फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   बेटी की मौत ने झकझोरा, अब नौ साल से देशभर में बेटी बचाने, बेटी पढ़ाने की कर रहे अपील

बेटी की मौत ने झकझोरा, अब नौ साल से देशभर में बेटी बचाने, बेटी पढ़ाने की कर रहे अपील

Fri, 08 Sep 2017 01:05 AM IST
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:05 AM IST
विज्ञापन
बेटी की मौत ने झकझोरा, अब नौ साल से देशभर में बेटी बचाने, बेटी पढ़ाने की कर रहे अपील
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

रेवाड़ी।
केवल 18-20 घंटे ही जीवित रही बेटी की मौत ने राजेश को ऐसा झकझोरा कि उन्होंने देश में बेटी बचाने, बेटी पढ़ाने की मुहिम शुरू कर दी। जूस की दुकान चलाने वाले रेवाड़ी के राजेश ने इस अभियान के लिए किसी की मदद भी नहीं ली। यहीं नहीं परिस्थितियां कैसी भी हो हर हालात को पार कर राजेश लगातार नौ साल से रेवाड़ी से संसार की सबसे ऊंची सड़क खरदूंगला तक बेटी बचाने का संदेश दे रहे हैं। रेवाड़ी में पंडित जी की नाम से मशहूर राजेश शर्मा बुधवार रात 6800 किलोमीटर की बाइक यात्रा कर रेवाड़ी लौटे तो उन्होंने यात्रा से संबंधित अनुभव शेयर किए। ज्ञात रहे कि राजेश 17 अगस्त को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश देने के लिए रेवाड़ी से बाइक पर रवाना हुए थे। यहां से जम्मू, लेह होते हुए संसार की सबसे ऊंची सड़क खरदूंगला पहुंचे। वहां बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का बोर्ड लगाने के बाद मनाली, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात होते मुंबई पहुंचे। राजेश के रेवाड़ी लौटने पर स्थानीय लोगों ने भी राजेश का स्वागत किया। राजेश ने बताया कि यात्रा के दौरान 29 अगस्त को राजस्थान के ब्यावर सिटी थाने पहुंचे। यहां उनका जबरदस्त स्वागत किया गया।
यात्रा के बाद से ही शुरू कर देते हैं बचत
राजेश की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। वह रेलवे रोड पर जूस की दुकान चलाते हैं। परिवार में एक बेटा, पत्नी और माता-पिता हैं। राजेश अपनी हर यात्रा के एक बाद गुल्लक रख देते हैं। इसमें वह दुकान से होने वाली आमदनी का कुछ हिस्सा जोड़ते हैं। जब यात्रा शुरू करनी होती है तभी यह गुल्लक फोड़ते हैं।
विज्ञापन


साल 2008 में शुरू की मुहिम
राजेश साल 2008 से लगातार इन्हीं दिनों में हर साल यह यात्रा करते हैं। आठ यात्राओं में उनके साथ बड़ा तालाब निवासी नरेश पहलवान जाते थे। लेकिन इस बार वह किसी कारणवश नहीं जा पाए। जिसके बाद राजेश अकेली ही इस यात्रा पर निकल लिए। राजेश का जाते समय शहरवासियों ने स्वागत किया था। राजेश ने इस यात्रा में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के 89 बोर्ड लगाए। इनमें से 56 बोर्ड राजेश साथ लेकर गए थे। वहीं 33 बोर्ड अहमदाबाद में बनवाए। राजेश ने रास्ते में हर जिले में जहां जगह मिली वहां बोर्ड लगा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


बेटी की मौत के बाद लिया निर्णय
राजेश ने बताया कि उनकी शादी साल 2001 में हुई थी। शादी के सात साल बाद एक बेटा हुआ। फिर एक साल बाद बेटी हुई। बेटी केवल 18-20 घंटे ही जीवित रह सकी। उसकी मौत ने राजेश को झकझोर दिया। इसके बाद राजेश ने पत्नी अनीता की सलाह से देश में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश देने का निर्णय किया। फिर राजेश हर साल साल यह संदेश देने के लिए यात्रा करते हैं।

बनिहाल में हुई मारपीट
राजेश ने बताया कि वह बाइक पर तिरंगा झंडा लगाकर रवाना हुए थे। जम्मू के बनिहाल में कुछ समाज कंटकों ने तिरंगा लगाने पर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद गुजरात में जब लोगों ने राजेश के बारे में पूछा। तो राजेश ने अपने को हरियाणा का बताया। इस पर लोगों ने राजेश को ‘सिरसा डेरे से संबंधित’ बताया, जिससे राजेश को काफी शर्मिंदा होना पड़ा।


स्थिति ऐसी थी कि शुरुआत में ‘अपने घर’ के बाहर लगाना पड़ा बोर्ड
आज चाहे रेवाड़ी का लिंगानुपात करीब साढ़े 900 पहुंच चुका है, लेकिन कुछ समय पहले तक रेवाड़ी के घटते लिंगानुपात ने इसे पूरे देश में शर्मसार कर दिया। पानीपत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओे का नारा दिया था। लेकिन राजेश प्रधानमंत्री के आह्वान से पूर्व ही यह कर रहे हैं। राजेश ने बताया कि जब उन्होंने यह यात्रा शुरू तो उन्हें लगा कि लोग पता नहीं क्या कहेंगे। इसलिए पहला बोर्ड उन्होंने रेवाड़ी से बाहर लगाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed