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स्मॉग पर प्रधानमंत्री लें मेक्सिको और लंदन से सबक : दीपेंद्र
Updated Sun, 12 Nov 2017 02:22 AM IST
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स्मॉग पर प्रधानमंत्री लें मैक्सिको और लंदन से सबक : दीपेंद्र
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्मॉग पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैक्सिको और लंदन की घटनाओं से सबक लेने को कहा है। उन्होंने बताया है कि यूनाइटेड नेशन के अनुसार 1992 में मैक्सिको सिटी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर था, मगर वहां कि सरकार ने सुनियोजित तरीके से इस समस्या का हल निकाला। इसी प्रकार लंदन में 1952 में वायु प्रदूषण ने भयंकर रूप लिया था जिसे ‘द ग्रेट स्मॉग’ के नाम से जाना जाता है। मगर 1956 में उन्होंने क्लीन एयर एक्ट पास किया और अन्य विनियमनों के सहारे उन्होंने इस समस्या पर पूरी तरह काबू पा लिया।
शनिवार को जारी प्रेस बयान में सांसद ने कहा कि फिलहाल दिल्ली, हरियाणा, एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में रिकॉर्ड तोड़ स्तर पर वायु प्रदूषण है। इस समस्या का दीर्घकालिक और ठोस समाधान निकालने की जरूरत है। क्योंकि यह समस्या हर साल भयंकर रूप ले रही है। बच्चों और बुजुर्गों समेत हर आयु वर्ग के लिये दिल्ली और आस पास के क्षेत्रों में सांस लेना दूभर हो गया है। हर व्यक्ति के फेफड़ों में प्रतिदिन लगभग 50 सिगरेट के बराबर का धुंआ अंदर जा रहा है। उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा कि हम आने वाली पीढ़ियों को क्या देना चाह रहे हैं। सासंद ने कहा कि जहां साफ हवा सबका अधिकार है, यह सबकी जिम्मेदारी भी है। अब समय आ गया है कि सरकार ईमानदारी से सबके साथ मिलकर बिना आरोप प्रत्यारोप के एक सुनियोजित तरीके से इसका समाधान निकाले। क्योंकि एक्यूआई के मानक अनुसार 100 से ऊपर का स्तर सेहत के लिए हानिकारक होता है, अब यह खतरे के निशान से सात से आठ गुणा अधिक हो गया है। दिल्ली में पिछले कई सालों से सर्दी का मौसम आते ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है और लगभग पूरी सर्दी लोगों को वायु प्रदूषण का कहर झेलना पड़ता है। दीपेंद्र ने कहा कि वायु प्रदूषण काफी लंबे समय से राष्ट्रीय राजधानी के लिए समस्या बना है।
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रोहतक।
सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्मॉग पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैक्सिको और लंदन की घटनाओं से सबक लेने को कहा है। उन्होंने बताया है कि यूनाइटेड नेशन के अनुसार 1992 में मैक्सिको सिटी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर था, मगर वहां कि सरकार ने सुनियोजित तरीके से इस समस्या का हल निकाला। इसी प्रकार लंदन में 1952 में वायु प्रदूषण ने भयंकर रूप लिया था जिसे ‘द ग्रेट स्मॉग’ के नाम से जाना जाता है। मगर 1956 में उन्होंने क्लीन एयर एक्ट पास किया और अन्य विनियमनों के सहारे उन्होंने इस समस्या पर पूरी तरह काबू पा लिया।
शनिवार को जारी प्रेस बयान में सांसद ने कहा कि फिलहाल दिल्ली, हरियाणा, एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में रिकॉर्ड तोड़ स्तर पर वायु प्रदूषण है। इस समस्या का दीर्घकालिक और ठोस समाधान निकालने की जरूरत है। क्योंकि यह समस्या हर साल भयंकर रूप ले रही है। बच्चों और बुजुर्गों समेत हर आयु वर्ग के लिये दिल्ली और आस पास के क्षेत्रों में सांस लेना दूभर हो गया है। हर व्यक्ति के फेफड़ों में प्रतिदिन लगभग 50 सिगरेट के बराबर का धुंआ अंदर जा रहा है। उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा कि हम आने वाली पीढ़ियों को क्या देना चाह रहे हैं। सासंद ने कहा कि जहां साफ हवा सबका अधिकार है, यह सबकी जिम्मेदारी भी है। अब समय आ गया है कि सरकार ईमानदारी से सबके साथ मिलकर बिना आरोप प्रत्यारोप के एक सुनियोजित तरीके से इसका समाधान निकाले। क्योंकि एक्यूआई के मानक अनुसार 100 से ऊपर का स्तर सेहत के लिए हानिकारक होता है, अब यह खतरे के निशान से सात से आठ गुणा अधिक हो गया है। दिल्ली में पिछले कई सालों से सर्दी का मौसम आते ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है और लगभग पूरी सर्दी लोगों को वायु प्रदूषण का कहर झेलना पड़ता है। दीपेंद्र ने कहा कि वायु प्रदूषण काफी लंबे समय से राष्ट्रीय राजधानी के लिए समस्या बना है।
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