक में वार्डों की समस्याओं से संबंधित खबर ‘खाली बर्तन लेकर महिलाओं ने किया प्रदर्शन’ प्रकाशित की थी। पार्षदों का तर्क था कि शहर में विकास कार्य शुरू न होने से और उचित पेयजल सप्लाई न होने से वार्डों के लोगों में रोष बना हुआ है। पार्षदों के इस विरोध को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने दो दिन बाद ही शहर के सभी वार्डों में विकास कार्यों से संबंधित सर्वे का काम शुरू किया था। सर्वे के तहत हर वार्ड में 10 से 12 विकास कार्यों को चिह्नित कर उनकी सूची तैयार की गई थी। सर्वे के दौरान पार्षदों की भी मदद ली गई थी। सर्वे के बाद विभाग के अधिकारियों ने तीन करोड़ का एस्टिमेट तैयारकर हेड ऑफिस भेज दिया गया था। इससे पहले अमर उजाला ने 22 फरवरी 2017 के संस्करण में भी शहर की समस्याओं से संबंधित ‘सीवर, पेयजल लाइनें बिछेंगी, सर्व शुरू’ नामक शीर्षक से खबर भी प्रकाशित की थी।
हेड ऑफिस ने ओवरलेपिंग के शक पर लगाए ऑब्जेक्शन
अब इस प्रोजेक्ट पर हैड ऑफिस से ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं। ऑब्जेक्शन में कहा गया है यह प्रोजेक्ट ओवरलेपिंग तो नहीं है। यदि ऐसा है तो फिर से जांच कर खाका तैयार किया जाए। इसी प्रकार इस प्रोजेक्ट की पिछले शहर के सभी प्रोजेक्ट से टाइ-अप करने की बात भी कही गई है ताकि कोई प्रोजेक्ट दोबारा न भेज दिया गया हो। इनके अलावा कुछ क्लेरिकल ऑब्जेक्शन भी लगे हैं। विभाग ने अब इन सभी ऑब्जेक्शन को रिमूव कर दिया गया है। रिमूव के बाद फाइल फिर से हैड ऑफिस भेज दी गई है ताकि इसे जल्द ही मंजूरी मिल सके।
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ये काम होने हैं इन वार्डों में
इस प्रोजेक्ट के तहत सभी 21 वार्डो में विकास कार्य होने हैं। सभी एप्रूवड एरिया में पेयजल लाइन बिछाने के अलावा सीवरेज लाइन को प्रमुखता दी जानी है।इस समय शहर की नई एप्रूवड कालोनियों में भी सीवरेज लाइन नहीं डाली गई है। अब बारिश के मौसम में लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई जगह सीवरेज व पेयजल लाइन न डलने पर गलियां भी पक्की नहीं बन पा रही है। विभाग के नियम हैं जब तक सीवरेज व पेयजल लाइन नहीं बिछ जाती वहां सड़क नहीं बनाई जा सकती।
सीवरेज-पेयजल समस्याओं का समाधान न होने से खफा है शहरवासी
---जनस्वास्थ्य विभाग को लोगों की समस्या से कोई सरोकार नहीं है। सीवरेज व पेयजल संबंधित समस्याओं से शहरवासी त्रस्त हैं और टकटी लगाए इन एस्टिमेट पर काम शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। एस्टिमेट पर ऑब्जेक्शन लगने से उम्मीद ही धूमिल हो गई।
सुनील, वार्ड दो निवासी
--जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को एस्टिमेट अच्छे से तैयार करने चाहिए थे। लोग इन समस्याओं से परेशान है और इनके समाधान की बेहद जरूरत है। विभाग को जल्द से जल्द ऑब्जेक्शन दूर कर फाइल दोबारा हेड ऑफिस भेजनी चाहिए।
गोबिंद, वार्ड आठ निवासी
--फाइल पर ऑब्जेक्शन लगने के बाद लोगों की सीवरेज-पेयजल संबंधी समस्याएं अभी बरकरार रहेंगी। एस्टिमेट तैयार होने से काफी समय बाद समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी थी लेकिन ऑब्जेक्शन ने सारा चोल बिगिाड़ दिया। मानसून में परेशानी ही झेलनी पड़ेगी।
