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घूंघट के बजाय उसके पीछे जीने वाली महिला का संघर्ष देखें
Updated Tue, 04 Jul 2017 02:47 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। लोगों को महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी। खेलकूद हो या अन्य कोई क्षेत्र, आज सभी में बेटियां आसमान छू रही हैं। बेटियों को परिवार और समाज का सहयोग मिले तो उनके लिए कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं होगी। वह हर क्षेत्र में झंडे गाड़ सकती हैं।
उन्होंने घूंघट को लेकर चल रहे विवाद पर कहा कि लोग अपना नजरिया बदलकर देखें तो घूंघट के पीछे प्रदेश की एक सशक्त महिला की तस्वीर मिलेगी। ऐसी महिला जो खुद काम कर परिवार को मजबूत कर रही है। यह बात सोमवार को बैंक कॉलोनी में अपने ननिहाल पहुंचीं मिस इंडिया मानुषी छिल्लर ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि कहा कि वर्तमान में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। सोचने वाली बात यह है कि यह अपराध किसी महिला के नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ हैं। समाज को एक साथ मिलकर इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी। घूंघट को लेकर घिरी प्रदेश सरकार को लेकर कहा कि लोग घूंघट क्यों देख रहे हैं? घूंघट के पीछे जीने वाली उस महिला का संघर्ष देखना चाहिए, जो सिर पर बोझ लिए खड़ी है।
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प्रदेश की महिला खुद काम कर परिवार को मजबूत बनाने में सक्षम है। ऐसे में उस पर विवाद खड़े नहीं करने चाहिए। लोगों को महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी। बेटियों को लेकर मानुषी ने कहा कि वह समय चला गया है कि जब बेटियों पर बंदिश लगाई जाती थी। अब बेटियों को स्वतंत्र रहने देना चाहिए। वह हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। मिस इंडिया बनने में आई चुनौतियों पर कहा कि जब परिवार और समाज साथ दें तो कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं होती। मिस इंडिया बनने की राह कठिन जरूर थी। सभी के सहयोग से यह मंजिल मिल गई।
रोहतक से यह है मानुषी का रिश्ता
मानुषी के पिता डॉ. मित्रबसु छिल्लर और माता डॉ. निर्मल ने पीजीआईएमएस से पढ़ाई पूरी की थी। फिलहाल डॉ. मित्रबसु दिल्ली में डीआरडीओ विभाग में मेडिकल ऑफिसर और माता सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं। दिल्ली में नौकरी के चलते पूरा परिवार वहीं पर रह रहा है। 19 वर्षीय मानुषी खानपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं।
बधाई देने वालों का लगा तांता, फूल-मालाओं से हुआ स्वागत
ननिहाल में मानुषी के आने का पता चलते ही घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। सभी ने फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया। मानुषी ने बताया कि अक्सर छुट्टियों में वह यहां पर आती हैं, लेकिन मिस इंडिया का खिताब मिलने के बाद पहली बार ननिहाल में पहुंचने का अलग ही अनुभव रहा है।
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रोहतक। लोगों को महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी। खेलकूद हो या अन्य कोई क्षेत्र, आज सभी में बेटियां आसमान छू रही हैं। बेटियों को परिवार और समाज का सहयोग मिले तो उनके लिए कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं होगी। वह हर क्षेत्र में झंडे गाड़ सकती हैं।
उन्होंने घूंघट को लेकर चल रहे विवाद पर कहा कि लोग अपना नजरिया बदलकर देखें तो घूंघट के पीछे प्रदेश की एक सशक्त महिला की तस्वीर मिलेगी। ऐसी महिला जो खुद काम कर परिवार को मजबूत कर रही है। यह बात सोमवार को बैंक कॉलोनी में अपने ननिहाल पहुंचीं मिस इंडिया मानुषी छिल्लर ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।
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उन्होंने कहा कि कहा कि वर्तमान में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। सोचने वाली बात यह है कि यह अपराध किसी महिला के नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ हैं। समाज को एक साथ मिलकर इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी। घूंघट को लेकर घिरी प्रदेश सरकार को लेकर कहा कि लोग घूंघट क्यों देख रहे हैं? घूंघट के पीछे जीने वाली उस महिला का संघर्ष देखना चाहिए, जो सिर पर बोझ लिए खड़ी है।
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प्रदेश की महिला खुद काम कर परिवार को मजबूत बनाने में सक्षम है। ऐसे में उस पर विवाद खड़े नहीं करने चाहिए। लोगों को महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी। बेटियों को लेकर मानुषी ने कहा कि वह समय चला गया है कि जब बेटियों पर बंदिश लगाई जाती थी। अब बेटियों को स्वतंत्र रहने देना चाहिए। वह हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। मिस इंडिया बनने में आई चुनौतियों पर कहा कि जब परिवार और समाज साथ दें तो कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं होती। मिस इंडिया बनने की राह कठिन जरूर थी। सभी के सहयोग से यह मंजिल मिल गई।
रोहतक से यह है मानुषी का रिश्ता
मानुषी के पिता डॉ. मित्रबसु छिल्लर और माता डॉ. निर्मल ने पीजीआईएमएस से पढ़ाई पूरी की थी। फिलहाल डॉ. मित्रबसु दिल्ली में डीआरडीओ विभाग में मेडिकल ऑफिसर और माता सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं। दिल्ली में नौकरी के चलते पूरा परिवार वहीं पर रह रहा है। 19 वर्षीय मानुषी खानपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं।
बधाई देने वालों का लगा तांता, फूल-मालाओं से हुआ स्वागत
ननिहाल में मानुषी के आने का पता चलते ही घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। सभी ने फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया। मानुषी ने बताया कि अक्सर छुट्टियों में वह यहां पर आती हैं, लेकिन मिस इंडिया का खिताब मिलने के बाद पहली बार ननिहाल में पहुंचने का अलग ही अनुभव रहा है।