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बड़े पर्दे पर नजर आएगी रागनी गायक लख्मीचंद की कहानी
Updated Sat, 21 Apr 2018 02:56 AM IST
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बड़े पर्दे पर नजर आएगी रागनी गायक लख्मीचंद की कहानी
- बॉलीवुड कलाकार यशपाल बनाएं हरियाणवी कलाकार पर फिल्म
- स्क्रिप्ट के बाद ऑडिशन हुए, यशपाल खुद निभाएं वरिष्ठ लख्मी का किरदार
विकास सैनी
रोहतक
हरियाणवी कला का नए आयाम व रागनी को पहचान दिलाने वाले गायक लख्मीचंद की कहानी बड़े पर्दे पर नजर आएगी। बॉलीवुड कलाकार यशपाल शर्मा इस हरियाणवी कलाकार के संघर्ष पर फिल्म बनाएंगे। फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार होने के बाद कलाकारों के ऑडिशन भी हो गए हैं। यशपाल खुद वरिष्ठ लख्मीचंद का किरदार निभाएंगे। शहर का ही एक नौवीं कक्षा का छात्र योगेश वत्स उनके बचपन के किरदार में नजर आएगा। फिलहाल युवा लख्मीचंद की तलाश की जा रही है।
लख्मीचंद पर दो साल तक किया शोध
यशपाल शर्मा ने रागनी गायक लख्मीचंद पर फिल्म बनाने के लिए दो साल तक उन पर शोध किया। इस दौरान उनसे जुड़े हर पहलू को जानने के लिए उनके सुनने वाले, रिश्तेदारों व कलाकारों से संपर्क किया। जगह-जगह जाकर उनसे जुड़ी जानकारी जुटाई। हरियाणवी माटी व कला से जुड़े यशपाल ने लोक गीत व संगीत की बारीकि समझने में जुटे हैं। फिल्म को लेकर ऑडिशन हो चुका है। इसमें बच्चों से बूढ़े तक शामिल हुए। गायक पर बन रही यह फिल्म गीत प्रमुख रहेगी। इसमें अनेक गीत व रागनियां देखने व सुनने को मिलेंगी।
सितंबर में शुरू होनी है शूटिंग
स्टेट यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को कला का पाठ पढ़ाने आए यशपाल शर्मा ने बताया कि फिल्म की तैयारी हो गई है। सितंबर महीने शूटिंग शुरू करनी है। फिल्म का निर्देशन व वरिष्ठ लख्मीचंद का किरदार खुद निभाएंगे। बच्चे का किरदार निभाने वाला कलाकार मिल गया है। अब युवा किरादार तलाशा जा रहा है। फिल्म में रवि राजावत व पवन शर्मा को-प्रोड्यूसर के रूप में सहयोग दे रहे हैं। इस फिल्म को लेकर पिछले करीब डेढ़ साल से बॉलीवुड से दूरी बनाई हुई है। मेरा मकसद हरियाणवी फिल्मों व कलाकारों को प्रोत्साहन देकर आगे लाना है। पंजाबी व दूसरी भाषा की फिल्मों की तरह हरियाणवी फिल्में भी अपनी पहचान पाए। फिल्म फेयर ही नहीं ऑस्कर अवार्ड पाए।
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अपने अंदर छिपे कलाकार को बाहर लाओ
विद्यार्थियों को दिए सेशन में यशपाल शर्मा ने कहा कि अपनी काबलियत पहचानो। अपने अंदर छिपे कलाकार को सामने लाओ। अच्छी बाडी बना लोगे। अच्छा डांस सीख लोगे। कला कहां से लाओगे। अमिताभ की नकल करने के बजाय खुद में छिपे अमिताभ को पहचानो। उसे बाहर लाओ। यही पहचान दिलाएगा।
गायक लख्मीचंद एक नजर में
- 1901 में सोनीपत के जाटी गांव में जन्मे।
- 1945 में 44 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
- रागनी के जरिए अपनी बात लोगों तक पहुंचाई।
- सांग करने के साथ उन्हें खुद लिखा भी।
- धार्मिक, राजा रजवाड़े की कथा में कही बात।
ये हैं मुख्य रचनाएं
लखमीचंद ने अनेक रचनाएं रची। इन्हें लोगाें ने खूब पंसद किया और कलाकार व उसकी कला को सराहा। वर्तमान में भी उन्हें सुनने वाले कम नहीं हैं। उनकी रचनाओं में मुख्य रूप से - हो पिया भीड़ पड़ी मैं, कर जोड़ खड़ी सूं प्रभु लाज राखियो मेरी, देखे मर्द नकारे हों सैं गरज-गरज के प्यारे हों सैं, माता बणकै बेटी जणकै बण मैं गेर गई, दुख मैं बीतैं जिन्दगी न्यूं दिन रात दुखिया की, लाख चौरासी जीया जून मैं नाचै दुनिया सारी, कदे ना सोची आपतै के दो-च्यार आने ले ले, सारा कुणबा भरया उमंग मैं घरां बहोड़िया आई, यो भारत खो दिया फर्क नै इसमैं कोए कोए माणस बाकी सै, मत चालै मेरी गेल तनै घरबार चाहिएगा, लेणा एक ना देणे दो दिलदार बणे हांडै सैं, कर कै खाले ले कै देदे उस तै कौण जबर हो सै समेत अनेक कृतियां शामिल हैं।