मुन्नालाल, वार्ड सात निवासी
--न तो पेयजल सप्लाई वार्ड में सुचारु आ रही है और न ही स्वच्छ। सीवरेज व्यवस्था का हाल भी बुरा है। कई दफा अधिकारियों को इनसे अवगत करवा चुके हैं लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ है। एस्टिमेट में गड़बड़ी का खामियाजा तो अब शहरवासियों को ही भुगतना पड़ेगा।
अश्वनी, वार्ड 14 निवासी
==
वर्जन--
विभाग ने फाइल पर लगे ऑब्जेक्शन रिमूव कर दिए हैं। फाइल फिर से हैड ऑफिस भेज दी है। जैसे ही बजट राशि मंजूर होगी । शहर में सीवरेज व पेयजल लाइन बिछाए जाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
जितेंद्र हुड्डा, कार्यकारी अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग
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चरखी दादरी।
हेड ऑफिस ने ओवरलेपिंग के शक में तीन करोड़ के एस्टिमेट पर ऑब्जेक्शन लगा दिया है। इससे शहर के 75 हजार लोगों की सीवरेज-पेयजल समस्याओं से छुटकारा पाने की उम्मीद धूमिल हो गई है। शहर के पार्षदों की मांग पर वार्डों की सर्वे के बाद विकास का खाका तैयार किया गया था। पार्षदों के तीखे तेवर देख विभाग ने तीन दिन में ही पूरे शहर की सर्वे का काम पूरा कर दिया था। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने करीब पांच माह पहले एस्टिमेट तैयार कर भेजा था। इसके बाद इस मसले पर नगर परिषद कार्यकारिणी और जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच गत तीन अप्रैल को जमकर तू-तड़ाक भी हुई थी। दोनों पक्षों ने थाने में भी शिकायत दर्ज कराई थी। अमर उजाला ने चार अप्रैल के संस्करण में नगर परिषद चेयरमैन व पार्षदों की एक्सईएन से झड़प नामक शीर्षक से यह खबर प्रकाशित की थी। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी फिलहाल ऑब्जेक्शन वाले बिंदुओं को दुरुस्त कर दोबारा से एस्टिमेट भेजने का तर्क दे रहे हैं। ऐसे में अभी शहरवासियों को पेयजल व सीवरेज संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
शहर में विकास कार्य शुरू न होने पर पार्षद एकत्र होकर जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिले थे और वार्डों की जनसमस्याओं को जानकारी दी थी। इस दौरान कुछ पार्षदों और विभाग के अधिकारियों के बीच आपसी नोकझोंक होने से मामला पुुलिस तक पहुंच गया था। अमर उजाला ने तीन अप्रैल के अंक में वार्डों की समस्याओं से संबंधित खबर ‘खाली बर्तन लेकर महिलाओं ने किया प्रदर्शन’ प्रकाशित की थी। पार्षदों का तर्क था कि शहर में विकास कार्य शुरू न होने से और उचित पेयजल सप्लाई न होने से वार्डों के लोगों में रोष बना हुआ है। पार्षदों के इस विरोध को देखते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने दो दिन बाद ही शहर के सभी वार्डों में विकास कार्यों से संबंधित सर्वे का काम शुरू किया था। सर्वे के तहत हर वार्ड में 10 से 12 विकास कार्यों को चिह्नित कर उनकी सूची तैयार की गई थी। सर्वे के दौरान पार्षदों की भी मदद ली गई थी। सर्वे के बाद विभाग के अधिकारियों ने तीन करोड़ का एस्टिमेट तैयारकर हेड ऑफिस भेज दिया गया था। इससे पहले अमर उजाला ने 22 फरवरी 2017 के संस्करण में भी शहर की समस्याओं से संबंधित ‘सीवर, पेयजल लाइनें बिछेंगी, सर्व शुरू’ नामक शीर्षक से खबर भी प्रकाशित की थी।
