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मेडिकल कॉलेज की महिला डॉक्टरों का प्रमोशन मामला

Rohtak Bureau Updated Thu, 15 Mar 2018 03:16 AM IST
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मेडिकल कॉलेज की महिला डॉक्टरों का प्रमोशन मामला
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एचएसएमटीए ने पीजीआई निदेशक से की 40 मिनट बातचीत
- डॉक्टरों का पक्ष सरकार तक भिजवाने का मिला आश्वासन

प्रकाशित समाचार की फोटो प्रति

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
महिला दिवस पर स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च विभाग की ओर से जारी नई प्रमोशन पॉलिसी के खिलाफ बुधवार को हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने पीजीआई के निदेशक से बातचीत की है।
इसमें सबसे अधिक महिला डॉक्टरों के आक्रोश को देखते हुए निदेशक डॉ. एमसी गुप्ता ने एसोसिएशन को आश्वासन दिया है कि उन्होंने डॉक्टरों की मांगों को आगे भिजवा दिया है। जो निर्देश आए हैं वह अभी लागू नहीं होंगे, इस पर विभाग और सरकार से बातचीत की जाएगी।
बुधवार को हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन (एचएसएमटीए) के डॉक्टर प्रधान डॉ. आरबी जैन के नेतृत्व में पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. एमसी गुप्ता से मिले हैं। इसमें सभी ने यूएचएसआर एक्ट 2008 का पक्ष रखते हुए स्वास्थ्य विभाग के जारी प्रमोशन निर्देशों पर आपत्ति जताई। इसमें महिला डॉक्टरों ने बताया कि यह निर्देशों महिलाओं के अधिकारों पर हनन हैं। इसके अलावा डॉक्टरों के हक को पहले ही सरकार ने पूरा नहीं किया, ऊपर से यह तुगलकी फरमान जारी कर स्वास्थ्य विभाग और अधिकारी क्या साबित करना चाहते हैं।
प्रधान डॉ. आरबी जैन ने बताया कि उनकी बात सुन कर निदेशक ने बताया कि उन्होंने डॉक्टरों की बात को पहले ही आगे भेज दिया है। इसके अलावा उन्होेंने बातचीत में आश्वासन दिया है कि डॉक्टरों की सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन न मिलने की समस्या पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा जिनका अभी छठा वेतन आयोग नहीं लगा है, उस पर भी कार्रवाई होगी। अधिकारी ने कैंपस में सड़क बनवाने से लेकर डॉक्टरों के रिहायसी क्षेत्र, घरों में पेंटिंग के लिए रजिस्टर लगवाने का आश्वासन दिया। अधिकारी ने बताया कि अकसर डॉक्टरों की शिकायत रहती है कि कुछ लोगों को छोड़ कर अन्य घरों में रंग रोगन नहीं होता, रजिस्टर लगने से सारा खाका खींच जाएगा। अधिकारी से मिलने वालों में डॉ. आदेश गुप्ता, डॉ. सिम्मी खरब, डॉ. श्वेता, डॉ. जितेंद्र जाखड़, डॉ. सतपाल उपस्थित रहे।

क्या है मामला
सूबे के एक मात्र हेल्थ विश्वविद्यालय के डॉक्टरों का कहना है कि वह आटोनोमस संस्था हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग उनके नियमों में अड़ंगा लगाता है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रमोशन पॉलिसी में नियमों को ताक पर रखकर तब्दीली कर विभाग ने गलत किया है। पीजीआईएमएस ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए एसोसिएट प्रोफेसर की प्रमोशन संबंधी बैठक को भी टाल दिया है। स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च विभाग के जारी निर्देशों के अनुसार असिस्टेंट से एसोसिएट प्रोफेसर प्रमोट होने के लिए चार साल का अनुभव जरूरी है। इसमें चाइल्ड केयर लीव, मेटरनिटी लीव, अबॉर्शन लीव, अर्नड लीव, स्टडी लीव, एक्स्ट्रा ऑर्डनरी लीव, मेडिकल लीव, हॉफ पे लीव (कैजुअल लीव, रिस्ट्रिक्टेड हॉली डे, एकेडमिक लीव, विंटर व समर वोकेशन) को छोड़कर बाकी का समय अनुभव में काउंट नहीं होगा। यह आदेश भविष्य के साथ पीछे से भी लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में वीरवार को भी एसोसिएशन की पीजीआईएमएस में एक बैठक होनी है।

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