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उत्पादक बन निगम को बिजली सप्लाई कर सकेंगे उपभोक्ता
Updated Fri, 05 Jan 2018 02:45 AM IST
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उत्पादक बन निगम को बिजली सप्लाई कर सकेंगे उपभोक्ता
- सौर ऊर्जा प्लांट की ओर बढ़ते रुझान ने उपभोक्ताओं को बनाया बिजली उत्पादक
- जिले के 10 निजी स्कूल, दो सरकारी कॉलेज, दो विवि, सरकारी व निजी अस्पताल व भवन में लगे प्लांट
- कोर्ट कांप्लेक्स भी सौर ऊर्जा से होगा जगमग, 60 लाख रुपये से लगेगा 100 केवी का प्लांट
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
बिजली उपभोक्ता अब उत्पादक बनने की ओर कदम बढ़ाने लगे हैं। ये बिजली उपभोग करने के बजाय इसे निगम को सप्लाई कर सकेंगे। अक्सर गहराई रहने वाली बिजली किल्लत भी अब नहीं सताएगी। चौंकिए मत। सच यही है। आप भी उपभोक्ता से निर्माता बनकर अपनी बिजली खपत व बिल दोनों कम कर सकते हैं।
दरअसल, अक्षय ऊर्जा विभाग ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए लोगों को सोलर पावर प्लांट लगाने की ओर आकर्षित किया है। इसके लिए प्लांट पर 30 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जा रही है। यह सरकारी योजना लोगों को भाने भी लगी है। यही वजह है कि जिले के विभिन्न दस निजी स्कूल, सरकारी व गैर सरकारी कॉलेज, उद्योग, अखबार कार्यालय, दो विश्वविद्यालय, सरकारी व निजी अस्पताल, सरकारी कार्यालय व घरों में सौर ऊर्जा चलित प्लांट लगने लगे हैं। इनमें दो किलोवाट से एक मेगावाट तक के प्लांट शामिल हैं। ज्यादातर प्लांट संस्थान की दिन भर की बिजली जरूरत पूरी करने के लिए लगाए गए हैं। रात को निगम से बिजली सप्लाई ली जाती है। ऐसे में दिन भर फ्री व रात में शुल्क देकर बिजली का उपभोग किया जा रहा है। इससे संस्थान का बिजली बिल घट कर आधे से भी कम रह गया है। प्लांट लगाने वाले उद्योगों व घरों में भी यही स्थिति है।
सौर ऊर्जा के तहत फिलहाल ऑन ग्रिड सोलर पावर प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसमें बगैर बैटरी सीधे पैनल के जरिए सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा को स्टोर करने के बजाय उपभोग किया जाता है। जबकि बैटरी लगाकर इस ऊर्जा को उपयोग नहीं होने पर स्टोर किया जा सकता है। इसे रात के समय उपयोग में लाया जा सकता है। दूसरा रास्ता निगम को सप्लाई देकर कमाई करने का है। इसके लिए नेट मीटर के लिए पावर निगम को सप्लाई दी जा सकती है। महीने भर में निगम को सप्लाई की गई बिजली यूनिट उपभोक्ता के बिल में से कम कर दी जाती है। यूनिट के बदले यूनिट देकर उपभोक्ता निगम से भेजा जाने वाला बिल कम करा सकता है। इससे उपभोक्ता आर्थिक रूप से मजबूत होगा।
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यहां लगे हैं सोलर पावर प्लांट