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हेड ऑफिस ने ओवरलेपिंग के शक पर लगाए ऑब्जेक्शन
अब इस प्रोजेक्ट पर हैड ऑफिस से ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं। ऑब्जेक्शन में कहा गया है यह प्रोजेक्ट ओवरलेपिंग तो नहीं है। यदि ऐसा है तो फिर से जांच कर खाका तैयार किया जाए। इसी प्रकार इस प्रोजेक्ट की पिछले शहर के सभी प्रोजेक्ट से टाइ-अप करने की बात भी कही गई है ताकि कोई प्रोजेक्ट दोबारा न भेज दिया गया हो। इनके अलावा कुछ क्लेरिकल ऑब्जेक्शन भी लगे हैं। विभाग ने अब इन सभी ऑब्जेक्शन को रिमूव कर दिया गया है। रिमूव के बाद फाइल फिर से हैड ऑफिस भेज दी गई है ताकि इसे जल्द ही मंजूरी मिल सके।
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ये काम होने हैं इन वार्डों में
इस प्रोजेक्ट के तहत सभी 21 वार्डो में विकास कार्य होने हैं। सभी एप्रूवड एरिया में पेयजल लाइन बिछाने के अलावा सीवरेज लाइन को प्रमुखता दी जानी है।इस समय शहर की नई एप्रूवड कालोनियों में भी सीवरेज लाइन नहीं डाली गई है। अब बारिश के मौसम में लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई जगह सीवरेज व पेयजल लाइन न डलने पर गलियां भी पक्की नहीं बन पा रही है। विभाग के नियम हैं जब तक सीवरेज व पेयजल लाइन नहीं बिछ जाती वहां सड़क नहीं बनाई जा सकती।
सीवरेज-पेयजल समस्याओं का समाधान न होने से खफा है शहरवासी
---जनस्वास्थ्य विभाग को लोगों की समस्या से कोई सरोकार नहीं है। सीवरेज व पेयजल संबंधित समस्याओं से शहरवासी त्रस्त हैं और टकटी लगाए इन एस्टिमेट पर काम शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। एस्टिमेट पर ऑब्जेक्शन लगने से उम्मीद ही धूमिल हो गई।
सुनील, वार्ड दो निवासी
--जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को एस्टिमेट अच्छे से तैयार करने चाहिए थे। लोग इन समस्याओं से परेशान है और इनके समाधान की बेहद जरूरत है। विभाग को जल्द से जल्द ऑब्जेक्शन दूर कर फाइल दोबारा हेड ऑफिस भेजनी चाहिए।
गोबिंद, वार्ड आठ निवासी
--फाइल पर ऑब्जेक्शन लगने के बाद लोगों की सीवरेज-पेयजल संबंधी समस्याएं अभी बरकरार रहेंगी। एस्टिमेट तैयार होने से काफी समय बाद समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी थी लेकिन ऑब्जेक्शन ने सारा चोल बिगिाड़ दिया। मानसून में परेशानी ही झेलनी पड़ेगी।
मुन्नालाल, वार्ड सात निवासी
--न तो पेयजल सप्लाई वार्ड में सुचारु आ रही है और न ही स्वच्छ। सीवरेज व्यवस्था का हाल भी बुरा है। कई दफा अधिकारियों को इनसे अवगत करवा चुके हैं लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ है। एस्टिमेट में गड़बड़ी का खामियाजा तो अब शहरवासियों को ही भुगतना पड़ेगा।
अश्वनी, वार्ड 14 निवासी
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वर्जन--
विभाग ने फाइल पर लगे ऑब्जेक्शन रिमूव कर दिए हैं। फाइल फिर से हैड ऑफिस भेज दी है। जैसे ही बजट राशि मंजूर होगी । शहर में सीवरेज व पेयजल लाइन बिछाए जाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
जितेंद्र हुड्डा, कार्यकारी अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग