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वैश्य संस्था में चुनाव आज, 58 वार्डों में 127 दावेदार
Updated Sun, 02 Jul 2017 01:21 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। चुनाव को लेकर लंबी जद्दोजहद के बाद वैश्य संस्था में रविवार को मतदान होगा। 58 वार्डों के लिए 127 प्रत्याशी किस्मत आजमाने के लिए मैदान में उतरे हुए हैं। इनके भाग्य का फैसला करीब 16500 वोटर करेंगे। दिन में मतदान के बाद देर शाम परिणाम भी जारी कर दिया जाएगा। चुनाव को शांतिपूर्ण कराने के लिए करीब 300 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
चुनाव अधिकारी अमित गुलिया ने बताया कि संस्था में कुल 105 कॉलेजियम सदस्य हैं। इसमें से 47 कॉलेजियम सदस्य पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए हैं। बाकी बचे 58 वार्डों के लिए मतदान कराया जाएगा। सुबह आठ बजे मतदान शुरू होगा। वैश्य पब्लिक स्कूल और वैश्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 58 बूथ बनाए गए हैं। हर बूथ पर तीन-तीन पुलिसकर्मी लगाए गए हैैं। इसमें महिला पुलिसकर्मी भी शािमल हैं।
तहसीलदार गुलाब सिंह और बीडीपीओ राजपाल सिंह को ड्यूटी मजिस्ट्रेट बनाया गया है। शाम पांच बजे तक मतगणना के बाद मतगणना शुरू होगी और इसके तुरंत बाद परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। चुनाव को लेकर शनिवार को दिनभर रिहर्सल कराई गई। चुनावी ड्यूटी में लगे स्टाफ को बैलेट पेपर और अन्य सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। उधर, वोटरों को अपने पक्ष में लुभाने के लिए प्रत्याशियों ने अंतिम दिन हर दांवपेंच आजमाया। वे दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक वोट मांगने के लिए गए।
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दो अलग-अलग स्थानों पर होगा मैत्री भोज
मैत्री भोज को लेकर चल रहे विवाद के बाद अब दो अलग-अलग स्थानों पर खाने की व्यवस्था होगी। एक खेमा महाराजा अग्रसेन सभागार में टेंट लगाएगा और दूसरे पक्ष ने वैश्य ब्वायज कॉलेज में खाने की व्यवस्था की है।
यह है संस्था का इतिहास
वैश्य संस्था की नींव वर्ष 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने रखी थी। संस्था के स्कूल-कॉलेज समेत दस से अधिक संस्थान हैं। लगभग एक हजार से अधिक शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं। करीब 95 साल पहले शुरू हुई इस संस्था में फिलहाल लगभग 16500 सदस्य हैं।
1995 में हुआ था वोटिंग से चुनाव
संस्था की स्थापना के बाद सर्वसम्मति से ही पदाधिकारी चुन लिए जाते थे। वोटिंग के माध्यम से पहला चुनाव 8 जनवरी वर्ष 1995 में हुआ था। उस समय तीन अलग-अलग प्रधान बनते थे। पहले चुनाव में श्रीकृष्ण दास सोसायटी प्रधान, महेंद्र प्रसाद गर्ग कार्यकारिणी प्रधान और गिरीश चंद गुप्ता गवर्निंग बाडी के प्रधान चुने गए थे।
28 दिसंबर 1997 में हुए चुनाव में जगमोहन मित्तल सोसायटी प्रधान और 11 दिसंबर 2000 में गिरीश चंद गुप्ता सोसायटी प्रधान बने। इसके अलावा 11 जनवरी 2004 में श्रीकृष्ण जैन, 6 दिसंबर 2006 में श्रीकृष्ण दास और 6 दिसंबर 2009 में रामभरोसे गोयल को सोसायटी प्रधान चुना गया। 2009 के बाद 2014-15 में चुनाव कराया गया। इस बीच संस्था में प्रशासक की नियुक्ति रही। कहा जाए तो संस्था के विवादों का दौर भी सबसे अधिक इसी चुनाव के बाद शुरू हुआ था। 2014-15 में मनमोहन गोयल प्रधान बने।
कार्यकाल पूरा होने से पहले से 2015-16 में विवाद के चलते गवर्निंग बाडी को भंग कर दिया गया था। इसके बाद फिर से संस्था में प्रशासक की नियुक्ति हो गई। सोसायटी रजिस्ट्रार और कोर्ट तक मामला पहुंचने के बाद 2016-17 में राजेंद्र बंसल संस्था के प्रधान बने।
