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एमडीयू की एमपीएड व बीपीएड डिग्री को मान्यता ही नहीं, 1100 विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर
Updated Tue, 17 Jul 2018 02:56 AM IST
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एमडीयू की एमपीएड और बीपीएड डिग्री को मान्यता नहीं, 1100 विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर
- डिग्री की मान्यता नहीं होने के चलते हरियाणा से बाहर के राज्यों में सरकारी नौकरी नहीं कर पा रहे हैं एमडीयू के विद्यार्थी
- डिग्री की मान्यता को लेकर परेशान विद्यार्थियों ने शारीरिक शिक्षा विभाग पर ताला लगाकर दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नेक एक्रिडेशन में ए ग्रेड हासिल एमडीयू से एमपीएड व बीपीएड की डिग्री लेने वाले 1100 से अधिक विद्यार्थी परेशान हैं। इन डिग्रियों को मान्यता नहीं होने के कारण यहां से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हरियाणा से बाहर के राज्यों में सरकारी नौकरी नहीं मिल रही है। चयन प्रक्रिया की हर बाधा पार करने के बाद दस्तावेज जांच में डिग्री को मान्यता नहीं होने के कारण उन्हें फिर से बेरोजगारों की कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। इससे आहत विद्यार्थियों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन करते हुए विभाग पर ताला लगा दिया। यही नहीं रोष स्वरूप विभाग के बाहर धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना है एमडीयू को नेक से ए ग्रेड हासिल है। जबकि विवि की डिग्री को मान्यता ही नहीं है। पढ़ाई पर हजारों रुपये खर्च कर विद्यार्थी डिग्री हासिल कर रहा है। यह डिग्री उसे रोजगार नहीं दिला पा रही है। देश के दूसरे प्रदेशों में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच खुद को साबित करते हुए विद्यार्थी नौकरी की दौड़ में शामिल होते हैं। इस दौड़ में सबसे आगे पहुंचकर भी विद्यार्थी पीछे रह जाते हैं। चयनकर्ता अंतिम चरण में दस्तावेजों की जांच के दौरान डिग्री को फेक बताकर उम्मीदवार को घर भेज देते हैं। एमडीयू प्रशासन यह सब जानता है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। विवि सेल्फ फाइनेंस कोर्स के जरिए वर्षों से विद्यार्थियों को ठने का काम किया जा रहा है। यहां डिग्री के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। विभाग के एचओडी व रजिस्ट्रार से डिग्री की मान्यता दिलाने की अपील की गई है। इस मौके पर शहीद भगत सिंह मोर्चा से प्रदीप, प्रवेश नांदल, सचिन, दीपक श्योराण, सुमित, रवि, रवीश अहलावत, मोनू दिमाना समेत अनेक विद्यार्थी मौजूद रहे।
44 हजार रुपये बीपीएड की फीस
एमडीयू वर्ष 1992 में एमपीएड कोर्स शुरू हुआ था। इसकी 30 सीटें हैं। अब पिछले करीब आठ वर्षों से बीपीएड कोर्स भी चल रहा है। इसमें 50 सीटें हैं। एमपीएड के लिए करीब आठ हजार रुपये व बीपीएड के लिए 44 हजार रुपये फीस है। इतना शुल्क देने व कड़ी मेहनत करने के बाद मिलने वाली डिग्री काम नहीं आ रही है। इसीलिए विद्यार्थियों में रोष है। इस बारे में रजिस्ट्रार से बात हुई है। उन्हें डिग्री को मान्यता नहीं मिलने या कार्रवाई नहीं होने तक विभाग का ताला खोलने व धरना नहीं हटाने की चेतावनी दी है।
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- प्रदीप, अध्यक्ष, शहीद भगत सिंह मोर्चा, एमडीयू।
22 उम्मीदवार को नौकरी से अयोग्य घोषित
दिल्ली में पिछले दिनों डीएसएसबी ने रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके लिए विवि के शारीरिक शिक्षा विभाग से एमपीएड व बीपीएड करने वाले विद्यार्थियों ने भी आवेदन किया। भर्ती प्रक्रिया की आधे से ज्यादा कार्रवाई पूरी होने के बाद अब विवि के 22 उम्मीदवारों को आयोग्य घोषित कर दिया गया है। डीएसएसबी ने उनका परिणाम रोक दिया है। इस कारण इन उम्मीदवारों का भविष्य बनने से पहले की बिगड़ गया है।
- सुमित, प्रवक्ता, शहीद भगत सिंह मोर्चा, एमडीयू।
वर्जन :
विवि में एमपीएड और बीपीएस कोर्स कराया जा रहा है। इस कोर्स की मान्यता के लिए फीस और अन्य दस्तावेज जमा करा दिए गए थे। बाद में किन्हीं कारणों से डिग्री की मान्यता को लेकर प्रयास नहीं हुआ। इस कारण परेशानी खड़ी हुई है। इसका शीघ्र समाधान किया जाएगा। विभाग ने मान्यता संबंधी प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस बारे में मुख्यालय में सुबह ही बात हुई है। जल्दी ही डिग्री को मान्यता मिल जाएगी।
- डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, कुलसचिव, एमडीयू।
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एमडीयू की एमपीएड और बीपीएड डिग्री को मान्यता नहीं, 1100 विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर
- डिग्री की मान्यता नहीं होने के चलते हरियाणा से बाहर के राज्यों में सरकारी नौकरी नहीं कर पा रहे हैं एमडीयू के विद्यार्थी
- डिग्री की मान्यता को लेकर परेशान विद्यार्थियों ने शारीरिक शिक्षा विभाग पर ताला लगाकर दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नेक एक्रिडेशन में ए ग्रेड हासिल एमडीयू से एमपीएड व बीपीएड की डिग्री लेने वाले 1100 से अधिक विद्यार्थी परेशान हैं। इन डिग्रियों को मान्यता नहीं होने के कारण यहां से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हरियाणा से बाहर के राज्यों में सरकारी नौकरी नहीं मिल रही है। चयन प्रक्रिया की हर बाधा पार करने के बाद दस्तावेज जांच में डिग्री को मान्यता नहीं होने के कारण उन्हें फिर से बेरोजगारों की कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। इससे आहत विद्यार्थियों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन करते हुए विभाग पर ताला लगा दिया। यही नहीं रोष स्वरूप विभाग के बाहर धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना है एमडीयू को नेक से ए ग्रेड हासिल है। जबकि विवि की डिग्री को मान्यता ही नहीं है। पढ़ाई पर हजारों रुपये खर्च कर विद्यार्थी डिग्री हासिल कर रहा है। यह डिग्री उसे रोजगार नहीं दिला पा रही है। देश के दूसरे प्रदेशों में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच खुद को साबित करते हुए विद्यार्थी नौकरी की दौड़ में शामिल होते हैं। इस दौड़ में सबसे आगे पहुंचकर भी विद्यार्थी पीछे रह जाते हैं। चयनकर्ता अंतिम चरण में दस्तावेजों की जांच के दौरान डिग्री को फेक बताकर उम्मीदवार को घर भेज देते हैं। एमडीयू प्रशासन यह सब जानता है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। विवि सेल्फ फाइनेंस कोर्स के जरिए वर्षों से विद्यार्थियों को ठने का काम किया जा रहा है। यहां डिग्री के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। विभाग के एचओडी व रजिस्ट्रार से डिग्री की मान्यता दिलाने की अपील की गई है। इस मौके पर शहीद भगत सिंह मोर्चा से प्रदीप, प्रवेश नांदल, सचिन, दीपक श्योराण, सुमित, रवि, रवीश अहलावत, मोनू दिमाना समेत अनेक विद्यार्थी मौजूद रहे।
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44 हजार रुपये बीपीएड की फीस
एमडीयू वर्ष 1992 में एमपीएड कोर्स शुरू हुआ था। इसकी 30 सीटें हैं। अब पिछले करीब आठ वर्षों से बीपीएड कोर्स भी चल रहा है। इसमें 50 सीटें हैं। एमपीएड के लिए करीब आठ हजार रुपये व बीपीएड के लिए 44 हजार रुपये फीस है। इतना शुल्क देने व कड़ी मेहनत करने के बाद मिलने वाली डिग्री काम नहीं आ रही है। इसीलिए विद्यार्थियों में रोष है। इस बारे में रजिस्ट्रार से बात हुई है। उन्हें डिग्री को मान्यता नहीं मिलने या कार्रवाई नहीं होने तक विभाग का ताला खोलने व धरना नहीं हटाने की चेतावनी दी है।
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- प्रदीप, अध्यक्ष, शहीद भगत सिंह मोर्चा, एमडीयू।
22 उम्मीदवार को नौकरी से अयोग्य घोषित
दिल्ली में पिछले दिनों डीएसएसबी ने रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके लिए विवि के शारीरिक शिक्षा विभाग से एमपीएड व बीपीएड करने वाले विद्यार्थियों ने भी आवेदन किया। भर्ती प्रक्रिया की आधे से ज्यादा कार्रवाई पूरी होने के बाद अब विवि के 22 उम्मीदवारों को आयोग्य घोषित कर दिया गया है। डीएसएसबी ने उनका परिणाम रोक दिया है। इस कारण इन उम्मीदवारों का भविष्य बनने से पहले की बिगड़ गया है।
- सुमित, प्रवक्ता, शहीद भगत सिंह मोर्चा, एमडीयू।
वर्जन :
विवि में एमपीएड और बीपीएस कोर्स कराया जा रहा है। इस कोर्स की मान्यता के लिए फीस और अन्य दस्तावेज जमा करा दिए गए थे। बाद में किन्हीं कारणों से डिग्री की मान्यता को लेकर प्रयास नहीं हुआ। इस कारण परेशानी खड़ी हुई है। इसका शीघ्र समाधान किया जाएगा। विभाग ने मान्यता संबंधी प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस बारे में मुख्यालय में सुबह ही बात हुई है। जल्दी ही डिग्री को मान्यता मिल जाएगी।
- डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, कुलसचिव, एमडीयू।