फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   एमडीयू विधि विभाग के सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर, काउंसिल को शुल्क जमा कराने के बाद भी नहीं मिली मान्यता

एमडीयू विधि विभाग के सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर, काउंसिल को शुल्क जमा कराने के बाद भी नहीं मिली मान्यता

Wed, 10 Jan 2018 02:17 AM IST
Updated Wed, 10 Jan 2018 02:17 AM IST
विज्ञापन
एमडीयू विधि विभाग के सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर, काउंसिल को शुल्क जमा कराने के बाद भी नहीं मिली मान्यता
एलएलबी तीन व पांच वर्षीय कोर्स को मान्यता नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को दिया जा रहा है प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन
विज्ञापन

बार काउंसिल ऑफ इंडिया को देनी है अनुमति, कमियां दूर करने का विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
एमडीयू के विधि विभाग के सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। कैंपस में तीन व पांच साल पढ़ाई करने के बाद मिलने वाली एलएलबी डिग्री को मान्यता ही नहीं है। इस कारण विद्यार्थी परेशान हैं। विवि प्रशासन बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास मान्यता संबंधी दस्तावेजों के साथ शुल्क भी जमा करा चुका है। इसके बावजूद मान्यता का मामला लटका हुआ है। हालांकि विवि प्रशासन कोर्स संबंधी सभी तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहा है।
एलएलबी डिग्री की मान्यता पिछले करीब एक साल से सवालों में घेरे में है। बीसीआई (बार काउंसिल ऑफ इंडिया) मान्यता को लेकर करीब साल भर पहले इंस्पेक्शन कर चुकी है। इस दौरान विधि विभाग में अनेक खामियां मिली। काउंसिल ने कमियां गिनवाते हुए उन्हें दूर करने की सलाह दी। यही नहीं काउंसिल को फीस भी जमा नहीं कराई गई थी। इसके चलते एलएलबी कोर्स की मान्यता रद्द कर दी गई। इस पर विद्यार्थियों ने हंगामा किया तो विवि प्रशासन ने आनन फानन में फीस जमा करा दी। इसके बाद से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले को लेकर अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
विज्ञापन

विद्यार्थियों के लिए न परे क्लास रूम न मूट कोर्ट
विवि के विधि विभाग में बीसीआई की टीम ने ढेरों खामियां गिनाई थी। इन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है। विभाग में न तो विद्यार्थियों के लिए पूरे क्लास रूम हैं और न ही मूट कोर्ट। इसके अलावा लड़कों व लड़कियों का कॉमन रूम, स्मार्ट क्लास रूम, कंप्यूटर लैब, प्रिंटर, फोटोस्टेट मशीन नहीं है। यहां लॉ जर्नल्स भी अपर्याप्त हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

विभाग में जरूरत 23 कमरों की, हैं 18
विधि विभाग के तीन मंजिला भवन में करीब 21 कमरे हैं। इनमें से 18 कमरों में ही कक्षा लगती है। जबकि यहां विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से 23 कमरों जरूरत है। विभिाग के एक कमरे में वाईफाई सिस्टम लगा है। एक कमरा कान्फ्रेंस रूम व एक कमरा मूट कोर्ट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में यहां और कमरों की जरूरत है। बीसीआई के नॉर्म्स नहीं हैं पूरे
इनसो प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल का कहना है कि विभाग के पास एलएलबी कोर्स कराने की मान्यता नहीं है। विभाग बीसीआई के नॉर्म्स पूरे नहीं कर रहा है। इसलिए मान्यता का मामला अटका हुआ है।

पर्याप्त मात्रा में किताबें उपलब्ध करा दी
विधि की मान्यता संबंधी कोई मामला नहीं है। काउंसिल ने अपना दौरा करने के बाद रिपोर्ट देरी से जारी की। इसमें बताई गई कमियों को दूर कर दिया गया है। मूट कोर्ट बनाने के अलावा, किताबें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दी गई हैं। सेक्शन कम करने के साथ ही फीस भी जमा करा दी है। विवि को चार लाख रुपये जमा कराने का पत्र मिला था। अब काउंसिल को अनुमति देनी है। इसके लिए उनकी बैठक में फैसला होगा।
- डॉ. एएस दलाल, एचाओडी, विधि विभाग, एमडीयू।
ये हैं विधि विभाग की सीटों का ब्यौरा
- 80 सीटें तीन वर्षीय कोर्स में।
- 160 सीटें पांच वर्षीय कोर्स में।
- 30 सीटें एलएलएम कोर्स में।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed