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ट्रामा सेंटर पहुंचे सहकारिता मंत्री
Updated Tue, 09 Jan 2018 02:33 AM IST
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कर्मचारी ने ट्रामा में स्टाफ की कमी के चलते वर्कलोड होने व अवकाश नहीं मिलने की रखी समस्या
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
मंत्रीजी। मेरी एक समस्या है। मुझे छुट्टी नहीं मिल रही हैं। मैं लगातार काम कर रहा हूं। यह अपील पीजीआई के रिसेप्शनिष्ट नरेश कुमार ने सोमवार शाम को अपैक्स ट्रॉमा सेंटर का दौरा करने पहुंचे सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के सामने रखी। मंत्री ने इस पर कोई जवाब देने के बजाय हेल्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति की ओर इशारा कर अपना पल्ला झाड़ लिया। वीसी ने भी ट्रामा सेंटर के अधिकारियों को आंखों-आंखाें में निर्देश दिए और आगे बढ़ गए। बाद में ट्रॉमा सेंटर के सीएमओ ने कर्मचारी को मंत्री से ना कहकर उनसे शिकायत करने की नसीहत देते हुए मंगलवार से पुराने रिसेप्शन पर ड्यूटी पर जाने के निर्देश दिए।
दरअसल, पीजीआई में एक जनवरी से ट्रॉमा सेंटर शुरू किया गया है। यहां के लिए कुछ स्टाफ भर्ती किया गया है। जबकि कुछ पीजीआई से लिया गया है। इसमें रिसेप्शनिस्ट, बैरर, कंप्यूटर ऑपरेटर व अन्य कर्मचारी शामिल हैं। ट्रामा सेंटर में पिछले कुछ दिनों से एक ही रिसेप्शनिष्ट तैनात रहा। यह भी रोजाना सुबह सात से शाम सात बजे तक ड्यूटी पर रहा। जबकि यहां जरूरत सात रिसेप्शनिष्टों की है। इस कारण संस्थान के यहां तैनात एकमात्र रिसेप्शनिष्ट को साप्ताहिक अवकाश तक का समय नहीं मिल पा रहा है। इस बारे में अधिकारियों से कहा भी, मगर किसी ने सुनवाई नहीं की। नतीजतन सोमवार को सहकारिता मंत्री ट्रामा सेंटर का दौरा करने पहुंचे तो यह उनके सामने पेश हो गया और राहत की उम्मीद के साथ अपनी समस्या उनके सामने रखी। इसे सहकारिता मंत्री ने नजरअंदाज कर दिया।
डेढ़ घंटे ट्रॉमा में रहे सहकारिता मंत्री
सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर सोमवार शाम को पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अपैक्स ट्रॉमा सेंटर का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। वे यहां करीब डेढ घंटे रहे। इस दौरान हर चीज का गहनता से निरीक्षण किया। यही नहीं उन्होंने मरीजों से बातचीत कर सुविधा के बारे में जानकारी ली। उन्होंने सेंटर में इलाज व दवाओं के बारे में लोगों से पूछा। मंत्री ने यहां उच्च गुणवत्ता परक इलाज उपलब्ध कराने का दावा किया। उन्होंने चिकित्सकों व स्टाफ से भी उनकी समस्याएं जानी और मरीजों का पूरी लगन से इलाज करने की अपील की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आईसीयू, ओटी व वार्डों की जांच की। उन्होंने कहा कि जल्दी ही मदर एंड चाइल्ड हास्पिटल भी शुरू होने जा रहा है। इस मौके पर कुलपति डॉ ओपी कालरा, कुलसचिव डॉ एचके अग्रवाल, डीन डॉ एमसी गुप्ता, आईसीयू इंचार्ज डॉ प्रशांत कुमार, ओटी इंचार्ज डॉ संजय जौहर, डीएमएस डॉ संदीप व अन्य लोग उपस्थित रहे।
