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जिला उपभोक्ता फोरम का फैसला : कार मालिक को 9 प्रतिशत ब्याज सहित क्लेम राशि दे बीमा कंपनी
Updated Sat, 09 Jun 2018 02:52 AM IST
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उपभोक्ता फोरम का फैसला : बीमा कंपनी दे कार मालिक को 9 प्रतिशत ब्याज सहित राशि
दुघर्टना से पहले कार का बीमा व रजिस्ट्र्रेशन ट्रांसफर, फिर पहले मालिक को क्यों भेजा पत्र
- 5 हजार रुपये देना होगा हर्जाना
- पुलिस से रिटायर कमल कॉलोनी निवासी कृष्णलाल ने उपभोक्ता फोरम में दायर की थी याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जिला उपभोक्ता फोरम ने मुंबई की बीमा कंपनी को हिदायत दी कि जब दुघर्टना से पहले कार का पंजीकरण व बीमा पॉलिसी दूसरे मालिक के नाम हो गई तो पहले मालिक को आपत्तियां क्यों भेजी गई। एक माह के अंदर कार के वर्तमान मालिक कमल कॉलोनी निवासी कृष्णलाल को 9 प्रतिशत ब्याज सहित 65 हजार 41 रुपये की क्लेम राशि दे। साथ ही 5 हजार रुपये हर्जाने के तौर पर दिए जाएंगे। इसके लिए अदालत ने बीमा कंपनी को एक माह का समय दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि जब तक राशि नहीं दी जाती, तब तक ब्याज लगता रहेगा।
एडवोकेट नवीन सुहाग ने बताया कि कमल कॉलोनी निवासी कृष्णलाल पुलिस विभाग से रिटायर हैं। उन्होंने 2016 में अपने परिचित राजकुमार से कार खरीदी थी। साथ ही कार का पंजीकरण व बीमा अपने नाम करवा लिया। 21 सितंबर 2016 को कार का एक्सीडेंट हो गया। कृष्णलाल ने कार को एजेंसी के अंदर खड़ा कर दिया और जॉब कार्ड खुलवा दिया। साथ ही बीमा कंपनी के कर्मचारी ने सर्वे कर लिया। एजेंसी की तरफ से कार का 65 हजार 41 रुपये का बिल बनाया गया।
उसने कहा कि कार का कैशलेस बीमा है। ऐसे में एजेंसी भुगतान करेगी। एजेंसी ने कहा कि यह कार मालिक और बीमा कंपनी के बीच का मामला है। जब बिल का भुगतान होगा, तभी कार दी जाएगी। कार मालिक ने बीमा कंपनी से संपर्क किया, वहां मौखिक तौर पर कहा कि कार का बिल चुका कर क्लेम फार्म भर दें। कृष्णलाल कार लेकर आ गए, लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम नहीं दिया।
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आखिरकार जनवरी 2017 में कार मालिक ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। फोरम ने बीमा कंपनी व एजेंसी को नोटिस दिया। नोटिस का जवाब देेते हुए बीमा कंपनी ने कहा कि कार का एक्सीडेंट 21 सितंबर को हुआ, जबकि गैराज में इंट्री 22 सितंबर को है। दूसरा, कार के मालिक राजकुमार को पत्र जारी कर आपत्ति दर्ज करवा दी थी। इस पर मौजूदा कार मालिक कृष्णलाल के वकील ने कहा कि जब कार की बीमा पॉलिसी व कार हादसे से पहले स्थानांतरित हो चुकी है। तो पहले मालिक को नोटिस भेजने का क्या तर्क है। दूसरा, जब एजेंसी के अंदर 21 सितंबर को जॉब कार्ड खुल गया तो 22 सितंबर की गैराज में इंट्री कैसे हुई, यह कार एजेंसी की जिम्मेदारी है। दोनों पक्षों की बहस के बाद उपभोक्ता फोरम ने हिदायत दी कि बीमा कंपनी 27 अक्तूबर 2016 से अब तक 9 प्रतिशत ब्याज सहित क्लेम राशि दे। साथ में 5 हजार अलग से पीड़ित पक्ष को हर्जाना दिया जाए।
