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रोडवेज का चक्का जाम,भटकते रहे यात्री
Updated Wed, 14 Jun 2017 01:16 AM IST
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रोडवेज का चक्का जाम, भटकते रहे यात्री
चरखी दादरी। निजी बसों को परमिट देने के विरोध में मंगलवार को दिनभर रोडवेज का चक्का जाम रहा। सोमवार रात 12 बजे से ही रोडवेज कर्मचारी एक दिन की हड़ताल पर चले गए थे। इससे सुबह करीब चार बजे दिल्ली के लिए जाने वाली पहली बस से लेकर रात करीब साढ़े 11 बजे वाली अंतिम बस सेवा पूर्णतया प्रभावित रही। इस दौरान रोडवेज कर्मचारियों ने गेट मीटिंग आयोजित कर सरकार के निजीकरण के फैसले के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। वहीं रोडवेज के पहिए जाम रहने से ट्रेनें यात्रियों का सहारा बनी और रेलवे स्टेशन पर करीब डेढ़ गुणा यात्रियों की संख्या अधिक रही। इस दौरान कुछ वाहन चालकों ने निर्धारित किराये से पांच से दस रुपये तक अतिरिक्त वसूला। इस पर कुछ सवारियां बस स्टैंड के सामने ही चालक से उलझती दिखी तो ज्यादातर ने निर्विरोध मनमाफिक मांगा गया किराया चालक को थमाया। वहीं, डीसी के निर्देशों पर एसपी सुनील दलाल ने बस स्टैंड पर सुरक्षा की दृष्टि से एक रिजर्व कंपनी सहित सिटी थाना टीम को भी तैनात रखा। हड़ताल के चलते ट्रेनिंग सेंटर की बसें भी नहीं चली और युवाओं को वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा डीसी पल-पल की जानकारी एसडीएम से लेते रहे।
जानकारी के अनुसार अप्रैल माह में चार दिन तक रोडवेज का चक्का जाम करने के बाद सरकार व रोडवेज यूनियनों में वार्ता को लेकर सहमति बनी थी। इस वार्ता में सरकार व यूनियनों के बीच बात पूरी तरह से सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके विरोध में रोडवेज की आठों यूनियनों के पदाधिकारियों ने 13 जून को एक दिन के लिए रोडवेज का चक्का जाम करने का ऐलान किया था। इसी के तहत दादरी रोडवेज परिसर में भी मंगलवार को बस सेवाएं पूर्णतया ठप रही। इंटक प्रधान राजेश रावलधी ने बताया कि सरकार रोडवेज कर्मचारियों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार को रोडवेज का निजीकरण करने की बजाय नई भर्ती, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना और बेड़े में बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। इससे पहले सोमवार रात 12 बजे ही यूनियनों ने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया था। हड़ताल के कारण कोई जॉब पर समय पर नहीं पहुंच सका तो कोई विवाह समारोह में देरी से शरीक हो पाया। अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए यात्री भटकते नजर आए। रेलवे स्टेशन पर आम दिन छह से सात हजार यात्री सफर करते थे लेकिन मंगलवार को इनकी संख्या करीब दस हजार दर्ज की गई। ट्रेनों के साथ निजी वाहन दिनभर से सवारियों से खचाखच भरे आए। कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से परिवहन विभाग को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा। दिनभर बसों के पहिये थमे रहने से विभाग को 14 लाख का नुकसान हुआ। एसपीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि प्रतिदिन दस लाख की इनकम दादरी डिपो में व चार लाख की इनकम लोहारू सब डिपो में होती है। रोडवेज बस में सफर करने वाले करीब 25 हजार यात्रियों को हड़ताल के चलते अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचने के लिए दिक्कत उठानी पड़ी।
डिपो की 91 तो सब डिपो की 52 बसों के रूट प्रभावित
दादरी डिपो के बेड़े में 161 बसें हैं। इनमें से 52 बसें लोहारू सब डिपो की है। लोहारू सब डिपो व दादरी डिपो में 542 कर्मचारी हैं। इनमें चालक 204 हैं तो परिचालकों की संख्या 202 है। दादरी डिपो की 91 बसें प्रतिदिन करीब 34 हजार किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। लोहारू सब डिपो की 52 बसें प्रतिदिन 14 हजार किलोमीटर विभिन्न रूटों पर दौड़ती हैं। लोहारू सब डिपो की बसों में प्रतिदिन करीब सात से आठ हजार यात्री सफर करते हैं। दादरी डिपो में प्रतिदिन यात्रियों की संख्या 16 से 17 हजार के बीच रहती है। दादरी डिपो परिसर के बेड़े में शामिल बसें प्रतिदिन 34 हजार किलोमीटर का सफर तय करती हैं। मंगलवार को चक्का जाम रहने से चंडीगढ़ की 11, जयपुर की 10, नारनौल की 22, दिल्ली-झज्जर की 20, रोहतक की 50, लोहारू-बाढड़ा की 20 ट्रिप, भिवानी की 30, कनीना की 28, कोसली की 16 व बेरी की 14 ट्रिप प्रभावित हुई।