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मंत्री के आने से पहले भिड़े कर्मचारी
पीजीआई कैंपस में सहकारिता मंत्री के पहुंचने से पहले संस्थान के दो कर्मचारी आपस भिड़ गए। वार्ड नंबर 16 में सुभाष नगर निवासी गार्ड रितेश को संस्थान के बिजली कर्मचारी ने पीट दिया। थप्पड़ लगने के कारण उसके मुंह से खून बह निकला। यह मामला अधिकारियों के पास पहुंचा। मामले के समाधान को लेकर उन्हें ट्रॉमा सेंटर बुलाया गया। यहां गार्ड ने कर्मचारी पर अभद्रता करने व मारपीट करने का आरोप लगाया। देर शाम तक इस मामले में पुलिस को शिकायत देने की कार्रवाई चल रही है।
ट्रॉमा में स्टाफ शिफ्ट होने से चरमराई ओपीडी की व्यवस्था
हेल्थ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ट्रॉमा सेंटर चालू करने के लिए काफी संख्या में कर्मचारी पीजीआई व ओपीडी से लिया है। ओपीडी में अनुबंध के आधार पर तैनात कर्मचारियों को ट्रॉमा में भेजने के कारण यहां की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। मरीजों को कार्ड बनवाने के लिए ही घंटों कतार में खड़े रहना पड़ा। यहीं नहीं डॉक्टर से जांच के बाद दवा या टेस्ट कराने की पर्ची लेकर लोग औषधालय या लैब पर पहुंचे तो यहां सन्नाटा पसरा मिला। यहां कर्मचारी नहीं होने के चलते मरीजों को मायूस लौटना पड़ा। उन्हें न तो दवा मिली और न ही जांच हुई। ऐसे में उन्हें राहत के लिए दोबारा आना होगा या फिर निजी चिकित्सकों की शरण लेनी होगी। ओपीडी में कार्ड बनाने के लिए कम से कम दो-दो कर्मचारियों की सभी काउंटरों पर जरूरत है। जबकि यहां एक ही कर्मचारी बचा है। यही नहीं ट्रामा में कर्मचारियों के शिफ्ट होने से कंप्यूटर सिस्टम भी बंद हो गए हैं। यहां काम मैनुअली पुराने तरीके से हो रहा है। इससे काम निपटाने में समय ज्यादा लग रहा है।
आधे घंटे की हड़ताल के बाद माने गार्ड
पीजीआई के गार्ड सोमवार सुबह वेतन व भत्तों को लेकर हड़ताल पर चले गए। इन कर्मचारियों ने सुबह काम बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। इसकी सूचना मिलने के बाद चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ईश्वर सिंह मौके पर पहुंचे। गार्डों ने कहा कि उन्हें न तो पूरा डीसी रेट मिल रहा है और न ही बकाया एरियर मिला है। इस बारे में वे कई बार अधिकारियों से कह चुके हैं। इस पर सीएसओ ने उनकी समस्या का शीघ्र समाधान कराने का आश्वासन देते हुए हड़ताल समाप्त करने की अपील की। इस पर गार्डों ने करीब आधे घंटे बाद हड़ताल समाप्त कर दी।
आज होगा डीजीएमओ के लिए साक्षात्कार
ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था संभालने के लिए डीजीएमओ (जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर) की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए यहां आठ पद स्वीकृत किए गए हैं। इन पदों पर नियुक्ति के लिए प्रक्रिया जारी है। इसी कड़ी में मंगलवार को साक्षात्कार रखा गया है। यहां चयन के बाद ही ट्रामा को डीजीएमओ मिलेंगे। इस चयन प्रक्रिया के पूरा होते ही इमरजेंसी में सीएमओ की कमी गहरा जाएगी। यहां पहले ही स्टाफ की कमी है। यही नहीं यहीं के स्टाफ ने ही डीजीएमओ के लिए आवेदन किया है।
