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विश्व आत्महत्या विशेष दिवस
Updated Mon, 10 Sep 2018 02:40 AM IST
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विश्व आत्महत्या बचाव दिवस पर विशेष...
हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति कर रहा आत्महत्या : डॉ. गुप्ता
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक देश में हर साल एक लाख से ज्यादा लोग विभिन्न कारणों से आत्महत्या करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है एवं प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख लोगों की जान आत्महत्या की वजह से जाती है। यह जानकारी विश्व आत्महत्या दिवस पर पीजीआईएमएस के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक कम सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता ने दी।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि 10 सितंबर को वैश्विक स्तर पर विश्व आत्महत्या बचाव दिवस मनाया जाता है। इसकी बढ़ती प्रवृति पर रोकथाम लगाने एवं इस बढ़ती समस्या के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से यह विशेष दिवस मनाया जाता है। इंटरनेशनल एसोसिएशन फार सुसाइड प्रिवेंशन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व मानसिक स्वास्थ्य महासंघ के साथ समझौते के अंतर्गत वर्ष 2003 से इस हर साल मनाने पर प्रस्ताव पास किया था। चिकित्सक ने बताया कि जहां विभिन्न तरह की बीमारियां हर साल लाखों लोगों की जान ले लेती है, वहीं ऐसे लाखों लोग भी हैं जो किन्हीं कारणों से स्वयं अपने जीवन के दुश्मन बन जाते हैं और आत्महत्या करते हैं। पिछले कुछ सालों में इसकी बढ़ती संख्या एक चिंतनीय विषय है। बदलती लाइफ स्टाइल के चलते आज आम आदमी का डेली रूटीन भी बदल गया है। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते 80 प्रतिशत लोग आत्महत्या कर रहे हैं, कभी डिप्रेशन में आकर तो कभी भावनात्मक होकर यदि कुुछ क्षणों तक व्यक्ति अपनी भावनाओं पर संयम रख ले तो आत्महत्या की संभावना कम हो जाती है। एक अध्ययन के अनुसार आत्महत्या करने वाले 48 प्रतिशत लोगों की सही समय पर की गई काउंसिलिंग उनके विचार को बदल सकती है। पिछले कुछ सालों में आत्महत्या आज हमारे समाज के सामने एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृत्यु के जितने भी कारण हैं, उनमें 0.4 से 0.9 प्रतिशत मृत्यु आत्महत्या के कारण हो रही है।
ये हैं आत्महत्या करने के कारण
एक्सपर्ट की मानें तो आत्महत्या के कारणों में प्रमुख कारण गंभीर शारीरिक रोग, पारिवारिक कलह, संबंधों में कटुता, प्रेम प्रसंग, सामाजिक एवं रोजगार की उथल-पुथल, नशे की लत, मानसिक क्रोध, व्यक्तित्व में खराबी एवं जीवन में आने वाली अत्यंत दुख दाई घटनाएं प्रमुख हैं। विश्व आत्महत्या बचाव दिवस पर स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की ओर से सुबह दस बजे मोबाइल वैन प्रदर्शनी के माध्यम से शहर के शैक्षणिक संस्थानों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालयों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को जागरूक करेगी।
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फोटो सहित एसएनजे 10
डॉ. राजीव गुप्ता
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हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति कर रहा आत्महत्या : डॉ. गुप्ता
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक देश में हर साल एक लाख से ज्यादा लोग विभिन्न कारणों से आत्महत्या करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है एवं प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख लोगों की जान आत्महत्या की वजह से जाती है। यह जानकारी विश्व आत्महत्या दिवस पर पीजीआईएमएस के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक कम सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता ने दी।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि 10 सितंबर को वैश्विक स्तर पर विश्व आत्महत्या बचाव दिवस मनाया जाता है। इसकी बढ़ती प्रवृति पर रोकथाम लगाने एवं इस बढ़ती समस्या के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से यह विशेष दिवस मनाया जाता है। इंटरनेशनल एसोसिएशन फार सुसाइड प्रिवेंशन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व मानसिक स्वास्थ्य महासंघ के साथ समझौते के अंतर्गत वर्ष 2003 से इस हर साल मनाने पर प्रस्ताव पास किया था। चिकित्सक ने बताया कि जहां विभिन्न तरह की बीमारियां हर साल लाखों लोगों की जान ले लेती है, वहीं ऐसे लाखों लोग भी हैं जो किन्हीं कारणों से स्वयं अपने जीवन के दुश्मन बन जाते हैं और आत्महत्या करते हैं। पिछले कुछ सालों में इसकी बढ़ती संख्या एक चिंतनीय विषय है। बदलती लाइफ स्टाइल के चलते आज आम आदमी का डेली रूटीन भी बदल गया है। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते 80 प्रतिशत लोग आत्महत्या कर रहे हैं, कभी डिप्रेशन में आकर तो कभी भावनात्मक होकर यदि कुुछ क्षणों तक व्यक्ति अपनी भावनाओं पर संयम रख ले तो आत्महत्या की संभावना कम हो जाती है। एक अध्ययन के अनुसार आत्महत्या करने वाले 48 प्रतिशत लोगों की सही समय पर की गई काउंसिलिंग उनके विचार को बदल सकती है। पिछले कुछ सालों में आत्महत्या आज हमारे समाज के सामने एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृत्यु के जितने भी कारण हैं, उनमें 0.4 से 0.9 प्रतिशत मृत्यु आत्महत्या के कारण हो रही है।
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ये हैं आत्महत्या करने के कारण
एक्सपर्ट की मानें तो आत्महत्या के कारणों में प्रमुख कारण गंभीर शारीरिक रोग, पारिवारिक कलह, संबंधों में कटुता, प्रेम प्रसंग, सामाजिक एवं रोजगार की उथल-पुथल, नशे की लत, मानसिक क्रोध, व्यक्तित्व में खराबी एवं जीवन में आने वाली अत्यंत दुख दाई घटनाएं प्रमुख हैं। विश्व आत्महत्या बचाव दिवस पर स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की ओर से सुबह दस बजे मोबाइल वैन प्रदर्शनी के माध्यम से शहर के शैक्षणिक संस्थानों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालयों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को जागरूक करेगी।
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फोटो सहित एसएनजे 10
डॉ. राजीव गुप्ता