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डेंगू: मशीन खरीदी नहीं, अस्पतालों में मरीजों का तांता
Updated Fri, 27 Oct 2017 12:43 AM IST
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डेंगू: मशीन खरीदी नहीं, अस्पतालों में मरीजों का तांता
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
जिले में डेंगू और संदिग्ध केसों के मद्देनजर सरकारी और निजी अस्पताल मरीजों से अटे हैं। सरकारी निर्देश के बावजूद अभी तक जिले की 358 ग्राम पंचायतों में से एक भी पंचायत ने फॉगिंग मशीन खरीदकर फॉगिंग नहीं कराई है। पंचायत एसोसिएशन का कहना है कि उनके पास अभी तक इसके लिए ना तो कोई सूचना है और ना ही फंड। वहीं शहर की दो लाख की आबादी भी एक फॉगिंग मशीन के भरोसे है। सरकार की तरफ से इस बार फॉगिंग कराने का जिम्मा ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों और शहरी क्षेत्र में नगर निकाय को दिया था। इस बार जिले में मंगलवार तक 131 केस डेंगू, 20 मलेरिया और एक चिकनगुनिया का आ चुका है। मंगलवार के दिन ही जांच रिपोर्ट में 47 नए डेंगू के केस सामने आए हैं।
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अस्पताल में हर दिन पहुंच रहे हैं संभावित 20 डेंगू केस
मच्छर जनित बीमारियों के चलते नागरिक अस्पताल में ओपीडी के कक्ष नंबर-6 में मरीजों का तांता लगा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने यहां चार फिजिशियन नियुक्त किए हैं। डॉक्टरों की मानें तो प्रतिदिन 20 से ज्यादा डेंगू संभावित मरीज पहुंच रहे हैं। 15 दिनों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि रेवाड़ी में डेंगू के जो केस आ रहे हैं, वह गंभीर नहीं है। सभी उपचार के बाद स्वस्थ्य हो रहे हैं। ट्रामा सेंटर में अलग से वार्ड बनाने के साथ अस्पताल में जांच सुविधा भी मुफ्त में उपलब्ध है।
एंटीबायोटिक और अधिक पानी भी हो सकता है जानलेवा
चिकित्सकों की मानें तो डेंगू के गलत उपचार से भी परिणाम खतरनाक आ रहे हैं। डेंगू के लिए अभी तक कोई टेबलेट या फिर टीका नहीं बना है। डाक्टरों के अनुसार कुछ डॉक्टर मरीज को एंटीबायोटिक देते हैं और अधिक ग्लूकोज चढ़ा देते हैं। इससे पानी फेफड़ों में जाने से फेफडे़ खराब हो जाते हैं। मरीज की जान चली जाती है। डेंगू में पानी जरूर पीएं। लेकिन ग्लूकोज जरूरत की हिसाब से चढ़वाएं।
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डेंगू के लक्षण एवं बचाव
अचानक तेज बुखार, सर दर्द, उल्टी एवं मांसपेशियों में दर्द होने पर जांच जरूर कराएं। ये सभी डेंगू के लक्षण हैं। यदि किसी भी व्यक्ति को इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत क्वालीफाइड डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डेंगू पॉजिटिव पाए जाने पर मरीज को आराम करना सबसे जरूरी है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार एक लाख से कम प्लेटलेट्स होने पर प्लेट्स इन्फ्यूज (गिरती) होती हैं। डॉक्टरों का मानना है कि शरीर एवं मरीज पर निर्भर करता है कि उसे कब प्लेट्स चढ़ानी है। अधिकतर केसों में 20 हजार तक भी मरीज को प्लेट्स चढ़ानी नहीं पड़ती हैं। डॉक्टर इसमें उल्टी एवं एसीडीटी नहीं बनने की टेबलेट्स देते हैं। इसी के साथ मरीज को ओआरएस पीना चाहिए।
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शहर के अधिकतर वार्डों में नहीं हुई फॉगिंग
शहर के 31 वार्ड में करीब दो लाख की आबादी रहती है। शहर में फॉगिंग का जिम्मा रेवाड़ी नगर परिषद के पास है। परिषद के पास एक फॉगिंग मशीन है। जिसको ऑटो में रखकर फॉगिंग की जाती है। यह ऑटो शहर के कुछ वार्ड में ही पहुंच पाया है। इनमें भी छोटी गलियों में ये मशीन पहुंच ही नहीं पाती हैं। शहर के अंदर के कुछ हिस्से में एक दो बार फॉगिंग की गई है। लेकिन बाहरी कॉलोनी अभी मशीन का इंतजार कर रही हैं।
