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यमुना पानी की स्टोरी
Updated Mon, 09 Apr 2018 12:36 AM IST
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प्यास बुझाने क्लास रूम से घर की दौड़ लगाते हैं बच्चे
भंगेडी के राजकीय प्राथमिक स्कूल में नहीं है पेयजल व्यवस्था, 60 बच्चों सहित स्टाफ भी परेशान
रामकिशन कश्यप
यमुनानगर/खिजराबाद। सर! पानी पीने घर जाऊं। बोतल का पानी खत्म हो गया, घर से भर लाऊं। कुछ ऐसा ही कहकर बच्चे प्यास लगने पर स्कूल से घर और फिर घर से स्कूल की दौड़ लगा रहे हैं। यह नजारा रोज घाड़ क्षेत्र के गांव भंगेडी में राजकीय प्राथमिक स्कूल में देखने को मिलता है। स्कूल में पेयजल की व्यवस्था नहीं होने पर क्लास टीचर भी बच्चों को पानी के लिए घर भेजने पर मजबूर हैं।
बता दें कि घाड़ क्षेत्र के गांव भंगेडी स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल में पहली से पांचवीं तक कुल 60 बच्चे पढ़ रहे हैं। इन पर तीन अध्यापक हैं। स्कूल में न तो पेयजल के लिए नल व हैंडपंप है और न ही शौचालय में इस्तेमाल के लिए पानी की व्यवस्था ही है। स्कूल में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चों के घर पास में होने के चलते वह प्यास लगने पर क्लास रूम से घर पानी पीने चले जाते हैं। उनके साथ अन्य भी यही कह स्कूल से बाहर आते-जाते हैं। टीचर्स की ओर से सभी को साथ पानी की बोतल लाने को कहा जाता है, लेकिन बोतल का पानी खत्म होने पर वह फिर बोतल भरने घर या स्कूल से बाहर चले जाते हैं। कई बच्चे काफी देर बाद भी घर व स्कूल से बाहर से वापस क्लास रूम में नहीं लौटते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसको लेकर स्कूल टीचर भी मजबूर हैं। चूंकि गर्मी में छोटे बच्चों को बार-बार प्यास लगना स्वाभाविक है। ऐसे में स्कूल में पेयजल व्यवस्था न होने पर उन्हें प्यास लगने पर पानी के लिए घर भेजना पड़ता है।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
अध्यापक रजनेश ने बताया कि बच्चों के पेयजल के लिए बार-बार क्लास रूम से उठकर जाने से उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है। बच्चे पानी पीने के लिए घर चले जाते हैं और अपनी मर्जी से आते हैं। यदि बच्चा काफी देर तक स्कूल में वापस नहीं आता तो वह इसमें क्या कर सकते हैं। यदि वह बच्चों को घर लेने जाएं तो दूसरे बच्चे जो क्लासरूम में उपस्थित हैं, उनकी पढ़ाई खराब होती है।
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शौचालय के लिए भी लाना पड़ता पानी
स्कूल में न तो पेयजल के लिए नल व हैंडपंप है और न ही शौचालय में इस्तेमाल के लिए पानी की व्यवस्था ही है। ऐसे में पीने के पानी के साथ शौचालय में इस्तेमाल के लिए भी बच्चों को घर से पानी लाना पड़ता है। भंगेडी गांव पहले बागपत पंचायत में अंतर्गत आता था, लेकिन अब बागपत से अलग गांव भंगेडी पंचायत है। पहले की पंचायत और मौजूदा पंचायत की ओर से भी स्कूल में पेयजल की व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है।
डाला था प्रस्ताव, फंड न होने से नहीं हो पाई व्यवस्था
भंगेडी गांव की महिला सरपंच के पति सुरजीत सिंह ने कहा कि भंगेडी गांव की पंचायत अबके प्लान में अलग हुई है। पहले यह बागपत पंचायत के साथ अटैच था। गांव की पंचायत अलग बनते ही गांव के स्कूल में पीने के पानी की व्यवस्था बारे प्रस्ताव डाला गया, लेकिन फंड न होने से स्कूल में हैंडपंप या नल की व्यवस्था नहीं कराई जा सकी है। विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल को समस्या के बारे में अवगत कराया है।
इस बारे में जानकारी नहीं है। सोमवार को स्कूल खुलने पर वह मामले की जांच कराएंगे। अगर ऐसी समस्या है तो समाधान कराया जाएगा।
