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Rewari News: युवा खींच रहे सफलता की लकीर, ऊंची उड़ान भरकर बदल रहे तकदीर

Thu, 12 Jan 2023 06:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 12 Jan 2023 06:30 AM IST
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Youth are pulling the streak of success, flying high and changing their fortunes
रेवाड़ी। जिले के युवा शिक्षा, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहरा रहे हैं। वे सफलता की लकीर खींच रहे हैं। साथ ही ऊंची उड़ान भरकर तकदीर बदल रहे हैं। इनमें बेटियां भी बेटों के बराबर कामयाबी हासिल कर अन्य के लिए प्ररेणास्रोत बन रही हैं। जिले की तीन बेटियों अंजलि, ऊषा व सिमरन ने इस साल यूपीएससी की परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। वहीं कुंड निवासी गजेंद्र राव ने सेना की ओर खेलकर नौकायन में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
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अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ऊषा ने चुनी पुलिस सेवा
शहर के सेक्टर-3 निवासी ऊषा यादव ने मेहनत और संघर्ष के बाद यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईपीएस बनी हैं। फिलहाल वह हैदराबाद में प्रशिक्षण कर रही हैं। स्कूली शिक्षा के दौरान ऊषा ने अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस सेवा में भर्ती होने का लक्ष्य बना लिया था। इसके बाद कठिन मेहनत की। उन्होंने 12वीं पास करने के बाद बी.टेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने पांच साल तक एक आईटी कंपनी में काम किया। फिर उनको सीजीएल में एएसओ की नौकरी मिली। इसके ससाथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी। यूपीएससी परीक्षा में छठवीं प्रयास में उन्होंने सफलता प्राप्त की। उन्होंने ऑल इंडिया स्तर पर 345वीं रैंक हासिल कर 2021 के बैच से आईपीएस बनीं। ऊषा ने बताया कि उनका लक्ष्य लोगों के मन से पुलिस के प्रति भय को निकाला है। उनमें पुलिस के प्रति प्यार पैदा करना एवं अपराधों पर अंकुश लगाना है। ऊषा जिला महेंद्रगढ़ के गांव भाखरी की बेटी हैं। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली ऊषा की मां सुमित्रा देवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, जबकि पिता इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह यादव बीएसएफ से एक साल पहले सेवानिवृत्त हुए हैं। ऊषा के दो भाई परमजीत यादव और योगेश यादव भी यूपीएससी की तैयारी में जुटे हैं।
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सफलता पाने के लिए हर कदम पर चुनौतियों के लिए तैयार रहें युवा : सिमरन
गांव मायण निवासी सिमरन भारद्वाज बचपन में ही आईएएस बनने का लक्ष्य बना लिया था। उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा 172वीं रैंक के साथ पास की। वह 12वीं कक्षा के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक परीक्षा पास की। इसके बाद महज 22 साल की उम्र में उन्होंने यूपीएससी पास कर एक मिसाल पेश की है। उन्होंने इसका श्रेय अपने माता-पिता, दादा व चाचा को दिया है। उनके पिता मनोज भारद्वाज सेना में कर्नल पद पर हैं। खाली समय मिलते ही सिमरन बच्चों को पढ़ाना शुरू कर देती हैं।
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सिमरन ने बताया कि जिंदगी में मुकाम पाने के लिए कड़ा संघर्ष किया है। प्रतिदिन 15 से 20 घंटे पढ़ाई कर परीक्षा की तैयारी की थी। इसके चलते वह आईपीएस बनी हैं। वह अभी हैदराबाद में आईपीएस की ट्रेनिंग कर रही हैं। उनकी मां लक्ष्मी देवी गृहिणी हैं। उनके स्वर्गीय दादा चाहते थे कि वह पुलिस में जाए और अपराधियों का खात्मा कर नए समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाएं। उन्होंने बताया कि सफलता बहुत मेहनत मांगती है। इसके लिए युवाओं को हर कदम पर चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। समय-समय पर अलग-अलग किताबों का अध्ययन करते रहना चाहिए। साथ ही अखबार और पत्रिका भी पढ़ना चाहिए, ताकि सामान्य ज्ञान बना रहे। सिमरन ने बताया कि वह आईपीएस के पद पर रहकर एक नए समाज के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाना चाहती हैं। इसके लिए पूरी मेहनत और लग्न के साथ काम में जुटी हैं।