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वर्जन
गांवों में फॉगिंग मशीन खरीदने की प्रशासन की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई है। वहीं मशीन खरीदने के लिए कोई फंड भी उपलब्ध नहीं करवाया गया है। आदेश की जानकारी देने के साथ फंड भी उपलब्ध कराना चाहिए था। - चरण सिंह, सरपंच साबन एवं प्रधान सरपंच एसोसिएशन
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अस्पताल में प्रतिदिन 20 से अधिक डेंगू के संभावित मरीज पहुंच रहे हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों का उपचार भी चल रहा है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का विश्वास बढ़ा है। लोगों को चाहिए कि लक्षण दिखते ही वह नागरिक अस्पताल पहुंचकर अपना उपचार कराएं। डेंगू का उचित उपचार करना जरूरी है। न की पैसा बनाने के लिए उल्टी सीधी दवाइयां देना। - डॉ. जेके सैनी, वरिष्ठ फिजिशियन, नागरिक अस्पताल, रेवाड़ी
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जरूरत के हिसाब से नप के साथ स्वास्थ्य विभाग भी फॉगिंग करा रहा है। उपचार के लिए पूरे इंतजाम हैं। वहीं डेंगू के डंक को मारने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। लोग को भी सावधानी रखना जरूरी है। - डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ, रेवाड़ी।
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नगर परिषद की ओर से शहर में लगभग सभी जगह फॉगिंग कराई जा रही है। हमारी ओर से किसी भी तरह की ढील नहीं छोड़ी जाएगी। - मनोज यादव, ईओ, नगर परिषद
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मैंने अभी-अभी ज्वाइन किया है। अभी इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। पूरी जानकारी के बाद ही कुछ बता सकूंगा। - एसी कौशिक, डीडीपीओ, रेवाड़ी
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
जिले में डेंगू और संदिग्ध केसों के मद्देनजर सरकारी और निजी अस्पताल मरीजों से अटे हैं। सरकारी निर्देश के बावजूद अभी तक जिले की 358 ग्राम पंचायतों में से एक भी पंचायत ने फॉगिंग मशीन खरीदकर फॉगिंग नहीं कराई है। पंचायत एसोसिएशन का कहना है कि उनके पास अभी तक इसके लिए ना तो कोई सूचना है और ना ही फंड। वहीं शहर की दो लाख की आबादी भी एक फॉगिंग मशीन के भरोसे है। सरकार की तरफ से इस बार फॉगिंग कराने का जिम्मा ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों और शहरी क्षेत्र में नगर निकाय को दिया था। इस बार जिले में मंगलवार तक 131 केस डेंगू, 20 मलेरिया और एक चिकनगुनिया का आ चुका है। मंगलवार के दिन ही जांच रिपोर्ट में 47 नए डेंगू के केस सामने आए हैं।
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अस्पताल में हर दिन पहुंच रहे हैं संभावित 20 डेंगू केस
मच्छर जनित बीमारियों के चलते नागरिक अस्पताल में ओपीडी के कक्ष नंबर-6 में मरीजों का तांता लगा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने यहां चार फिजिशियन नियुक्त किए हैं। डॉक्टरों की मानें तो प्रतिदिन 20 से ज्यादा डेंगू संभावित मरीज पहुंच रहे हैं। 15 दिनों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि रेवाड़ी में डेंगू के जो केस आ रहे हैं, वह गंभीर नहीं है। सभी उपचार के बाद स्वस्थ्य हो रहे हैं। ट्रामा सेंटर में अलग से वार्ड बनाने के साथ अस्पताल में जांच सुविधा भी मुफ्त में उपलब्ध है।
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एंटीबायोटिक और अधिक पानी भी हो सकता है जानलेवा