एमडीयू में एक मेगावाट, स्टेट यूनिवर्सिटी में 160 किलोवाट, असिन कंपनी में 100 केवी, माइक्रोन में 500 केवी, एलपीएस में 180 केवी के बड़े प्लांट लगे हैं। नेकीराम कॉलेज, राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, जाट कॉलेज, जोन वेस्ले स्कूल, पठानिया स्कूल, सरस्वती स्कूल, बाबा बंदा बहादुर स्कूल, इंडस स्कूल, डीजीवी स्कूल, एमजीएम, जेड ग्लोबल स्कूल के अलावा कुछ घरों में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कोर्ट में 60 लाख रुपये से लगेगा 100 केवी का प्लांट
कोर्ट कांप्लेक्स जल्दी ही सौर ऊर्जा से जगमग होगा। इसके लिए सर्वे हो चुका है। यहां सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए प्रपोजल भेज दिया गया है। कोर्ट में 60 लाख रुपये की लागत से 100 किलो वाट का प्लांट लगाया जाना है। यही नहीं जिला विकास भवन का सोलर पावर प्लांट भी 75 केवी हो जाएगा। फिलहाल यह प्लांट 10 केवी का है। बुधवार को निगम की लाइन में फाल्ट के चलते इस प्लांट ने दिन में करीब चार घंटे से ज्यादा समय बिजली सप्लाई दी। इसके चलते बिजली गुल होने पर भी विकास भवन रोशन रहा। अब यह और जगमगाएगा। इसके लिए प्लांट की क्षमता 65 केवी और बढ़ाने की तैयारी की गई है।
वर्जन :
सौर ऊर्जा को लेकर लोगाें को रुझान बढ़ने लगा है। इसकी मांग होने लगी है। शहर के दो विवि, सरकारी कॉलेजों के बाद निजी स्कूल, कॉलेजों, उद्योगपतियों व लोगों ने भी सोलर पावर प्लांट लगाने में रुचि दिखाई है। इसके लिए विभाग 30 प्रतिशत सब्सिडी दे रहा है। फिलहाल लोग अपने उपयोग के लिए बिजली उत्पादन में निर्भर हो रहे हैं। वे बड़े प्लांट के जरिए अतिरिक्त बिजली निगम को सप्लाई दे सकते हैं। निगम ऐसे उपभोक्ता को यूनिट के बदले यूनिट का लाभ देकर उनके बिजली बिल में राहत देगा। इससे उनका आर्थिक बोझ कम होगा।
- एसएस सांगवान, प्रोजेक्ट ऑफिसर, अक्षय ऊर्जा
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- सौर ऊर्जा प्लांट की ओर बढ़ते रुझान ने उपभोक्ताओं को बनाया बिजली उत्पादक
- जिले के 10 निजी स्कूल, दो सरकारी कॉलेज, दो विवि, सरकारी व निजी अस्पताल व भवन में लगे प्लांट
- कोर्ट कांप्लेक्स भी सौर ऊर्जा से होगा जगमग, 60 लाख रुपये से लगेगा 100 केवी का प्लांट
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
बिजली उपभोक्ता अब उत्पादक बनने की ओर कदम बढ़ाने लगे हैं। ये बिजली उपभोग करने के बजाय इसे निगम को सप्लाई कर सकेंगे। अक्सर गहराई रहने वाली बिजली किल्लत भी अब नहीं सताएगी। चौंकिए मत। सच यही है। आप भी उपभोक्ता से निर्माता बनकर अपनी बिजली खपत व बिल दोनों कम कर सकते हैं।
दरअसल, अक्षय ऊर्जा विभाग ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए लोगों को सोलर पावर प्लांट लगाने की ओर आकर्षित किया है। इसके लिए प्लांट पर 30 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जा रही है। यह सरकारी योजना लोगों को भाने भी लगी है। यही वजह है कि जिले के विभिन्न दस निजी स्कूल, सरकारी व गैर सरकारी कॉलेज, उद्योग, अखबार कार्यालय, दो विश्वविद्यालय, सरकारी व निजी अस्पताल, सरकारी कार्यालय व घरों में सौर ऊर्जा चलित प्लांट लगने लगे हैं। इनमें दो किलोवाट से एक मेगावाट तक के प्लांट शामिल हैं। ज्यादातर प्लांट संस्थान की दिन भर की बिजली जरूरत पूरी करने के लिए लगाए गए हैं। रात को निगम से बिजली सप्लाई ली जाती है। ऐसे में दिन भर फ्री व रात में शुल्क देकर बिजली का उपभोग किया जा रहा है। इससे संस्थान का बिजली बिल घट कर आधे से भी कम रह गया है। प्लांट लगाने वाले उद्योगों व घरों में भी यही स्थिति है।