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सफलता के लिए परिश्रम करें युवा, मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती
जिले के गांव कंवाली निवासी अंजलि शर्मा ने कड़े संघर्ष के साथ तीसरे प्रयास में यूपीएससी पास कर सफलता हासिल की। उन्होंने परीक्षा में 185वीं रैंक प्राप्त कर जिले की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण हरियाणा की बेटियों को प्रेरित किया है। फिलहाल वह महाराष्ट्र कैडर में आईएएस के पद पर तैनात हैं। अंजलि की जिद थी कि हर हाल में यह परीक्षा पास करनी है और उसकी जिद के आगे नाकामी फैल हो गई। उनके पिता विजय पाल ने बताया कि वह पहले भी लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकी थी, लेकिन साक्षात्कार में रह गई। अंजलि शर्मा ने फोन पर बताया कि हर युवा को सफलता के लिए परिश्रम करते रहना चाहिए। परिश्रम का फल मीठा होता है। परिश्रम करने वालों की कभी हार नहीं होती। उन्होंने बताया कि यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों को पाठ्यक्रम के हिसाब से पढ़ाई करनी चाहिए। अखबार, मैगजीन व किताबों को इसमें अहम योगदान है। ऐसे लोगों को बारी-बारी से अलग-अलग किताबें पढ़ते रहना चाहिए, ताकि सामान्य ज्ञान बढ़ता रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के लिए अहम है। वह इस पद पर रहकर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा देकर उन्हें शिक्षित बनाना चाहती हैं।
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नौकायान में ग्रामीण बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए गजेंद्र दे रहे प्रशिक्षण
जिले के गांव कुंड निवासी 26 वर्षीय गजेंद्र राव ने नौकायान में पहली बार नेशनल प्रतियोगिता में खेलते हुए कांस्य पद जीता। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पैरा कमांडो के पद पर तैनात गजेंद्र का सपना है कि वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही गोल्ड जीतें। सामान्य परिवार से संबंध रखने वाले गजेंद्र बचपन से ही खेलों में हिस्सा लेते रहे हैं, लेकिन भर्ती होने के बाद उन्होंने नौकायान के लिए अभ्यास शुरू किया और नेशनल में अपनी प्रतिभा दिखाई। गजेंद्र राव का कहना है कि वह ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को नौकायान खेल में प्रशिक्षण दे रहा है। उसका लक्ष्य है कि क्षेत्र के बच्चों को इस खेल में आगे बढ़ाए।

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बेटियां खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर देश का नाम करें रोशन : सुषमा
गांव मुरलीपुर निवासी 22 वर्षीय सुषमा यादव ने बॉक्सिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पदक जीते हैं। वर्ष 2014 से बॉक्सिंग में पंच मारने वाली सुषमा को खेल के दम पर ही वर्ष 2019 में आटीबीपी में नौकरी मिली। नौकरी मिलने के बाद वह छुट्टियों में राजीव गांधी खेल स्टेडियम कोसली में बच्चों को बॉक्सिंग केे गुर सिखाती हैं। स्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने वाली सुषमा सामान्य परिवार से संबंध रखती हैं। वह शुरू से ही बॉक्सिंग में रुचि रखती थीं। वह यूथ एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। मार्च में आयोजित होने वाले वर्ल्ड चैंपियनशिप के ट्रायल के लिए वह इंडिया कैंप में हैं। सुषमा का कहना है कि वह ग्रामीण क्षेत्र से आती हैं, जहां लोग अपनी बेटियों केे खेलों में कम भेजते हैं, लेकिन वह अपने आसपास के गांवों की बेटियों व उनके अभिभावकों को खेलों के प्रति जागरूक कर रही हैं। वह चाहती हैं कि बेटियां अधिक संख्या में प्रतियोगिताओं में भाग लेकर देश का नाम रोशन करें।
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