चिकित्सकों की मानें तो डेंगू के गलत उपचार से भी परिणाम खतरनाक आ रहे हैं। डेंगू के लिए अभी तक कोई टेबलेट या फिर टीका नहीं बना है। डाक्टरों के अनुसार कुछ डॉक्टर मरीज को एंटीबायोटिक देते हैं और अधिक ग्लूकोज चढ़ा देते हैं। इससे पानी फेफड़ों में जाने से फेफडे़ खराब हो जाते हैं। मरीज की जान चली जाती है। डेंगू में पानी जरूर पीएं। लेकिन ग्लूकोज जरूरत की हिसाब से चढ़वाएं।
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डेंगू के लक्षण एवं बचाव
अचानक तेज बुखार, सर दर्द, उल्टी एवं मांसपेशियों में दर्द होने पर जांच जरूर कराएं। ये सभी डेंगू के लक्षण हैं। यदि किसी भी व्यक्ति को इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत क्वालीफाइड डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डेंगू पॉजिटिव पाए जाने पर मरीज को आराम करना सबसे जरूरी है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार एक लाख से कम प्लेटलेट्स होने पर प्लेट्स इन्फ्यूज (गिरती) होती हैं। डॉक्टरों का मानना है कि शरीर एवं मरीज पर निर्भर करता है कि उसे कब प्लेट्स चढ़ानी है। अधिकतर केसों में 20 हजार तक भी मरीज को प्लेट्स चढ़ानी नहीं पड़ती हैं। डॉक्टर इसमें उल्टी एवं एसीडीटी नहीं बनने की टेबलेट्स देते हैं। इसी के साथ मरीज को ओआरएस पीना चाहिए।
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शहर के अधिकतर वार्डों में नहीं हुई फॉगिंग
शहर के 31 वार्ड में करीब दो लाख की आबादी रहती है। शहर में फॉगिंग का जिम्मा रेवाड़ी नगर परिषद के पास है। परिषद के पास एक फॉगिंग मशीन है। जिसको ऑटो में रखकर फॉगिंग की जाती है। यह ऑटो शहर के कुछ वार्ड में ही पहुंच पाया है। इनमें भी छोटी गलियों में ये मशीन पहुंच ही नहीं पाती हैं। शहर के अंदर के कुछ हिस्से में एक दो बार फॉगिंग की गई है। लेकिन बाहरी कॉलोनी अभी मशीन का इंतजार कर रही हैं।
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वर्जन
गांवों में फॉगिंग मशीन खरीदने की प्रशासन की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई है। वहीं मशीन खरीदने के लिए कोई फंड भी उपलब्ध नहीं करवाया गया है। आदेश की जानकारी देने के साथ फंड भी उपलब्ध कराना चाहिए था। - चरण सिंह, सरपंच साबन एवं प्रधान सरपंच एसोसिएशन
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अस्पताल में प्रतिदिन 20 से अधिक डेंगू के संभावित मरीज पहुंच रहे हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों का उपचार भी चल रहा है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का विश्वास बढ़ा है। लोगों को चाहिए कि लक्षण दिखते ही वह नागरिक अस्पताल पहुंचकर अपना उपचार कराएं। डेंगू का उचित उपचार करना जरूरी है। न की पैसा बनाने के लिए उल्टी सीधी दवाइयां देना। - डॉ. जेके सैनी, वरिष्ठ फिजिशियन, नागरिक अस्पताल, रेवाड़ी
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जरूरत के हिसाब से नप के साथ स्वास्थ्य विभाग भी फॉगिंग करा रहा है। उपचार के लिए पूरे इंतजाम हैं। वहीं डेंगू के डंक को मारने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। लोग को भी सावधानी रखना जरूरी है। - डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ, रेवाड़ी।
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नगर परिषद की ओर से शहर में लगभग सभी जगह फॉगिंग कराई जा रही है। हमारी ओर से किसी भी तरह की ढील नहीं छोड़ी जाएगी। - मनोज यादव, ईओ, नगर परिषद
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मैंने अभी-अभी ज्वाइन किया है। अभी इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। पूरी जानकारी के बाद ही कुछ बता सकूंगा। - एसी कौशिक, डीडीपीओ, रेवाड़ी