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राज्यपाल ने सातों निगमों के आयुक्त को नियुक्त किया प्रशासक
Updated Fri, 22 Jun 2018 03:04 AM IST
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राज्यपाल ने सातों निगमों के आयुक्त को नियुक्त किया प्रशासक
- रोहतक में एक जुलाई को लागू होगी नई व्यवस्था, 30 जून को खत्म हो रहा है मेयर व पार्षदों का कार्यकाल
- मुख्य सचिव ने जारी किया पत्र, निगम आयुक्त प्रदीप डागर ने छोड़ा कार्यभार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। प्रदेश के सातों निगमों रोहतक, हिसार, करनाल, पानीपत, यमुनानगर, पंचकूला व अंबाला के निगम आयुक्त जुलाई माह से प्रशासक के तौर पर कार्य करेंगे। रोहतक में व्यवस्था एक जुलाई से लागू होगी, जबकि अन्य निगमों में जहां हाउस की पहली मीटिंग से निर्वाचित पार्षदों को पांच साल पूरे हो जाएंगे। उसी दिन से व्यवस्था लागू हो जाएगी।
प्रदेश सरकार में मुख्य सचिव एवं शहरी निकाय विभाग के निदेशक आनंद मोहन शरण की ओर से 20 जून को अकाउंट विभाग चंडीगढ़, निदेशक शहरी निकाय विभाग, सातों जिलों के डीसी एवं निगम आयुक्त को पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया है कि हरियाणा म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 1994 के सेक्शन 400(2)(बी) के तहत राज्यपाल की ओर से सातों निगमों के आयुक्त को प्रशासक के तौर पर नियुक्त किया जाता। जिस निगम में पार्षदों की पहली मीटिंग को पांच साल पूरे हो जाएंगे, अगले दिन से आयुक्त प्रशासक के तौर पर काम करेंगे।
प्रदीप डागर ने छोड़ा कार्यभार, मेयर ने की मुलाकात
1999 के एचसीएस प्रदीप प्रदीप कुमार डागर ने गुरुवार को दोपहर बाद रोहतक निगम आयुक्त के तौर पर अपना कार्यभार छोड़ दिया। वे शुक्रवार सुबह पानीपत के आयुक्त के तौर पर कार्यभार संभालेंगे। एक साल दो माह के कार्यकाल के दौरान निगम के अनुभव को लेकर डागर ने कहा कि उनकी 19 साल की सर्विस में यह कार्यकाल सबसे अच्छा अनुभव रहा। राजनीतिक लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रोहतक शहर में कभी बड़ी कंट्रोवर्सी सामने नहीं आई। पिछले साल 500 में से रोहतक शहर का स्थान 295वां था, लेकिन अबकी बार चार हजार शहरों में से टॉप 100 में आने की पूरी संभावना है। इसे वे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। हालांकि शहर में पार्किंग की समस्या का समाधान उनके कार्यकाल में नहीं हो सका। इस पर डागर ने कहा कि तीन पार्किंग पीपीपी मोड में बनाने के लिए 28 मई को टेंडर जारी करना था, लेकिन केबिनेट से मंजूरी की शर्त आने से योजना में ज्यादा समय लग गया। इससे पहले ही उनका तबादला हो गया है। आखिरी दिन मेयर रेनू डाबला ने भी उनके कार्यकाल में पहुंच कर बातचीत की। इस मौके पर ज्वाइंट कमिश्नर रवींद्र कुमार, डीएमसी इंद्रजीत कुलाड़िया, डीटीपी कृष्ण कुमार वार्ष्णेय, एटीपी तिलकराज, कार्यकारी अभियंता मंजीत दहिया, तहसीलदार गुलाब सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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राज्यपाल ने सातों निगमों के आयुक्त को नियुक्त किया प्रशासक
- रोहतक में एक जुलाई को लागू होगी नई व्यवस्था, 30 जून को खत्म हो रहा है मेयर व पार्षदों का कार्यकाल
- मुख्य सचिव ने जारी किया पत्र, निगम आयुक्त प्रदीप डागर ने छोड़ा कार्यभार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। प्रदेश के सातों निगमों रोहतक, हिसार, करनाल, पानीपत, यमुनानगर, पंचकूला व अंबाला के निगम आयुक्त जुलाई माह से प्रशासक के तौर पर कार्य करेंगे। रोहतक में व्यवस्था एक जुलाई से लागू होगी, जबकि अन्य निगमों में जहां हाउस की पहली मीटिंग से निर्वाचित पार्षदों को पांच साल पूरे हो जाएंगे। उसी दिन से व्यवस्था लागू हो जाएगी।
प्रदेश सरकार में मुख्य सचिव एवं शहरी निकाय विभाग के निदेशक आनंद मोहन शरण की ओर से 20 जून को अकाउंट विभाग चंडीगढ़, निदेशक शहरी निकाय विभाग, सातों जिलों के डीसी एवं निगम आयुक्त को पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया है कि हरियाणा म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 1994 के सेक्शन 400(2)(बी) के तहत राज्यपाल की ओर से सातों निगमों के आयुक्त को प्रशासक के तौर पर नियुक्त किया जाता। जिस निगम में पार्षदों की पहली मीटिंग को पांच साल पूरे हो जाएंगे, अगले दिन से आयुक्त प्रशासक के तौर पर काम करेंगे।
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प्रदीप डागर ने छोड़ा कार्यभार, मेयर ने की मुलाकात
1999 के एचसीएस प्रदीप प्रदीप कुमार डागर ने गुरुवार को दोपहर बाद रोहतक निगम आयुक्त के तौर पर अपना कार्यभार छोड़ दिया। वे शुक्रवार सुबह पानीपत के आयुक्त के तौर पर कार्यभार संभालेंगे। एक साल दो माह के कार्यकाल के दौरान निगम के अनुभव को लेकर डागर ने कहा कि उनकी 19 साल की सर्विस में यह कार्यकाल सबसे अच्छा अनुभव रहा। राजनीतिक लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रोहतक शहर में कभी बड़ी कंट्रोवर्सी सामने नहीं आई। पिछले साल 500 में से रोहतक शहर का स्थान 295वां था, लेकिन अबकी बार चार हजार शहरों में से टॉप 100 में आने की पूरी संभावना है। इसे वे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। हालांकि शहर में पार्किंग की समस्या का समाधान उनके कार्यकाल में नहीं हो सका। इस पर डागर ने कहा कि तीन पार्किंग पीपीपी मोड में बनाने के लिए 28 मई को टेंडर जारी करना था, लेकिन केबिनेट से मंजूरी की शर्त आने से योजना में ज्यादा समय लग गया। इससे पहले ही उनका तबादला हो गया है। आखिरी दिन मेयर रेनू डाबला ने भी उनके कार्यकाल में पहुंच कर बातचीत की। इस मौके पर ज्वाइंट कमिश्नर रवींद्र कुमार, डीएमसी इंद्रजीत कुलाड़िया, डीटीपी कृष्ण कुमार वार्ष्णेय, एटीपी तिलकराज, कार्यकारी अभियंता मंजीत दहिया, तहसीलदार गुलाब सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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