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किसी का शादी का प्रोग्राम प्रभावित तो कोई नहीं लौट पाया घर
--बहन की शादी पक्की करने के लिए तोशाम जाना था लेकिन रोडवेज बस चल नहीं रही है। प्राइवेट वाहनों में बैठने के लिए भी जगह नहीं है। लड़का देखने के लिए समय पर पहुंचना बहुत जरूरी है। हड़ताल ने तो सारा प्रोग्राम खराब कर दिया।
नरेंद्र, यात्री
-- कॉलेज में बच्चों को पढ़ने के लिए नारनौल जाना होता है। रोडवेज के पहिए जाम है। निजी वाहन चालक निर्धारित किराये से ज्यादा वसूल कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन वाहनों में बाहर लटककर सफर करना पड़ता है, जोकि खतरनाक साबित हो सकता है।
सत्यप्रकाश, यात्री
-- छोटी बहन के लिए लड़का दिखने के लिए भिवानी जाना था। रोडवेज की हड़ताल है। प्राइवेट वाहनों में भी बैठने की जगह मिलती मुश्किल नजर आ रही है। रोडवेज कर्मचारियों व सरकार की खींचातानी में परेशानियां जनता को उठानी पड़ रही है।
रोडवेज हड़ताल ने तो परेशानी बढ़ा दी।
संदीप, यात्री
--वनारस से किसी काम के लिए रात को दादरी आया था लेकिन सुबह से रोडवेज बस नहीं चल रही है। मुझे हड़ताल का पता नहीं था वरना मैं घर से चलता ही नहीं। सुबह से यहां खड़े चार घंटे हो गए लेकिन वापसी के लिए वाहन नहीं मिल रहा।
गुरेलाल, यात्री
वर्जन:
हड़ताल के चलते बसें डिपो से नहीं चल पाई। विभाग को करीब 14 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। वैसे कर्मचारियों की हड़ताल शांतिपूर्वक रही। निजी वाहनों व ट्रेनों का सहारा यात्रियों ने लिया। मेरे पास जो भी आगामी निर्देश आएंगे उसी के अनुरूप मैं कार्रवाई करूंगा।
आरएस पूनिया, जीएम रोडवेज
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चरखी दादरी। निजी बसों को परमिट देने के विरोध में मंगलवार को दिनभर रोडवेज का चक्का जाम रहा। सोमवार रात 12 बजे से ही रोडवेज कर्मचारी एक दिन की हड़ताल पर चले गए थे। इससे सुबह करीब चार बजे दिल्ली के लिए जाने वाली पहली बस से लेकर रात करीब साढ़े 11 बजे वाली अंतिम बस सेवा पूर्णतया प्रभावित रही। इस दौरान रोडवेज कर्मचारियों ने गेट मीटिंग आयोजित कर सरकार के निजीकरण के फैसले के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। वहीं रोडवेज के पहिए जाम रहने से ट्रेनें यात्रियों का सहारा बनी और रेलवे स्टेशन पर करीब डेढ़ गुणा यात्रियों की संख्या अधिक रही। इस दौरान कुछ वाहन चालकों ने निर्धारित किराये से पांच से दस रुपये तक अतिरिक्त वसूला। इस पर कुछ सवारियां बस स्टैंड के सामने ही चालक से उलझती दिखी तो ज्यादातर ने निर्विरोध मनमाफिक मांगा गया किराया चालक को थमाया। वहीं, डीसी के निर्देशों पर एसपी सुनील दलाल ने बस स्टैंड पर सुरक्षा की दृष्टि से एक रिजर्व कंपनी सहित सिटी थाना टीम को भी तैनात रखा। हड़ताल के चलते ट्रेनिंग सेंटर की बसें भी नहीं चली और युवाओं को वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा डीसी पल-पल की जानकारी एसडीएम से लेते रहे।
जानकारी के अनुसार अप्रैल माह में चार दिन तक रोडवेज का चक्का जाम करने के बाद सरकार व रोडवेज यूनियनों में वार्ता को लेकर सहमति बनी थी। इस वार्ता में सरकार व यूनियनों के बीच बात पूरी तरह से सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके विरोध में रोडवेज की आठों यूनियनों के पदाधिकारियों ने 13 जून को एक दिन के लिए रोडवेज का चक्का जाम करने का ऐलान किया था। इसी के तहत दादरी रोडवेज परिसर में भी मंगलवार को बस सेवाएं पूर्णतया ठप रही। इंटक प्रधान राजेश रावलधी ने बताया कि सरकार रोडवेज