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कुछ डॉक्टर डेपुटेशन पर तो कुछ छुट्टी पर कैसे हो उपचार

Sun, 06 May 2018 02:20 AM IST
Updated Sun, 06 May 2018 02:20 AM IST
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कुछ डॉक्टर डेपुटेशन पर तो कुछ छुट्टी पर कैसे हो उपचार
सूरत ए हाल जिला अस्पताल ---
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कुछ डॉक्टर डेपुटेशन पर तो कुछ छुट्टी पर कैसे हो उपचार

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जिला अस्पताल में आने वाले ज्यादातर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है। क्योंकि यहां कुछ डॉक्टर अपनी मर्जी के अनुसार डेपुटेशन पर हैं तो कुछ छुट्टी पर चल रहे हैं। प्रशासन की मानें तो 12 से अधिक डॉक्टर नियुक्ति होने के बाद भी अस्पताल में वह मौजूद नहीं होते। इसके अलावा यहां के डॉक्टरों को आपात विभाग, पोस्टमार्टम, जेल और वीवीआईपी ड्यूटी भी करनी होती है।

अस्पताल में प्रतिदिन 1500 से अधिक मरीज ओपीडी में जांच के लिए आते हैं। इसमें से कुछ मरीजों को पीजीआईएमएस कागजों में या मौखिक रूप से रेफर कर दिया जाता है। वहीं कुछ मरीज डॉक्टर सीट पर न होने के चलते अपने आप पीजीआई का रुख कर लेते हैं। क्योंकि जिला अस्पताल में कोई नियम नहीं है कि कौन डॉक्टर किस दिन बैठेगा और किस दिन नहीं बैठेगा। ऐसी सूरत में दूर दराज से आने वाले मरीज को समय और पैसा दोनों बर्बाद करना पड़ता है। जिला अस्पताल के बिगड़ते हालात के चलते यहां कई मरीज आने को ही तैयार नहीं हैं।
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अस्पताल में पहले से ही फिजीशियन और सर्जनों का टोटा चल रहा है। अब मेडिकल आफिसर की कमी भी अस्पताल प्रबंधन के लिए चेतावनी बनी हुई है। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला स्वयं ओपीडी में मरीज की जांच करने आते हैं। लेकिन इससे मरीजों की दैनिक समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों का आरोप है कि कुछ डॉक्टरों ने जानबूझ कर अपनी डेपुटेशन करवा रखी है, इसके चलते समस्या हो रही है। अस्पताल में पहले से ही डॉक्टरों की कमी है इसके बावजूद हाल ही में डॉ. प्रवीण व अश्वनी नागर को जींद व डॉ. सुशीला गोदारा को बिजली बोर्ड की डिस्पेंसरी तथा एक डॉक्टर को प्रशिक्षण केंद्र में डेपुटेशन पर भेजा गया है।
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बोले अधिकारी
डॉक्टरों की डेपुटेशन को रद करने के लिए अधिकारियों को लिख दिया गया है। यदि किसी को सर्जन की जरूरत है तो वह अस्पताल में भी मरीजों की जांच करने जाते हैं। इसके साथ यदि कोई मरीज उनके सिविल सर्जन कार्यालय में भी आता है तो कोई मनाही नहीं है। जिला अस्पताल प्रबंधन से डॉक्टरों का रोस्टर बनाने को कहा जाएगा।
- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन
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