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जिला अस्पताल में जल्द होगा फैको तकनीक से लेंस प्रत्यारोपित
Updated Mon, 19 Jun 2017 02:07 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पीजीआई की तर्ज पर जिला अस्पताल में भी नेत्र के मरीजों को फैको तकनीक का लाभ मिलेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने मशीन की डिमांड के लिए अधिकारियों को फाइल भेजी है।
जिला अस्पताल में प्रतिमाह 200 से 250 मरीजों की आंखों के आपरेशन के लिए चयनित किया जाता है। सभी का आपरेशन सामान्य तरीके से किया जाता है। इसमें नेत्र विशेषज्ञ डब्ल्यूएचओ से प्रमाणित साधारण लेंस मरीजों की आंखों में डालते हैं। इसमें मरीजों की आंखों के ग्लोबल में चीरा लगाया जाता है और लेंस को प्रत्यारोपित किया जाता है। वहीं, आधुनिकता की दौर में फैको तकनीक से मरीजों की आंखों में फोल्डेबल लेंस डाले जाते हैं। नेत्र विशेषज्ञ की मानें तो साधारण लेंस की तुलना में फोल्डेबल लेंस आंखों में प्रत्यारोपित करना सरल है। इसमें मरीज को एक दिन में ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। गौरतलब है कि सरकार ने सभी जिला अस्पतालों से फैको तकनीक की जरूरत के बारे में पूछा था। इसके बाद जिला अस्पताल रोहतक ने इसकी डिमांड भेजी थी। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में फैको तकनीक से आपरेशन करने के लिए योग्य स्टाफ भी है। इसी आधार पर अस्पताल प्रशासन ने मशीन की डिमांड भेजी है। नेत्र विभाग की मानें तो जल्द ही उनके पास यह मशीन उपलब्ध होगी।
मरीजों को मिलेगा लाभ
फैको मशीन के लिए डिमांड भेजी गई है। मंजूरी मिलते ही मशीन आ जाएगी। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा। आने वाले समय में साधारण और फोल्डेबल दोनों लेंस प्रत्यारोपित करने की सुविधा अस्पताल में होगी।
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- डॉ. रमेश चंद्र, चिकित्सा अधिकारी, जिला अस्पताल।
रोहतक।
पीजीआई की तर्ज पर जिला अस्पताल में भी नेत्र के मरीजों को फैको तकनीक का लाभ मिलेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने मशीन की डिमांड के लिए अधिकारियों को फाइल भेजी है।
जिला अस्पताल में प्रतिमाह 200 से 250 मरीजों की आंखों के आपरेशन के लिए चयनित किया जाता है। सभी का आपरेशन सामान्य तरीके से किया जाता है। इसमें नेत्र विशेषज्ञ डब्ल्यूएचओ से प्रमाणित साधारण लेंस मरीजों की आंखों में डालते हैं। इसमें मरीजों की आंखों के ग्लोबल में चीरा लगाया जाता है और लेंस को प्रत्यारोपित किया जाता है। वहीं, आधुनिकता की दौर में फैको तकनीक से मरीजों की आंखों में फोल्डेबल लेंस डाले जाते हैं। नेत्र विशेषज्ञ की मानें तो साधारण लेंस की तुलना में फोल्डेबल लेंस आंखों में प्रत्यारोपित करना सरल है। इसमें मरीज को एक दिन में ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। गौरतलब है कि सरकार ने सभी जिला अस्पतालों से फैको तकनीक की जरूरत के बारे में पूछा था। इसके बाद जिला अस्पताल रोहतक ने इसकी डिमांड भेजी थी। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में फैको तकनीक से आपरेशन करने के लिए योग्य स्टाफ भी है। इसी आधार पर अस्पताल प्रशासन ने मशीन की डिमांड भेजी है। नेत्र विभाग की मानें तो जल्द ही उनके पास यह मशीन उपलब्ध होगी।
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मरीजों को मिलेगा लाभ
फैको मशीन के लिए डिमांड भेजी गई है। मंजूरी मिलते ही मशीन आ जाएगी। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा। आने वाले समय में साधारण और फोल्डेबल दोनों लेंस प्रत्यारोपित करने की सुविधा अस्पताल में होगी।
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- डॉ. रमेश चंद्र, चिकित्सा अधिकारी, जिला अस्पताल।