तबीयत खराब होने के कारण ओपीडी में दोपहर करीब 12 बजे पहुंचा। यहां कार्ड बनवाने के लिए पौने घंटे लाइन में खड़े रहना पडा। इसके बाद कार्ड पर ओपीडी नंबर लगवाने के लिए कतारबद्ध रहा। दोपहर करीब दो बजे बाद डॉक्टर के पास पहुंच पाया। यहां डॉक्टर ने टेस्ट कराने की सलाह दी है। इसलिए लैब जा रहा हूं। पौने तीन बज गए हैं। सब जा चुके हैं। पता नहीं कैसे इलाज मिलेगा। टेस्ट के बाद ही डॉक्टर दवा लिखेगा।
विजय कुमार, सिंचाई विभाग कॉलोनी।
पौने तीन बजे आया डॉक्टर के पास नंबर
इलाज के लिए गांव से यहां आया था। सुबह साढ़े दस बजे पहले कार्ड बनवाने के लिए लाइन में खड़ा रहा। फिर डॉक्टर के कमरे के बाहर। अब पौने तीन बजे नंबर आया है। यहां की लैब और दवा खिड़की बंद हो गई है। इसलिए कुछ नहीं मिला। अब फिर आना होगा।
सुमित, बलियाना।
दवा मिली न टेस्ट हुए, सब बाहर से कराए
पीजीआई में अच्छे इलाज के लिए आए हैं। यहां सुबह दस बजे पहुंचे थे। पिछली बार की रिपोर्ट सोमवार दोपहर करीब एक बजे मिली। अब तीन बजने को है। सब जा चुके हैं। दवा बाजार से खरीदनी पड़ रही है। पिछली बार तीन सौ रुपए की पांच दिन की दवा खरीदी थी। अब टेस्ट भी बाहर से ही कराने पड़ेंगे।
शिवानी, झज्जर।
गले व सिर में दर्द है। इसके इलाज के लिए साढ़े नौ बजे ओपीडी में आए थे। यहां भीड़ ज्यादा थी। नंबर दोपहर तीन बजे आया। यहां न दवा मिली ना कोई जांच हुई। डॉक्टर ने इसके बगैर दवा लिखने से इनकार किया है। पिछली बार भी यही हुआ था। इस कारण बगैर इलाज लौटना पड़ा।
सुरेश, रानीला।
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
मंत्रीजी। मेरी एक समस्या है। मुझे छुट्टी नहीं मिल रही हैं। मैं लगातार काम कर रहा हूं। यह अपील पीजीआई के रिसेप्शनिष्ट नरेश कुमार ने सोमवार शाम को अपैक्स ट्रॉमा सेंटर का दौरा करने पहुंचे सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर के सामने रखी। मंत्री ने इस पर कोई जवाब देने के बजाय हेल्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति की ओर इशारा कर अपना पल्ला झाड़ लिया। वीसी ने भी ट्रामा सेंटर के अधिकारियों को आंखों-आंखाें में निर्देश दिए और आगे बढ़ गए। बाद में ट्रॉमा सेंटर के सीएमओ ने कर्मचारी को मंत्री से ना कहकर उनसे शिकायत करने की नसीहत देते हुए मंगलवार से पुराने रिसेप्शन पर ड्यूटी पर जाने के निर्देश दिए।
दरअसल, पीजीआई में एक जनवरी से ट्रॉमा सेंटर शुरू किया गया है। यहां के लिए कुछ स्टाफ भर्ती किया गया है। जबकि कुछ पीजीआई से लिया गया है। इसमें रिसेप्शनिस्ट, बैरर, कंप्यूटर ऑपरेटर व अन्य कर्मचारी शामिल हैं। ट्रामा सेंटर में पिछले कुछ दिनों से एक ही रिसेप्शनिष्ट तैनात रहा। यह भी रोजाना सुबह सात से शाम सात बजे तक ड्यूटी पर रहा। जबकि यहां जरूरत सात रिसेप्शनिष्टों की है। इस कारण संस्थान के यहां तैनात एकमात्र रिसेप्शनिष्ट को साप्ताहिक अवकाश तक का समय नहीं मिल पा रहा है। इस बारे में अधिकारियों से कहा भी, मगर किसी ने सुनवाई नहीं की। नतीजतन सोमवार को सहकारिता मंत्री ट्रामा सेंटर का दौरा करने पहुंचे तो यह उनके सामने पेश हो गया और राहत की उम्मीद के साथ अपनी समस्या उनके सामने रखी। इसे सहकारिता मंत्री ने नजरअंदाज कर दिया।
