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सूतक के चलते दिनभर बंद रहे मंदिरों के कपाट, सायं की आरती की रात्रि में
Updated Thu, 01 Feb 2018 02:44 AM IST
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सायं 5.18 से लेकर रात्रि 8.42 तक लगा चंद्रग्रहण
- सूतक के चलते दिनभर बंद रहे मंदिरों के कपाट, शाम की आरती हुई रात में
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
वर्ष 2018 का पहला चंद्रग्रहण बुधवार को सायं 5.18 से लेकर रात्रि 8.42 तक रहा। इससे पहले सुबह 8.18 से सूतक लग गया था, इसके चलते दिन भर मंदिरों के कपाट बंद रहे। रात्रि को चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद पंचामृत से मंदिर में देवताओं की प्रतिमाओं को विधिवत स्नान करा कर सायंकालीन आरती रात्रि में की गई।
दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्र ने बताया कि बुधवार को सूतक लगने के बाद मंदिरों को बंद कर दिया गया था। सूतक लगने से पहले मंदिर खुले थे। दिन में मंदिरों में सिर्फ जप किया गया। क्योंकि इस समय जप करने से लाख गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। रात्रि में जब चंद्रग्रहण समाप्त हुआ तो देवताओं की प्रतिमाओं को पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके बाद मंदिरों को भगवान के दर्शन के लिए खोल दिया गया। चंद्रग्रहण के चलते सायं की आरती रात्रि को नौ बजे के बाद की गई। आचार्य ने बताया कि इस दिन स्नान के बाद दान देने अनंत फल की प्राप्ति होती है।
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- सूतक के चलते दिनभर बंद रहे मंदिरों के कपाट, शाम की आरती हुई रात में
फोटो सहित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
वर्ष 2018 का पहला चंद्रग्रहण बुधवार को सायं 5.18 से लेकर रात्रि 8.42 तक रहा। इससे पहले सुबह 8.18 से सूतक लग गया था, इसके चलते दिन भर मंदिरों के कपाट बंद रहे। रात्रि को चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद पंचामृत से मंदिर में देवताओं की प्रतिमाओं को विधिवत स्नान करा कर सायंकालीन आरती रात्रि में की गई।
दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्र ने बताया कि बुधवार को सूतक लगने के बाद मंदिरों को बंद कर दिया गया था। सूतक लगने से पहले मंदिर खुले थे। दिन में मंदिरों में सिर्फ जप किया गया। क्योंकि इस समय जप करने से लाख गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। रात्रि में जब चंद्रग्रहण समाप्त हुआ तो देवताओं की प्रतिमाओं को पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके बाद मंदिरों को भगवान के दर्शन के लिए खोल दिया गया। चंद्रग्रहण के चलते सायं की आरती रात्रि को नौ बजे के बाद की गई। आचार्य ने बताया कि इस दिन स्नान के बाद दान देने अनंत फल की प्राप्ति होती है।
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