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रोहतक। चुनाव को लेकर लंबी जद्दोजहद के बाद वैश्य संस्था में रविवार को मतदान होगा। 58 वार्डों के लिए 127 प्रत्याशी किस्मत आजमाने के लिए मैदान में उतरे हुए हैं। इनके भाग्य का फैसला करीब 16500 वोटर करेंगे। दिन में मतदान के बाद देर शाम परिणाम भी जारी कर दिया जाएगा। चुनाव को शांतिपूर्ण कराने के लिए करीब 300 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
चुनाव अधिकारी अमित गुलिया ने बताया कि संस्था में कुल 105 कॉलेजियम सदस्य हैं। इसमें से 47 कॉलेजियम सदस्य पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए हैं। बाकी बचे 58 वार्डों के लिए मतदान कराया जाएगा। सुबह आठ बजे मतदान शुरू होगा। वैश्य पब्लिक स्कूल और वैश्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 58 बूथ बनाए गए हैं। हर बूथ पर तीन-तीन पुलिसकर्मी लगाए गए हैैं। इसमें महिला पुलिसकर्मी भी शािमल हैं।
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तहसीलदार गुलाब सिंह और बीडीपीओ राजपाल सिंह को ड्यूटी मजिस्ट्रेट बनाया गया है। शाम पांच बजे तक मतगणना के बाद मतगणना शुरू होगी और इसके तुरंत बाद परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। चुनाव को लेकर शनिवार को दिनभर रिहर्सल कराई गई। चुनावी ड्यूटी में लगे स्टाफ को बैलेट पेपर और अन्य सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। उधर, वोटरों को अपने पक्ष में लुभाने के लिए प्रत्याशियों ने अंतिम दिन हर दांवपेंच आजमाया। वे दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक वोट मांगने के लिए गए।
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दो अलग-अलग स्थानों पर होगा मैत्री भोज
मैत्री भोज को लेकर चल रहे विवाद के बाद अब दो अलग-अलग स्थानों पर खाने की व्यवस्था होगी। एक खेमा महाराजा अग्रसेन सभागार में टेंट लगाएगा और दूसरे पक्ष ने वैश्य ब्वायज कॉलेज में खाने की व्यवस्था की है।
यह है संस्था का इतिहास
वैश्य संस्था की नींव वर्ष 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने रखी थी। संस्था के स्कूल-कॉलेज समेत दस से अधिक संस्थान हैं। लगभग एक हजार से अधिक शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं। करीब 95 साल पहले शुरू हुई इस संस्था में फिलहाल लगभग 16500 सदस्य हैं।
1995 में हुआ था वोटिंग से चुनाव
संस्था की स्थापना के बाद सर्वसम्मति से ही पदाधिकारी चुन लिए जाते थे। वोटिंग के माध्यम से पहला चुनाव 8 जनवरी वर्ष 1995 में हुआ था। उस समय तीन अलग-अलग प्रधान बनते थे। पहले चुनाव में श्रीकृष्ण दास सोसायटी प्रधान, महेंद्र प्रसाद गर्ग कार्यकारिणी प्रधान और गिरीश चंद गुप्ता गवर्निंग बाडी के प्रधान चुने गए थे।
28 दिसंबर 1997 में हुए चुनाव में जगमोहन मित्तल सोसायटी प्रधान और 11 दिसंबर 2000 में गिरीश चंद गुप्ता सोसायटी प्रधान बने। इसके अलावा 11 जनवरी 2004 में श्रीकृष्ण जैन, 6 दिसंबर 2006 में श्रीकृष्ण दास और 6 दिसंबर 2009 में रामभरोसे गोयल को सोसायटी प्रधान चुना गया। 2009 के बाद 2014-15 में चुनाव कराया गया। इस बीच संस्था में प्रशासक की नियुक्ति रही। कहा जाए तो संस्था के विवादों का दौर भी सबसे अधिक इसी चुनाव के बाद शुरू हुआ था। 2014-15 में मनमोहन गोयल प्रधान बने।
कार्यकाल पूरा होने से पहले से 2015-16 में विवाद के चलते गवर्निंग बाडी को भंग कर दिया गया था। इसके बाद फिर से संस्था में प्रशासक की नियुक्ति हो गई। सोसायटी रजिस्ट्रार और कोर्ट तक मामला पहुंचने के बाद 2016-17 में राजेंद्र बंसल संस्था के प्रधान बने।