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सूचना आयोग
Updated Tue, 11 Sep 2018 03:08 AM IST
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पुलिस शिकायत प्राधिकरण में नियुक्तियां नहीं होने से सूचना आयोग खफा
- मुख्य सचिव से की 90 दिन में चेयरमैन व सदस्यों का नियुक्ति प्रोसेस शुरू करने की
सिफारिश
- सूचना आयुक्त ने हालात को सुशासन व जवाबदेही के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
हरियाणा पुलिस शिकायत प्राधिकरण में पिछले चार साल से नहीं हो रही चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियों को राज्य सूचना आयोग ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
राज्य सूचना आयुक्त हेमंत अत्री ने इस मामले में राज्य के मुखय सचिव को अविलंब ध्यान देने के लिए कहा है। प्राधिकरण के नाम पर इसमें केवल एक कार्यवाहक सिपाही की नियुक्ति को सुशासन के दावों व जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करने के प्रयासों पर गहरा दाग बताया है। यही नहीं मुखय सचिव को चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियां का प्रोसेस 90 दिन में शुरू करने की सिफारिश भी की है।
सूचना आयुक्त ने यह सिफारिश चंडीगढ निवासी सुखबीर सिंह की आईटीआई अपील की सुनवाई के बाद केस का निपटारा करते हुए की है। सुखबीर ने प्राधिकरण में दायर आरटीआई में इसके गठन को लेकर सभी फाइलों के निरीक्षण का आग्रह किया था। इसके जवाब में प्राधिकरण में तैनात एकमात्र सिपाही कृष्णपाल ने उन्हें सूचित किया कि प्रदेश का पुलिस शिकायत प्राधिकरण पिछले चार साल से चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियां न होने से बंद पडा है। यहां तैनात सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को बदला जा चुका है। सूचना नहीं मिलने पर आवेदक ने प्राधिकरण में पहली अपील दायर की लेकिन प्रथम अपीलीय अधिकारी भी तैनात नहीं होने के कारण उन्हें आयोग के समक्ष दूसरी अपील दायर करनी पड़ी।
सोमवार सुबह मामले की सुनवाई में जब सिपाही कृष्णपाल ने सूचना आयुक्त को प्राधिकरण के चार साल से ठप होने की जानकारी दी। सिपाही ने आयोग को बताया कि प्राधिकरण चार साल से ठप है। इस कारण वहां आने वाली शिकायतों का हश्र समझा जा सकता है। इस बारे में कोई भी फैसला लेने का अधिकार केवल प्राधिकरण के चेयरमैन को है। वह केवल इन्हें पावती रजिस्टर में दर्ज करने तक सीमित है। इस पर आयोग ने हैरानी जताते हुए कहा कि चेयरमैन नहीं होने के कारण आम आदमी, कमजोर तबकों व महिलाओं की पुलिस के खिलाफ मिलने वाली शिकायतें चार साल से नजरअंदाज की जा रही हैं। जनहित से जुड़े मामले में चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियां नहीं किए जाने का कड़ा संज्ञान लेते हुए उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को तत्काल कंपीटेंट आथोरेटी से अनुमति लेकर चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियां प्रोसेस शुरू करने की सिफारिश की है। इस संबंध में सरकार को उठाए गए कदमों की अनुपालना रपट 90 दिनों में आयोग को भेजने की हिदायत दी है। साथ ही आयोग ने वादी सुखबीर सिंह को पुलिस शिकायत प्राधिकरण में नियमित कामकाज आरंभ होते ही मांगे गए रिकार्ड का अविलंब निरीक्षण कराने के आदेश भी दिए हैं।
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- मुख्य सचिव से की 90 दिन में चेयरमैन व सदस्यों का नियुक्ति प्रोसेस शुरू करने की
सिफारिश
- सूचना आयुक्त ने हालात को सुशासन व जवाबदेही के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
हरियाणा पुलिस शिकायत प्राधिकरण में पिछले चार साल से नहीं हो रही चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियों को राज्य सूचना आयोग ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
राज्य सूचना आयुक्त हेमंत अत्री ने इस मामले में राज्य के मुखय सचिव को अविलंब ध्यान देने के लिए कहा है। प्राधिकरण के नाम पर इसमें केवल एक कार्यवाहक सिपाही की नियुक्ति को सुशासन के दावों व जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करने के प्रयासों पर गहरा दाग बताया है। यही नहीं मुखय सचिव को चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियां का प्रोसेस 90 दिन में शुरू करने की सिफारिश भी की है।
सूचना आयुक्त ने यह सिफारिश चंडीगढ निवासी सुखबीर सिंह की आईटीआई अपील की सुनवाई के बाद केस का निपटारा करते हुए की है। सुखबीर ने प्राधिकरण में दायर आरटीआई में इसके गठन को लेकर सभी फाइलों के निरीक्षण का आग्रह किया था। इसके जवाब में प्राधिकरण में तैनात एकमात्र सिपाही कृष्णपाल ने उन्हें सूचित किया कि प्रदेश का पुलिस शिकायत प्राधिकरण पिछले चार साल से चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियां न होने से बंद पडा है। यहां तैनात सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को बदला जा चुका है। सूचना नहीं मिलने पर आवेदक ने प्राधिकरण में पहली अपील दायर की लेकिन प्रथम अपीलीय अधिकारी भी तैनात नहीं होने के कारण उन्हें आयोग के समक्ष दूसरी अपील दायर करनी पड़ी।
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सोमवार सुबह मामले की सुनवाई में जब सिपाही कृष्णपाल ने सूचना आयुक्त को प्राधिकरण के चार साल से ठप होने की जानकारी दी। सिपाही ने आयोग को बताया कि प्राधिकरण चार साल से ठप है। इस कारण वहां आने वाली शिकायतों का हश्र समझा जा सकता है। इस बारे में कोई भी फैसला लेने का अधिकार केवल प्राधिकरण के चेयरमैन को है। वह केवल इन्हें पावती रजिस्टर में दर्ज करने तक सीमित है। इस पर आयोग ने हैरानी जताते हुए कहा कि चेयरमैन नहीं होने के कारण आम आदमी, कमजोर तबकों व महिलाओं की पुलिस के खिलाफ मिलने वाली शिकायतें चार साल से नजरअंदाज की जा रही हैं। जनहित से जुड़े मामले में चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियां नहीं किए जाने का कड़ा संज्ञान लेते हुए उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को तत्काल कंपीटेंट आथोरेटी से अनुमति लेकर चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्तियां प्रोसेस शुरू करने की सिफारिश की है। इस संबंध में सरकार को उठाए गए कदमों की अनुपालना रपट 90 दिनों में आयोग को भेजने की हिदायत दी है। साथ ही आयोग ने वादी सुखबीर सिंह को पुलिस शिकायत प्राधिकरण में नियमित कामकाज आरंभ होते ही मांगे गए रिकार्ड का अविलंब निरीक्षण कराने के आदेश भी दिए हैं।
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