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बड़े पर्दे पर नजर आएगी रागनी गायक लख्मीचंद की कहानी
- बॉलीवुड कलाकार यशपाल बनाएं हरियाणवी कलाकार पर फिल्म
- स्क्रिप्ट के बाद ऑडिशन हुए, यशपाल खुद निभाएं वरिष्ठ लख्मी का किरदार
विकास सैनी
रोहतक
हरियाणवी कला का नए आयाम व रागनी को पहचान दिलाने वाले गायक लख्मीचंद की कहानी बड़े पर्दे पर नजर आएगी। बॉलीवुड कलाकार यशपाल शर्मा इस हरियाणवी कलाकार के संघर्ष पर फिल्म बनाएंगे। फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार होने के बाद कलाकारों के ऑडिशन भी हो गए हैं। यशपाल खुद वरिष्ठ लख्मीचंद का किरदार निभाएंगे। शहर का ही एक नौवीं कक्षा का छात्र योगेश वत्स उनके बचपन के किरदार में नजर आएगा। फिलहाल युवा लख्मीचंद की तलाश की जा रही है।
लख्मीचंद पर दो साल तक किया शोध
यशपाल शर्मा ने रागनी गायक लख्मीचंद पर फिल्म बनाने के लिए दो साल तक उन पर शोध किया। इस दौरान उनसे जुड़े हर पहलू को जानने के लिए उनके सुनने वाले, रिश्तेदारों व कलाकारों से संपर्क किया। जगह-जगह जाकर उनसे जुड़ी जानकारी जुटाई। हरियाणवी माटी व कला से जुड़े यशपाल ने लोक गीत व संगीत की बारीकि समझने में जुटे हैं। फिल्म को लेकर ऑडिशन हो चुका है। इसमें बच्चों से बूढ़े तक शामिल हुए। गायक पर बन रही यह फिल्म गीत प्रमुख रहेगी। इसमें अनेक गीत व रागनियां देखने व सुनने को मिलेंगी।
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सितंबर में शुरू होनी है शूटिंग
स्टेट यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को कला का पाठ पढ़ाने आए यशपाल शर्मा ने बताया कि फिल्म की तैयारी हो गई है। सितंबर महीने शूटिंग शुरू करनी है। फिल्म का निर्देशन व वरिष्ठ लख्मीचंद का किरदार खुद निभाएंगे। बच्चे का किरदार निभाने वाला कलाकार मिल गया है। अब युवा किरादार तलाशा जा रहा है। फिल्म में रवि राजावत व पवन शर्मा को-प्रोड्यूसर के रूप में सहयोग दे रहे हैं। इस फिल्म को लेकर पिछले करीब डेढ़ साल से बॉलीवुड से दूरी बनाई हुई है। मेरा मकसद हरियाणवी फिल्मों व कलाकारों को प्रोत्साहन देकर आगे लाना है। पंजाबी व दूसरी भाषा की फिल्मों की तरह हरियाणवी फिल्में भी अपनी पहचान पाए। फिल्म फेयर ही नहीं ऑस्कर अवार्ड पाए।
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अपने अंदर छिपे कलाकार को बाहर लाओ
विद्यार्थियों को दिए सेशन में यशपाल शर्मा ने कहा कि अपनी काबलियत पहचानो। अपने अंदर छिपे कलाकार को सामने लाओ। अच्छी बाडी बना लोगे। अच्छा डांस सीख लोगे। कला कहां से लाओगे। अमिताभ की नकल करने के बजाय खुद में छिपे अमिताभ को पहचानो। उसे बाहर लाओ। यही पहचान दिलाएगा।
गायक लख्मीचंद एक नजर में
- 1901 में सोनीपत के जाटी गांव में जन्मे।
- 1945 में 44 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
- रागनी के जरिए अपनी बात लोगों तक पहुंचाई।
- सांग करने के साथ उन्हें खुद लिखा भी।
- धार्मिक, राजा रजवाड़े की कथा में कही बात।
ये हैं मुख्य रचनाएं
लखमीचंद ने अनेक रचनाएं रची। इन्हें लोगाें ने खूब पंसद किया और कलाकार व उसकी कला को सराहा। वर्तमान में भी उन्हें सुनने वाले कम नहीं हैं। उनकी रचनाओं में मुख्य रूप से - हो पिया भीड़ पड़ी मैं, कर जोड़ खड़ी सूं प्रभु लाज राखियो मेरी, देखे मर्द नकारे हों सैं गरज-गरज के प्यारे हों सैं, माता बणकै बेटी जणकै बण मैं गेर गई, दुख मैं बीतैं जिन्दगी न्यूं दिन रात दुखिया की, लाख चौरासी जीया जून मैं नाचै दुनिया सारी, कदे ना सोची आपतै के दो-च्यार आने ले ले, सारा कुणबा भरया उमंग मैं घरां बहोड़िया आई, यो भारत खो दिया फर्क नै इसमैं कोए कोए माणस बाकी सै, मत चालै मेरी गेल तनै घरबार चाहिएगा, लेणा एक ना देणे दो दिलदार बणे हांडै सैं, कर कै खाले ले कै देदे उस तै कौण जबर हो सै समेत अनेक कृतियां शामिल हैं।