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जतिन नांदल
Updated Mon, 27 Aug 2018 03:04 AM IST
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फोटो : जतिन नांदल, कुराश खिलाड़ी, नीली जर्शी में
कामनवैल्थ में पदक जीतकर लौटने पर होने वाले सम्मान से प्रेरित होकर जतिन नांदल ने सीखा कुराश खेलना
- पांच साल पहले शहर के छोटूराम स्टेडियम में शुरू किया कुराश सीखना, अब एशियन गेम्स में भारत का कर रहें हैं प्रतिनिधित्व
- शनिवार रात को भारतीय टीम के साथ जकार्ता के लिए हुए रवाना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
इंडोनेशिया में चल रहे 18वें एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन कर हर रोज पदक जीतकर भारत को पदक तालिका में बढ़त दिला रहे हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाने की जिम्मेवारी अब कुराश खिलाड़ी भी लेंगे। भारतीय कुराश का हिस्सा जतिन नांदल से भी एशियन खेलों में 66 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक की उम्मीद उनके परिवार के साथ साथ उनके गांव के लोगों को भी है। जिले के बोहर क्षेत्र मेें रहने वाले जतिन नांदल ने बताया कि वे शहर के छोटूराम स्टेडियम में सोमबीर पावरिया कोच के पास अभ्यास करते हैं। जतिन ने बताया कि वर्ष 2010 में सिंगापुर में हुई कामनवेल्थ चैंपियनशिप में गांव के ही जूडो खिलाड़ी मंजीत नांदल ने पदक जीता था। चैंपियनशिप के बाद उनके गांाव आने पर ग्रामीणों द्वारा उनका स्वागत देखकर ही जतिन खेल के प्रति प्रेरित हुआ। तब से ही मैने जूडो खेलने का विचार कर लिया था। उसके बाद छोटूराम स्टेडियम में जाकर उन्होंने जूडो खेलना शुरू कर दिया। हालांकि बाद में जतिन ने कुराश खेलना शुरू कर दिया। जतिन ने बताया कि उनके परिवार में उस समय उनका भाई भी कुश्ती करता था, हालांकि वो अखाड़ों वाली कुश्ती करता था जो दंगलों तक ही सीमित थी। जतिन ने बताया कि उनके पिता राजबीर सिंह गांव में ही चार एकड़ की खेती करते हैं।
ये रही हैं उपलब्धियां
जतिन नांदल ने बताया कि खेल शुरू करने के कुछ समय बाद से ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के खेलों में पदक जीतने शुरू कर दिए थे। बाद में जतिन के प्रदर्शन के आधार पर ही उनका चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंटों में होने लगा था। जतिन ने बताया कि उसने वर्ष 2016-17 सीनियर नेशनल गेम्स के 73 किलो भारवर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके साथ साथ उन्होंने 2017-18 में नेशनल गेम्स में 66 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। जतिन ने बताया कि उसने 10वीं एशियन चैंपियनशिप में भी देश का प्रतिनिधित्व किया था, हालांकि उस चैंपियनशिप में वे कोई पदक हासिल नहीं कर सके।
कामनवैल्थ में पदक जीतकर लौटने पर होने वाले सम्मान से प्रेरित होकर जतिन नांदल ने सीखा कुराश खेलना
- पांच साल पहले शहर के छोटूराम स्टेडियम में शुरू किया कुराश सीखना, अब एशियन गेम्स में भारत का कर रहें हैं प्रतिनिधित्व
- शनिवार रात को भारतीय टीम के साथ जकार्ता के लिए हुए रवाना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
इंडोनेशिया में चल रहे 18वें एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन कर हर रोज पदक जीतकर भारत को पदक तालिका में बढ़त दिला रहे हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाने की जिम्मेवारी अब कुराश खिलाड़ी भी लेंगे। भारतीय कुराश का हिस्सा जतिन नांदल से भी एशियन खेलों में 66 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक की उम्मीद उनके परिवार के साथ साथ उनके गांव के लोगों को भी है। जिले के बोहर क्षेत्र मेें रहने वाले जतिन नांदल ने बताया कि वे शहर के छोटूराम स्टेडियम में सोमबीर पावरिया कोच के पास अभ्यास करते हैं। जतिन ने बताया कि वर्ष 2010 में सिंगापुर में हुई कामनवेल्थ चैंपियनशिप में गांव के ही जूडो खिलाड़ी मंजीत नांदल ने पदक जीता था। चैंपियनशिप के बाद उनके गांाव आने पर ग्रामीणों द्वारा उनका स्वागत देखकर ही जतिन खेल के प्रति प्रेरित हुआ। तब से ही मैने जूडो खेलने का विचार कर लिया था। उसके बाद छोटूराम स्टेडियम में जाकर उन्होंने जूडो खेलना शुरू कर दिया। हालांकि बाद में जतिन ने कुराश खेलना शुरू कर दिया। जतिन ने बताया कि उनके परिवार में उस समय उनका भाई भी कुश्ती करता था, हालांकि वो अखाड़ों वाली कुश्ती करता था जो दंगलों तक ही सीमित थी। जतिन ने बताया कि उनके पिता राजबीर सिंह गांव में ही चार एकड़ की खेती करते हैं।
ये रही हैं उपलब्धियां
जतिन नांदल ने बताया कि खेल शुरू करने के कुछ समय बाद से ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के खेलों में पदक जीतने शुरू कर दिए थे। बाद में जतिन के प्रदर्शन के आधार पर ही उनका चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंटों में होने लगा था। जतिन ने बताया कि उसने वर्ष 2016-17 सीनियर नेशनल गेम्स के 73 किलो भारवर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके साथ साथ उन्होंने 2017-18 में नेशनल गेम्स में 66 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। जतिन ने बताया कि उसने 10वीं एशियन चैंपियनशिप में भी देश का प्रतिनिधित्व किया था, हालांकि उस चैंपियनशिप में वे कोई पदक हासिल नहीं कर सके।
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