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डेढ़ घंटे ट्रॉमा में रहे सहकारिता मंत्री
सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर सोमवार शाम को पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अपैक्स ट्रॉमा सेंटर का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। वे यहां करीब डेढ घंटे रहे। इस दौरान हर चीज का गहनता से निरीक्षण किया। यही नहीं उन्होंने मरीजों से बातचीत कर सुविधा के बारे में जानकारी ली। उन्होंने सेंटर में इलाज व दवाओं के बारे में लोगों से पूछा। मंत्री ने यहां उच्च गुणवत्ता परक इलाज उपलब्ध कराने का दावा किया। उन्होंने चिकित्सकों व स्टाफ से भी उनकी समस्याएं जानी और मरीजों का पूरी लगन से इलाज करने की अपील की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आईसीयू, ओटी व वार्डों की जांच की। उन्होंने कहा कि जल्दी ही मदर एंड चाइल्ड हास्पिटल भी शुरू होने जा रहा है। इस मौके पर कुलपति डॉ ओपी कालरा, कुलसचिव डॉ एचके अग्रवाल, डीन डॉ एमसी गुप्ता, आईसीयू इंचार्ज डॉ प्रशांत कुमार, ओटी इंचार्ज डॉ संजय जौहर, डीएमएस डॉ संदीप व अन्य लोग उपस्थित रहे।
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मंत्री के आने से पहले भिड़े कर्मचारी
पीजीआई कैंपस में सहकारिता मंत्री के पहुंचने से पहले संस्थान के दो कर्मचारी आपस भिड़ गए। वार्ड नंबर 16 में सुभाष नगर निवासी गार्ड रितेश को संस्थान के बिजली कर्मचारी ने पीट दिया। थप्पड़ लगने के कारण उसके मुंह से खून बह निकला। यह मामला अधिकारियों के पास पहुंचा। मामले के समाधान को लेकर उन्हें ट्रॉमा सेंटर बुलाया गया। यहां गार्ड ने कर्मचारी पर अभद्रता करने व मारपीट करने का आरोप लगाया। देर शाम तक इस मामले में पुलिस को शिकायत देने की कार्रवाई चल रही है।
ट्रॉमा में स्टाफ शिफ्ट होने से चरमराई ओपीडी की व्यवस्था
हेल्थ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ट्रॉमा सेंटर चालू करने के लिए काफी संख्या में कर्मचारी पीजीआई व ओपीडी से लिया है। ओपीडी में अनुबंध के आधार पर तैनात कर्मचारियों को ट्रॉमा में भेजने के कारण यहां की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। मरीजों को कार्ड बनवाने के लिए ही घंटों कतार में खड़े रहना पड़ा। यहीं नहीं डॉक्टर से जांच के बाद दवा या टेस्ट कराने की पर्ची लेकर लोग औषधालय या लैब पर पहुंचे तो यहां सन्नाटा पसरा मिला। यहां कर्मचारी नहीं होने के चलते मरीजों को मायूस लौटना पड़ा। उन्हें न तो दवा मिली और न ही जांच हुई। ऐसे में उन्हें राहत के लिए दोबारा आना होगा या फिर निजी चिकित्सकों की शरण लेनी होगी। ओपीडी में कार्ड बनाने के लिए कम से कम दो-दो कर्मचारियों की सभी काउंटरों पर जरूरत है। जबकि यहां एक ही कर्मचारी बचा है। यही नहीं ट्रामा में कर्मचारियों के शिफ्ट होने से कंप्यूटर सिस्टम भी बंद हो गए हैं। यहां काम मैनुअली पुराने तरीके से हो रहा है। इससे काम निपटाने में समय ज्यादा लग रहा है।
