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अनशन पर बैठे पांच किसानों की हालत बिगड़ी, पहुंचाया अस्पताल
Updated Tue, 27 Jun 2017 12:20 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग मनवाने के लिए 15 दिनोें से सचिवालय में धरने व अनशन पर बैठे किसानों ने सोमवार को अर्धनग्न होकर बीजेपी सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान अनशन पर बैठे पांच किसानों की अचानक हालत बिगड़ गई। गर्मी के कारण उन्हें चक्कर आने लगे और वे नारेबाजी करते हुए अचानक नीचे गिर पडे़। साथी किसानों ने उन्हें उठाया और आनन-फानन में सिविल अस्पताल सें एंबुलेंस मंगवाई गई। इसके बाद पांचों किसानों को सिविल अस्पताल ले जाया गया। किसान साहब राम, शंकर व राम स्वरूप की हालत उपचार के बाद ठीक है जबकि हरलाल व बद्री की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
इससे पहले सुबह लघु सचिवालय में धरनास्थल पर सैकड़ों किसान एकत्रित हुए। इसके बाद किसानों ने बीजेपी सरकार के खिलाफ अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल पचार ने इस दौरान कहा कि 15 दिनों से किसान धरने पर बैठे हैं। पांच दिनों से किसानों का अनशन जारी है, इसके बावजूद सरकार किसानों की मांगों की तरफ कोई गंभीरता नहीं दिखा रही। इससे पता चलता है कि बीजेपी सरकार केवल उद्योगपतियों की हितैषी है। गरीब किसानों से बीजेपी को कुछ लेना-देना नहीं। चाहे वो आत्महत्या ही क्यों न कर ले। बीजेपी सरकार ने उद्योगपतियों के कर्जे माफी कर रही है। उन्हें उद्योग के लिए और कर्ज दिए जा रहे हैं लेकिन किसानों के कर्ज व दर्द से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को कोई फर्क नहीं पड़ता।
पचार ने कहा कि समय बदल चुका है पहले राजनैतिक दल किसानों को गुमराह करके उनका वोट ले लिया करते, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। कांग्रेस व इनेलो को प्रदेश का किसान आजमा चुका था, इसलिए इसबार उसने भाजपा पर भरोसा करके उसे अपना वोट दिया और बदले में उसे विश्वासघात मिला। अगर सरकार ने किसानों की मांग नहीं मानी तो बीजेपी का अच्छे दिन, बुरे दिनों में बदलते देर नहीं लगेगी।
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किसान यूनियन के अध्यक्ष प्रकाश ममेरा ने कहा कि बुजुर्ग किसानों की भी सरकार या प्रशासन को कोई परवाह नहीं है, जिस कारण धरने पर उनकी हालत प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। ऐसे में किसानों का रोष भी बढ़ता जा रहा है। यदि अब भी सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की तो वे संपूर्ण रूप से नग्न होकर रोष जताने का भी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि यूपी, कर्नाटक व पंजाब राज्य पर भी करोड़ों का कर्जा है, लेकिन उसके बावजूद उन्होंने अपने किसानों के हजारों रुपये के कर्जे माफ किए हैं, लेकिन हरियाणा सरकार इस संबंध में हठधर्मिता अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार हरियाणा के किसानों के धैर्य की परीक्षा न लेें, क्योंकि यदि उनका धैर्य टूट गया तो प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की अनाज को तरस जाएगा। इस मौके पर रणधीर जोधकां, कृष्ण ढाका, ख्यालीराम, गुरटेक सिंह, जगदीश, महावीर, हरसिंह, विकास, भीम, बृजलाल, सुरेंद्र, सतपाल, दलीप, भूप, विनोद, सुरेंद्र, गुरदित्ता, नेकीराम आदि मौजूद रहे।
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सिरसा।
कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग मनवाने के लिए 15 दिनोें से सचिवालय में धरने व अनशन पर बैठे किसानों ने सोमवार को अर्धनग्न होकर बीजेपी सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान अनशन पर बैठे पांच किसानों की अचानक हालत बिगड़ गई। गर्मी के कारण उन्हें चक्कर आने लगे और वे नारेबाजी करते हुए अचानक नीचे गिर पडे़। साथी किसानों ने उन्हें उठाया और आनन-फानन में सिविल अस्पताल सें एंबुलेंस मंगवाई गई। इसके बाद पांचों किसानों को सिविल अस्पताल ले जाया गया। किसान साहब राम, शंकर व राम स्वरूप की हालत उपचार के बाद ठीक है जबकि हरलाल व बद्री की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
इससे पहले सुबह लघु सचिवालय में धरनास्थल पर सैकड़ों किसान एकत्रित हुए। इसके बाद किसानों ने बीजेपी सरकार के खिलाफ अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल पचार ने इस दौरान कहा कि 15 दिनों से किसान धरने पर बैठे हैं। पांच दिनों से किसानों का अनशन जारी है, इसके बावजूद सरकार किसानों की मांगों की तरफ कोई गंभीरता नहीं दिखा रही। इससे पता चलता है कि बीजेपी सरकार केवल उद्योगपतियों की हितैषी है। गरीब किसानों से बीजेपी को कुछ लेना-देना नहीं। चाहे वो आत्महत्या ही क्यों न कर ले। बीजेपी सरकार ने उद्योगपतियों के कर्जे माफी कर रही है। उन्हें उद्योग के लिए और कर्ज दिए जा रहे हैं लेकिन किसानों के कर्ज व दर्द से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को कोई फर्क नहीं पड़ता।
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पचार ने कहा कि समय बदल चुका है पहले राजनैतिक दल किसानों को गुमराह करके उनका वोट ले लिया करते, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। कांग्रेस व इनेलो को प्रदेश का किसान आजमा चुका था, इसलिए इसबार उसने भाजपा पर भरोसा करके उसे अपना वोट दिया और बदले में उसे विश्वासघात मिला। अगर सरकार ने किसानों की मांग नहीं मानी तो बीजेपी का अच्छे दिन, बुरे दिनों में बदलते देर नहीं लगेगी।
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किसान यूनियन के अध्यक्ष प्रकाश ममेरा ने कहा कि बुजुर्ग किसानों की भी सरकार या प्रशासन को कोई परवाह नहीं है, जिस कारण धरने पर उनकी हालत प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। ऐसे में किसानों का रोष भी बढ़ता जा रहा है। यदि अब भी सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की तो वे संपूर्ण रूप से नग्न होकर रोष जताने का भी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि यूपी, कर्नाटक व पंजाब राज्य पर भी करोड़ों का कर्जा है, लेकिन उसके बावजूद उन्होंने अपने किसानों के हजारों रुपये के कर्जे माफ किए हैं, लेकिन हरियाणा सरकार इस संबंध में हठधर्मिता अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार हरियाणा के किसानों के धैर्य की परीक्षा न लेें, क्योंकि यदि उनका धैर्य टूट गया तो प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की अनाज को तरस जाएगा। इस मौके पर रणधीर जोधकां, कृष्ण ढाका, ख्यालीराम, गुरटेक सिंह, जगदीश, महावीर, हरसिंह, विकास, भीम, बृजलाल, सुरेंद्र, सतपाल, दलीप, भूप, विनोद, सुरेंद्र, गुरदित्ता, नेकीराम आदि मौजूद रहे।