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नई परिवहन नीति के विरोध में उतरे रोडवेज कर्मचारी
Updated Thu, 10 Aug 2017 01:48 AM IST
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नई परिवहन नीति के विरोध में फिर उतरे रोडवेज कर्मचारी
भिवानी
नई परिवहन नीति के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। इसके विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने बस स्टैंड पर दो घंटे धरना दिया और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने 13 अगस्त को परिवहन मंत्री के आवास के घेराव का भी ऐलान किया।
रोडवेज कर्मचारी बुधवार सुबह बस स्टैंड पर जमा हुए और धरने पर बैठ गए। धरने पर बैठे रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि सरकार चुनाव से पहले किए वादे और अब आंदोलन के बाद हुए फैसलों का लागू करने की बजाय वादाखिलाफी कर रही है। राज्य सचिव ईकार सिंह तथा राज्य वरिष्ठ उप प्रधान नरेन्द्र दिनोद ने आरोप है कि सरकार रोङवेज यूनियनों से सहमति का झुठा नाम लेकर रोङवेज का निजीकरण करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि रोङवेज को बचाने के लिए वो 13 अगस्त को मतलोढा गांव में परिवहन मंत्री के आवास का घेराव करेंगे और उसके बाद भी उनकी मांग नहीं मानी तो तालमेल कमेटी के फैसले पर वो कोई भी कुर्बानी देने को तैयार रहेंगे। जिला प्रधान राजकुमार दलाल ने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले अपने घोषणा पत्र में रोङवेज का निजीकरण न करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने जैसे अनेक वादे किए थे। लेकिन आज वादे पूरे तो दूर आंदोलन करने के बाद जो मांग मानी जाती हैं वो भी पूरी नहीं होती।
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नई परिवहन नीति के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। इसके विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने बस स्टैंड पर दो घंटे धरना दिया और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने 13 अगस्त को परिवहन मंत्री के आवास के घेराव का भी ऐलान किया।
रोडवेज कर्मचारी बुधवार सुबह बस स्टैंड पर जमा हुए और धरने पर बैठ गए। धरने पर बैठे रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि सरकार चुनाव से पहले किए वादे और अब आंदोलन के बाद हुए फैसलों का लागू करने की बजाय वादाखिलाफी कर रही है। राज्य सचिव ईकार सिंह तथा राज्य वरिष्ठ उप प्रधान नरेन्द्र दिनोद ने आरोप है कि सरकार रोङवेज यूनियनों से सहमति का झुठा नाम लेकर रोङवेज का निजीकरण करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि रोङवेज को बचाने के लिए वो 13 अगस्त को मतलोढा गांव में परिवहन मंत्री के आवास का घेराव करेंगे और उसके बाद भी उनकी मांग नहीं मानी तो तालमेल कमेटी के फैसले पर वो कोई भी कुर्बानी देने को तैयार रहेंगे। जिला प्रधान राजकुमार दलाल ने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले अपने घोषणा पत्र में रोङवेज का निजीकरण न करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने जैसे अनेक वादे किए थे। लेकिन आज वादे पूरे तो दूर आंदोलन करने के बाद जो मांग मानी जाती हैं वो भी पूरी नहीं होती।
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