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सौर ऊर्जा के तहत फिलहाल ऑन ग्रिड सोलर पावर प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसमें बगैर बैटरी सीधे पैनल के जरिए सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा को स्टोर करने के बजाय उपभोग किया जाता है। जबकि बैटरी लगाकर इस ऊर्जा को उपयोग नहीं होने पर स्टोर किया जा सकता है। इसे रात के समय उपयोग में लाया जा सकता है। दूसरा रास्ता निगम को सप्लाई देकर कमाई करने का है। इसके लिए नेट मीटर के लिए पावर निगम को सप्लाई दी जा सकती है। महीने भर में निगम को सप्लाई की गई बिजली यूनिट उपभोक्ता के बिल में से कम कर दी जाती है। यूनिट के बदले यूनिट देकर उपभोक्ता निगम से भेजा जाने वाला बिल कम करा सकता है। इससे उपभोक्ता आर्थिक रूप से मजबूत होगा।
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यहां लगे हैं सोलर पावर प्लांट
एमडीयू में एक मेगावाट, स्टेट यूनिवर्सिटी में 160 किलोवाट, असिन कंपनी में 100 केवी, माइक्रोन में 500 केवी, एलपीएस में 180 केवी के बड़े प्लांट लगे हैं। नेकीराम कॉलेज, राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, जाट कॉलेज, जोन वेस्ले स्कूल, पठानिया स्कूल, सरस्वती स्कूल, बाबा बंदा बहादुर स्कूल, इंडस स्कूल, डीजीवी स्कूल, एमजीएम, जेड ग्लोबल स्कूल के अलावा कुछ घरों में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कोर्ट में 60 लाख रुपये से लगेगा 100 केवी का प्लांट
कोर्ट कांप्लेक्स जल्दी ही सौर ऊर्जा से जगमग होगा। इसके लिए सर्वे हो चुका है। यहां सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए प्रपोजल भेज दिया गया है। कोर्ट में 60 लाख रुपये की लागत से 100 किलो वाट का प्लांट लगाया जाना है। यही नहीं जिला विकास भवन का सोलर पावर प्लांट भी 75 केवी हो जाएगा। फिलहाल यह प्लांट 10 केवी का है। बुधवार को निगम की लाइन में फाल्ट के चलते इस प्लांट ने दिन में करीब चार घंटे से ज्यादा समय बिजली सप्लाई दी। इसके चलते बिजली गुल होने पर भी विकास भवन रोशन रहा। अब यह और जगमगाएगा। इसके लिए प्लांट की क्षमता 65 केवी और बढ़ाने की तैयारी की गई है।
वर्जन :
सौर ऊर्जा को लेकर लोगाें को रुझान बढ़ने लगा है। इसकी मांग होने लगी है। शहर के दो विवि, सरकारी कॉलेजों के बाद निजी स्कूल, कॉलेजों, उद्योगपतियों व लोगों ने भी सोलर पावर प्लांट लगाने में रुचि दिखाई है। इसके लिए विभाग 30 प्रतिशत सब्सिडी दे रहा है। फिलहाल लोग अपने उपयोग के लिए बिजली उत्पादन में निर्भर हो रहे हैं। वे बड़े प्लांट के जरिए अतिरिक्त बिजली निगम को सप्लाई दे सकते हैं। निगम ऐसे उपभोक्ता को यूनिट के बदले यूनिट का लाभ देकर उनके बिजली बिल में राहत देगा। इससे उनका आर्थिक बोझ कम होगा।
- एसएस सांगवान, प्रोजेक्ट ऑफिसर, अक्षय ऊर्जा