दुघर्टना से पहले कार का बीमा व रजिस्ट्र्रेशन ट्रांसफर, फिर पहले मालिक को क्यों भेजा पत्र
- 5 हजार रुपये देना होगा हर्जाना
- पुलिस से रिटायर कमल कॉलोनी निवासी कृष्णलाल ने उपभोक्ता फोरम में दायर की थी याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जिला उपभोक्ता फोरम ने मुंबई की बीमा कंपनी को हिदायत दी कि जब दुघर्टना से पहले कार का पंजीकरण व बीमा पॉलिसी दूसरे मालिक के नाम हो गई तो पहले मालिक को आपत्तियां क्यों भेजी गई। एक माह के अंदर कार के वर्तमान मालिक कमल कॉलोनी निवासी कृष्णलाल को 9 प्रतिशत ब्याज सहित 65 हजार 41 रुपये की क्लेम राशि दे। साथ ही 5 हजार रुपये हर्जाने के तौर पर दिए जाएंगे। इसके लिए अदालत ने बीमा कंपनी को एक माह का समय दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि जब तक राशि नहीं दी जाती, तब तक ब्याज लगता रहेगा।
एडवोकेट नवीन सुहाग ने बताया कि कमल कॉलोनी निवासी कृष्णलाल पुलिस विभाग से रिटायर हैं। उन्होंने 2016 में अपने परिचित राजकुमार से कार खरीदी थी। साथ ही कार का पंजीकरण व बीमा अपने नाम करवा लिया। 21 सितंबर 2016 को कार का एक्सीडेंट हो गया। कृष्णलाल ने कार को एजेंसी के अंदर खड़ा कर दिया और जॉब कार्ड खुलवा दिया। साथ ही बीमा कंपनी के कर्मचारी ने सर्वे कर लिया। एजेंसी की तरफ से कार का 65 हजार 41 रुपये का बिल बनाया गया।
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उसने कहा कि कार का कैशलेस बीमा है। ऐसे में एजेंसी भुगतान करेगी। एजेंसी ने कहा कि यह कार मालिक और बीमा कंपनी के बीच का मामला है। जब बिल का भुगतान होगा, तभी कार दी जाएगी। कार मालिक ने बीमा कंपनी से संपर्क किया, वहां मौखिक तौर पर कहा कि कार का बिल चुका कर क्लेम फार्म भर दें। कृष्णलाल कार लेकर आ गए, लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम नहीं दिया।
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आखिरकार जनवरी 2017 में कार मालिक ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। फोरम ने बीमा कंपनी व एजेंसी को नोटिस दिया। नोटिस का जवाब देेते हुए बीमा कंपनी ने कहा कि कार का एक्सीडेंट 21 सितंबर को हुआ, जबकि गैराज में इंट्री 22 सितंबर को है। दूसरा, कार के मालिक राजकुमार को पत्र जारी कर आपत्ति दर्ज करवा दी थी। इस पर मौजूदा कार मालिक कृष्णलाल के वकील ने कहा कि जब कार की बीमा पॉलिसी व कार हादसे से पहले स्थानांतरित हो चुकी है। तो पहले मालिक को नोटिस भेजने का क्या तर्क है। दूसरा, जब एजेंसी के अंदर 21 सितंबर को जॉब कार्ड खुल गया तो 22 सितंबर की गैराज में इंट्री कैसे हुई, यह कार एजेंसी की जिम्मेदारी है। दोनों पक्षों की बहस के बाद उपभोक्ता फोरम ने हिदायत दी कि बीमा कंपनी 27 अक्तूबर 2016 से अब तक 9 प्रतिशत ब्याज सहित क्लेम राशि दे। साथ में 5 हजार अलग से पीड़ित पक्ष को हर्जाना दिया जाए।