आधे घंटे की हड़ताल के बाद माने गार्ड
पीजीआई के गार्ड सोमवार सुबह वेतन व भत्तों को लेकर हड़ताल पर चले गए। इन कर्मचारियों ने सुबह काम बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। इसकी सूचना मिलने के बाद चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ईश्वर सिंह मौके पर पहुंचे। गार्डों ने कहा कि उन्हें न तो पूरा डीसी रेट मिल रहा है और न ही बकाया एरियर मिला है। इस बारे में वे कई बार अधिकारियों से कह चुके हैं। इस पर सीएसओ ने उनकी समस्या का शीघ्र समाधान कराने का आश्वासन देते हुए हड़ताल समाप्त करने की अपील की। इस पर गार्डों ने करीब आधे घंटे बाद हड़ताल समाप्त कर दी।
आज होगा डीजीएमओ के लिए साक्षात्कार
ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था संभालने के लिए डीजीएमओ (जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर) की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए यहां आठ पद स्वीकृत किए गए हैं। इन पदों पर नियुक्ति के लिए प्रक्रिया जारी है। इसी कड़ी में मंगलवार को साक्षात्कार रखा गया है। यहां चयन के बाद ही ट्रामा को डीजीएमओ मिलेंगे। इस चयन प्रक्रिया के पूरा होते ही इमरजेंसी में सीएमओ की कमी गहरा जाएगी। यहां पहले ही स्टाफ की कमी है। यही नहीं यहीं के स्टाफ ने ही डीजीएमओ के लिए आवेदन किया है।
तबीयत खराब होने के कारण ओपीडी में दोपहर करीब 12 बजे पहुंचा। यहां कार्ड बनवाने के लिए पौने घंटे लाइन में खड़े रहना पडा। इसके बाद कार्ड पर ओपीडी नंबर लगवाने के लिए कतारबद्ध रहा। दोपहर करीब दो बजे बाद डॉक्टर के पास पहुंच पाया। यहां डॉक्टर ने टेस्ट कराने की सलाह दी है। इसलिए लैब जा रहा हूं। पौने तीन बज गए हैं। सब जा चुके हैं। पता नहीं कैसे इलाज मिलेगा। टेस्ट के बाद ही डॉक्टर दवा लिखेगा।
विजय कुमार, सिंचाई विभाग कॉलोनी।
पौने तीन बजे आया डॉक्टर के पास नंबर
इलाज के लिए गांव से यहां आया था। सुबह साढ़े दस बजे पहले कार्ड बनवाने के लिए लाइन में खड़ा रहा। फिर डॉक्टर के कमरे के बाहर। अब पौने तीन बजे नंबर आया है। यहां की लैब और दवा खिड़की बंद हो गई है। इसलिए कुछ नहीं मिला। अब फिर आना होगा।
सुमित, बलियाना।
दवा मिली न टेस्ट हुए, सब बाहर से कराए
पीजीआई में अच्छे इलाज के लिए आए हैं। यहां सुबह दस बजे पहुंचे थे। पिछली बार की रिपोर्ट सोमवार दोपहर करीब एक बजे मिली। अब तीन बजने को है। सब जा चुके हैं। दवा बाजार से खरीदनी पड़ रही है। पिछली बार तीन सौ रुपए की पांच दिन की दवा खरीदी थी। अब टेस्ट भी बाहर से ही कराने पड़ेंगे।
शिवानी, झज्जर।
गले व सिर में दर्द है। इसके इलाज के लिए साढ़े नौ बजे ओपीडी में आए थे। यहां भीड़ ज्यादा थी। नंबर दोपहर तीन बजे आया। यहां न दवा मिली ना कोई जांच हुई। डॉक्टर ने इसके बगैर दवा लिखने से इनकार किया है। पिछली बार भी यही हुआ था। इस कारण बगैर इलाज लौटना पड़ा।
सुरेश, रानीला।