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बेसहारा बच्चों को सहारा देने वाली बाल कल्याण समिति को खुद देखभाल की जरूरत

Tue, 21 Aug 2018 03:16 AM IST
Updated Tue, 21 Aug 2018 03:16 AM IST
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बेसहारा बच्चों को सहारा देने वाली बाल कल्याण समिति को खुद देखभाल की जरूरत
संशोधित : अमर उजाला खास खबर
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बच्चों को सहारा देने वाली बाल कल्याण समिति स्टाफ के अभाव में बेसहारा, 150 से ज्यादा फाइलें पेंडिंग

- बेसहारा बच्चों का न समय पर इलाज हो पा रहा है, न कानूनी या आर्थिक सहायता मिल पा रही
- स्टाफ की कमी के कारण समिति पर है काम का भार, समिति चेयरमैन को खुद करने पड़ रहे हैं छोटे-छोटे काम

विकास सैनी
रोहतक । बेसहारा बच्चों को न समय पर इलाज मिल रहा है न कानूनी या आर्थिक सहायता। किसी की पेंशन नहीं बन रही है तो किसी का फैसला रुका है। यह हम नहीं खुद बाल कल्याण समिति का रिकॉर्ड बोल रहा है। समिति के पास ऐसी करीब 150 से ज्यादा फाइलें पेंडिंग पड़ी हैं। इन फाइलों के आगे बढ़ने से बेसहारा बच्चों को राहत मिल सकती है। हालात ऐसे हैं कि ऐसे बच्चों की देखभाल करने वाली समिति को खुद अपनी देखभाल की जरूरत है। संसाधनों व सुविधाओं की कमी के चलते बेबस हुए समिति सदस्यों को छोटे-छोटे काम तक खुद निपटाने पड़ रहे हैं। इसमें पीड़ितों के बयान, जरूरी दस्तावेजों की फोटो कॉपी व डाक पहुंचना सरीखे काम शामिल हैं।

रोज 10 केस समिति के पास आ रहे
बाल कल्याण समिति के पास विशेष आवश्यकता व संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के रोजाना औसतन दस केस आ रहे हैं। इसमें कोई सड़क पर भीख मांगते पकड़ा जाता है तो कोई अपनों से बिछुड़ा होता है। इसके अलावा बच्चों को जन्म के बाद घर से बाहर फेंकने, गुमशुदगी, बाल श्रम व अन्य मामले भी हैं। इन सभी बच्चों को संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य व पुनर्वास की जरूरत होती है। यह जिम्मेदारी समिति को दी गई है। इसके लिए गठित समिति के पास सुविधाओं की कमी है।
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सात कर्मचारियों की है समिति को जरूरत
समिति को विभागीय गाइड लाइन, बरामद बच्चे से संबंधित निर्देश भेजने, उनके बयान दर्ज करने, मामले में कार्रवाई करने व काउंसिलिंग कराने सरीखे अनेक काम करने होते हैं। इसके लिए डाक्यूमेंट राइटर, क्लर्क, रिकॉर्ड कीपर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, मल्टी टास्क सर्विस, सेवादार व काउंसलर की जरूरत है। जबकि समिति के पास यह सुविधाएं नहीं हैं। यहां अनुबंध पर दिया गया एक मात्र सेवादार व कम्प्यूटर ऑपरेटर सितंबर महीने से नहीं है। अनुबंध समाप्त होने के बाद से इन्हें नहीं रखा गया है।
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पीने को साफ पानी न इनवर्टर भी नहीं
समिति कार्यालय विकास भवन में है। यहां काम करने वाले समिति सदस्यों के लिए न कूलर है न इनवर्टर की व्यवस्था। यहां तक की पीने के साफ पानी तक का इंतजाम नहीं है। वाटर कूलर बगैर आरओ के चलता है। वाटर कूलर के पास व शौचालय में गंदगी जमा है।


समिति नि:स्वार्थ भाव से नि:शुल्क काम कर रही है। बेसहारा बच्चों को संरक्षण देने का काम किया जा रहा है। मौजूदा संसाधनों के जरिए बेहतर व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पेंडिंग काम को भी जल्द निपटाया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग हमें फैसिलिटेट करता है।
- डॉ. राज सिंह सांगवान, चेयरमैन, सीडब्ल्यूसी
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