कर्मचारियों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार को रोडवेज का निजीकरण करने की बजाय नई भर्ती, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना और बेड़े में बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। इससे पहले सोमवार रात 12 बजे ही यूनियनों ने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया था। हड़ताल के कारण कोई जॉब पर समय पर नहीं पहुंच सका तो कोई विवाह समारोह में देरी से शरीक हो पाया। अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए यात्री भटकते नजर आए। रेलवे स्टेशन पर आम दिन छह से सात हजार यात्री सफर करते थे लेकिन मंगलवार को इनकी संख्या करीब दस हजार दर्ज की गई। ट्रेनों के साथ निजी वाहन दिनभर से सवारियों से खचाखच भरे आए। कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से परिवहन विभाग को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा। दिनभर बसों के पहिये थमे रहने से विभाग को 14 लाख का नुकसान हुआ। एसपीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि प्रतिदिन दस लाख की इनकम दादरी डिपो में व चार लाख की इनकम लोहारू सब डिपो में होती है। रोडवेज बस में सफर करने वाले करीब 25 हजार यात्रियों को हड़ताल के चलते अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचने के लिए दिक्कत उठानी पड़ी।
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डिपो की 91 तो सब डिपो की 52 बसों के रूट प्रभावित
दादरी डिपो के बेड़े में 161 बसें हैं। इनमें से 52 बसें लोहारू सब डिपो की है। लोहारू सब डिपो व दादरी डिपो में 542 कर्मचारी हैं। इनमें चालक 204 हैं तो परिचालकों की संख्या 202 है। दादरी डिपो की 91 बसें प्रतिदिन करीब 34 हजार किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। लोहारू सब डिपो की 52 बसें प्रतिदिन 14 हजार किलोमीटर विभिन्न रूटों पर दौड़ती हैं। लोहारू सब डिपो की बसों में प्रतिदिन करीब सात से आठ हजार यात्री सफर करते हैं। दादरी डिपो में प्रतिदिन यात्रियों की संख्या 16 से 17 हजार के बीच रहती है। दादरी डिपो परिसर के बेड़े में शामिल बसें प्रतिदिन 34 हजार किलोमीटर का सफर तय करती हैं। मंगलवार को चक्का जाम रहने से चंडीगढ़ की 11, जयपुर की 10, नारनौल की 22, दिल्ली-झज्जर की 20, रोहतक की 50, लोहारू-बाढड़ा की 20 ट्रिप, भिवानी की 30, कनीना की 28, कोसली की 16 व बेरी की 14 ट्रिप प्रभावित हुई।
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--बहन की शादी पक्की करने के लिए तोशाम जाना था लेकिन रोडवेज बस चल नहीं रही है। प्राइवेट वाहनों में बैठने के लिए भी जगह नहीं है। लड़का देखने के लिए समय पर पहुंचना बहुत जरूरी है। हड़ताल ने तो सारा प्रोग्राम खराब कर दिया।
नरेंद्र, यात्री
-- कॉलेज में बच्चों को पढ़ने के लिए नारनौल जाना होता है। रोडवेज के पहिए जाम है। निजी वाहन चालक निर्धारित किराये से ज्यादा वसूल कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन वाहनों में बाहर लटककर सफर करना पड़ता है, जोकि खतरनाक साबित हो सकता है।
सत्यप्रकाश, यात्री
-- छोटी बहन के लिए लड़का दिखने के लिए भिवानी जाना था। रोडवेज की हड़ताल है। प्राइवेट वाहनों में भी बैठने की जगह मिलती मुश्किल नजर आ रही है। रोडवेज कर्मचारियों व सरकार की खींचातानी में परेशानियां जनता को उठानी पड़ रही है।
रोडवेज हड़ताल ने तो परेशानी बढ़ा दी।
संदीप, यात्री
--वनारस से किसी काम के लिए रात को दादरी आया था लेकिन सुबह से रोडवेज बस नहीं चल रही है। मुझे हड़ताल का पता नहीं था वरना मैं घर से चलता ही नहीं। सुबह से यहां खड़े चार घंटे हो गए लेकिन वापसी के लिए वाहन नहीं मिल रहा।
गुरेलाल, यात्री
वर्जन:
हड़ताल के चलते बसें डिपो से नहीं चल पाई। विभाग को करीब 14 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। वैसे कर्मचारियों की हड़ताल शांतिपूर्वक रही। निजी वाहनों व ट्रेनों का सहारा यात्रियों ने लिया। मेरे पास जो भी आगामी निर्देश आएंगे उसी के अनुरूप मैं कार्रवाई करूंगा।
आरएस पूनिया, जीएम रोडवेज