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पहलवान पिता के बाद बेटा सत्यव्रत भी अर्जुन अवार्डी

Thu, 31 Aug 2017 02:16 AM IST
Updated Thu, 31 Aug 2017 02:16 AM IST
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पहलवान पिता के बाद बेटा सत्यव्रत भी अर्जुन अवार्डी
अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक। पहलवान पिता के अर्जुन अवार्ड को देखकर हमेशा अवार्ड हासिल करने ख्वाहिश रखने वाले पहलवान सत्यव्रत कादियान का आखिरकार सपना पूरा हुआ। अर्जुन अवार्ड से सम्मानित होने के बाद बुधवार को घर पहुंचने पर सत्यव्रत का स्वागत किया गया। परिजनों, रिश्तेदारों और कई गांवों से आए पहलवानों ने उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई दी।
गांव से आए पहलवानों ने सत्यव्रत और उनके पिता अर्जुन अवार्डी सत्यवान कादियान को 5100-5100 रुपये सम्मान के रूप में दिए। इसके बाद उन्हें फूलों की माला पहनाकर मिठाई खिलाई। विभिन्न खेलों में उपलब्धि हासिल करने वाले खिलाड़ियों को मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली में कई पुरस्कार वितरित किए। इस दौरान सत्यव्रत को खेलों के सर्वोत्तम पुरस्कार अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया। अवार्ड पाकर घर पहुंचे सत्यव्रत आत्मविश्वास से लबरेज दिखे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि अर्जुन अवार्ड पाना एक गौरवशाली पल रहा। इस दौरान उनके साथ माता-पिता और पत्नी साक्षी मलिक कादियान रही। वह अवार्ड लेकर रात आठ बजे घर पहुंचे। घर आते ही उनके स्वागत के लिए परिवार में से बुआ और बहनें आई हुई थी। उन्होंने सत्यव्रत को मिठाई खिलाकर बधाई दी। उन्होंने बताया कि पापा को देखकर बचपन से ही उनका सपना भी अर्जुन अवार्ड पाना रहा है। सत्यव्रत ने इस नायाब तोहफे को पिता को समर्पित करते हुए कहा कि मेरे पिता ही मेरे पहले गुरु हैं। उनसे प्रेरणा नहीं मिलती तो वह आज इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं कर पाते। इस मौके पर दिलबाग, जयभगवान
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बचपन में पापा के अर्जुन अवार्ड लेकर घूमता था सत्यव्रत
सत्यव्रत ने बताया कि वह जब छोटे थे तो पापा के अर्जुन अवार्ड लेकर घूमता था। उन्हें जब परिवार वालों ने बताया कि यह आम खिलौना नहीं है। इसे बड़ी मेहनत से पाया गया है। उसकी अहमियत सुनकर सत्यव्रत ने उसी समय से ही वैसा ही अवार्ड पाने की ठान ली। अब मंगलवार को राष्ट्रपति के हाथों वहीं अवार्ड मिला तो उन्हें उसी बचपन की याद आ गई। अर्जुन अवार्ड पाकर घर आते ही सत्यव्रत ने कहा, खुशी बहुत है कि आज मैं वैसा ही एक और बचपन का खिलौना ले घर आया हूं।
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