{"_id":"595170834f1c1bb2338b48a0","slug":"181498509443-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेल के लिए कुछ भी करेगा, परिजनों ने उठाया नया टेनिस कोर्ट बनाने की बीड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेल के लिए कुछ भी करेगा, परिजनों ने उठाया नया टेनिस कोर्ट बनाने की बीड़ा
Updated Tue, 27 Jun 2017 02:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमित कौशिक
रोहतक।
माता-पिता अपने बच्चों के लिए क्या कुछ नहीं करते। उनकी हर जरूरत को पूरा करने के लिए वह हमेशा तत्पर रहते हैं। इसका जीता जागता उदाहरण हैं राजीव गांधी खेल कांप्लेक्स में लॉन टेनिस की प्रैक्टिस करने वाले बच्चों के परिजन। बच्चों को कोर्ट में खेलने का पूरा समय नहीं मिला तो उन्हाेंने मिलकर नया कोर्ट बनाने का फैसला ले लिया। 25 लाख रुपये कोई एक आदमी नहीं लगा सकता था तो 45 खिलाड़ियों के परिजनों ने मिलकर समूह बनाया। सामूहिक प्रयास से टेनिस कोर्ट का निर्माण शुरू भी हो गया है।
खेल विभाग की ओर से स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में लॉन टेनिस की प्रैक्टिस के लिए चार कोर्ट बनाए गए हैं। अब खिलाड़ियों की संख्या बढ़ने की वजह से ये कोर्ट कम पड़ रहे थे। ऐसे में बच्चों को प्रैक्टिस करने में परेशानी हो रही थी। खिलाड़ियों के परिजनों ने इसका समाधान कोर्ट के पास ही खाली पड़ी जमीन में नया कोर्ट बनाने की शुरुआत करके किया।
45 खिलाड़ियों के परिजनों ने चंदा इकट्ठा करके करीब पौने तीन लाख रुपये से मैदान को दुरुस्त करवाया है। पहले इस ऊबड़-खाबड़ जमीन को कल्टीवेटर से समतल कराया। उसके बाद प्लाट के चारों ओर जाल लगवाया गया। अब वे इसमें कोर्ट बनवाने जा रहे हैं। इसमें 25 से 30 लाख रुपये खर्च होंगे।
विज्ञापन
हमारा यहां पर कुल पांच कोर्ट बनाने का विचार है। इसके लिए 25 लाख से अधिक खर्चा आ जाएगा। हम बच्चों का भविष्य बनाने के लिए यह रकम लगाने को भी तैयार हैं।
- समीर अहलावत, निवासी कैलाश कॉलानी।
यह जगह विभाग ने क्ले कोर्ट बनाने के लिए ही खाली छोड़ी हुई थी। इस पर काम हो जाना चाहिए था। बच्चों को सुविधा देने के लिए मजबूरन अपने स्तर पर काम कराना पड़ रहा है।
- हितेश त्रेहन, निवासी जंग कॉलोनी।
खिलाड़ियों को कोर्ट में पर्याप्त समय नहीं मिल पर रहा था। जगह कम होने की वजह से बच्चों को सड़क पर प्रैक्टिस करनी पड़ती थी। इस वजह से कोर्ट बनाने के लिए सभी ने सहयोग किया है।
- रितु, निवासी वसंत विहार।
13 साल के बेटे आयुष को टेनिस का खिलाड़ी बनना है। कोर्ट में पर्याप्त समय नहीं मिलता था। उसे बेहतर सुविधा देने के लिए अपनी जेब से भी कुछ पैसे लग जाएं तो कोई गुरेज नहीं है।
- चंद्रिका, निवासी विकास नगर।
विज्ञापन
रोहतक।
माता-पिता अपने बच्चों के लिए क्या कुछ नहीं करते। उनकी हर जरूरत को पूरा करने के लिए वह हमेशा तत्पर रहते हैं। इसका जीता जागता उदाहरण हैं राजीव गांधी खेल कांप्लेक्स में लॉन टेनिस की प्रैक्टिस करने वाले बच्चों के परिजन। बच्चों को कोर्ट में खेलने का पूरा समय नहीं मिला तो उन्हाेंने मिलकर नया कोर्ट बनाने का फैसला ले लिया। 25 लाख रुपये कोई एक आदमी नहीं लगा सकता था तो 45 खिलाड़ियों के परिजनों ने मिलकर समूह बनाया। सामूहिक प्रयास से टेनिस कोर्ट का निर्माण शुरू भी हो गया है।
खेल विभाग की ओर से स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में लॉन टेनिस की प्रैक्टिस के लिए चार कोर्ट बनाए गए हैं। अब खिलाड़ियों की संख्या बढ़ने की वजह से ये कोर्ट कम पड़ रहे थे। ऐसे में बच्चों को प्रैक्टिस करने में परेशानी हो रही थी। खिलाड़ियों के परिजनों ने इसका समाधान कोर्ट के पास ही खाली पड़ी जमीन में नया कोर्ट बनाने की शुरुआत करके किया।
विज्ञापन
45 खिलाड़ियों के परिजनों ने चंदा इकट्ठा करके करीब पौने तीन लाख रुपये से मैदान को दुरुस्त करवाया है। पहले इस ऊबड़-खाबड़ जमीन को कल्टीवेटर से समतल कराया। उसके बाद प्लाट के चारों ओर जाल लगवाया गया। अब वे इसमें कोर्ट बनवाने जा रहे हैं। इसमें 25 से 30 लाख रुपये खर्च होंगे।
विज्ञापन
हमारा यहां पर कुल पांच कोर्ट बनाने का विचार है। इसके लिए 25 लाख से अधिक खर्चा आ जाएगा। हम बच्चों का भविष्य बनाने के लिए यह रकम लगाने को भी तैयार हैं।
- समीर अहलावत, निवासी कैलाश कॉलानी।
यह जगह विभाग ने क्ले कोर्ट बनाने के लिए ही खाली छोड़ी हुई थी। इस पर काम हो जाना चाहिए था। बच्चों को सुविधा देने के लिए मजबूरन अपने स्तर पर काम कराना पड़ रहा है।
- हितेश त्रेहन, निवासी जंग कॉलोनी।
खिलाड़ियों को कोर्ट में पर्याप्त समय नहीं मिल पर रहा था। जगह कम होने की वजह से बच्चों को सड़क पर प्रैक्टिस करनी पड़ती थी। इस वजह से कोर्ट बनाने के लिए सभी ने सहयोग किया है।
- रितु, निवासी वसंत विहार।
13 साल के बेटे आयुष को टेनिस का खिलाड़ी बनना है। कोर्ट में पर्याप्त समय नहीं मिलता था। उसे बेहतर सुविधा देने के लिए अपनी जेब से भी कुछ पैसे लग जाएं तो कोई गुरेज नहीं है।
- चंद्रिका, निवासी विकास नगर।