- धर्मसिंह राठी, बीईओ, खिजराबाद, शिक्षा विभाग।
फोटो-23 व 24, 29, 30
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भंगेडी के राजकीय प्राथमिक स्कूल में नहीं है पेयजल व्यवस्था, 60 बच्चों सहित स्टाफ भी परेशान
रामकिशन कश्यप
यमुनानगर/खिजराबाद। सर! पानी पीने घर जाऊं। बोतल का पानी खत्म हो गया, घर से भर लाऊं। कुछ ऐसा ही कहकर बच्चे प्यास लगने पर स्कूल से घर और फिर घर से स्कूल की दौड़ लगा रहे हैं। यह नजारा रोज घाड़ क्षेत्र के गांव भंगेडी में राजकीय प्राथमिक स्कूल में देखने को मिलता है। स्कूल में पेयजल की व्यवस्था नहीं होने पर क्लास टीचर भी बच्चों को पानी के लिए घर भेजने पर मजबूर हैं।
बता दें कि घाड़ क्षेत्र के गांव भंगेडी स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल में पहली से पांचवीं तक कुल 60 बच्चे पढ़ रहे हैं। इन पर तीन अध्यापक हैं। स्कूल में न तो पेयजल के लिए नल व हैंडपंप है और न ही शौचालय में इस्तेमाल के लिए पानी की व्यवस्था ही है। स्कूल में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चों के घर पास में होने के चलते वह प्यास लगने पर क्लास रूम से घर पानी पीने चले जाते हैं। उनके साथ अन्य भी यही कह स्कूल से बाहर आते-जाते हैं। टीचर्स की ओर से सभी को साथ पानी की बोतल लाने को कहा जाता है, लेकिन बोतल का पानी खत्म होने पर वह फिर बोतल भरने घर या स्कूल से बाहर चले जाते हैं। कई बच्चे काफी देर बाद भी घर व स्कूल से बाहर से वापस क्लास रूम में नहीं लौटते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसको लेकर स्कूल टीचर भी मजबूर हैं। चूंकि गर्मी में छोटे बच्चों को बार-बार प्यास लगना स्वाभाविक है। ऐसे में स्कूल में पेयजल व्यवस्था न होने पर उन्हें प्यास लगने पर पानी के लिए घर भेजना पड़ता है।
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बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
अध्यापक रजनेश ने बताया कि बच्चों के पेयजल के लिए बार-बार क्लास रूम से उठकर जाने से उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है। बच्चे पानी पीने के लिए घर चले जाते हैं और अपनी मर्जी से आते हैं। यदि बच्चा काफी देर तक स्कूल में वापस नहीं आता तो वह इसमें क्या कर सकते हैं। यदि वह बच्चों को घर लेने जाएं तो दूसरे बच्चे जो क्लासरूम में उपस्थित हैं, उनकी पढ़ाई खराब होती है।
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शौचालय के लिए भी लाना पड़ता पानी
स्कूल में न तो पेयजल के लिए नल व हैंडपंप है और न ही शौचालय में इस्तेमाल के लिए पानी की व्यवस्था ही है। ऐसे में पीने के पानी के साथ शौचालय में इस्तेमाल के लिए भी बच्चों को घर से पानी लाना पड़ता है। भंगेडी गांव पहले बागपत पंचायत में अंतर्गत आता था, लेकिन अब बागपत से अलग गांव भंगेडी पंचायत है। पहले की पंचायत और मौजूदा पंचायत की ओर से भी स्कूल में पेयजल की व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है।
डाला था प्रस्ताव, फंड न होने से नहीं हो पाई व्यवस्था
भंगेडी गांव की महिला सरपंच के पति सुरजीत सिंह ने कहा कि भंगेडी गांव की पंचायत अबके प्लान में अलग हुई है। पहले यह बागपत पंचायत के साथ अटैच था। गांव की पंचायत अलग बनते ही गांव के स्कूल में पीने के पानी की व्यवस्था बारे प्रस्ताव डाला गया, लेकिन फंड न होने से स्कूल में हैंडपंप या नल की व्यवस्था नहीं कराई जा सकी है। विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल को समस्या के बारे में अवगत कराया है।
इस बारे में जानकारी नहीं है। सोमवार को स्कूल खुलने पर वह मामले की जांच कराएंगे। अगर ऐसी समस्या है तो समाधान कराया जाएगा।
- धर्मसिंह राठी, बीईओ, खिजराबाद, शिक्षा विभाग।
फोटो-23 व 24, 29, 30