फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   worse condition got in Swakshata Sarvekshan in Rewari

दो लाख में से महज दो लोगों ने डाउनलोड किया स्वच्छता ऐप, फीडबैक में भी फिसड्डी

Fri, 10 Jan 2020 11:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 11:42 PM IST
विज्ञापन
worse condition got in Swakshata Sarvekshan in Rewari
सर्वेक्षण के दौरान सवाल पूछते टीम का सदस्य। - फोटो : Rewari
चार जनवरी से प्रदेश भर में शहरी विकास मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 शुरू हो चुका है। कुल 6 हजार में से 1500 अंक सिटीजन फीडबैक, स्वच्छता ऐप डाउनलोड करने, वोट फॉर योर सिटी एप व कॉल कर फीडबैक के दिए जाने हैं। लेकिन जिले की रेवाड़ी नगर परिषद (नप) के साथ धारूहेड़ा व बावल नगर पालिकाएं (नपा) सभी मामलों में फिसड्डी हैं।
विज्ञापन

रेवाड़ी नप की बात करें तो यहां करीब दो लाख की आबादी वाले शहर में महज दो लोगों ने स्वच्छता एप डाउनलोड किया है। वहीं मंत्रालय के सिटीजन फीडबैक पोर्टल पर अपनी राय देने वालों में महज 37 लोग शामिल हैं। धारूहेड़ा व बावल नपा में एक भी व्यक्ति ने स्वच्छता ऐप डाउनलोड नहीं किया। वहीं फीडबैक भी महज एक-एक व्यक्ति ने ही दिया है।
विज्ञापन

वोट फोर योर सिटी एप में सहकारिता मंत्री का कस्बा फिसड्डी
स्मार्ट फोन के प्ले स्टोर में जाकर वोट फॉर योर सिटी ऐप के माध्यम से भी लोग अपनी राय शहर की स्वच्छता के बारे में दे सकते हैं। लेकिन यहां पर भी हालात कुछ ज्यादा अच्छे नहीं हैं। प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल के कस्बे बावल की नपा में महज 16 लोगों ने इस एप को डाउनलोड किया है। धारूहेड़ा में 89 व रेवाड़ी नप में 237 लोग की ऐप डाउनलोड करने के लिए आगे आए।
विज्ञापन
विज्ञापन

1996 पर कॉल कर दे सकते हैं फीडबैक, अभी तक एक भी नहीं
सिटीजन फीडबैक के तहत आईवीआर नंबर 1996 पर कॉल पर भी शहर के नागरिक अपना फीडबैक दे सकते हैं। तीनों नगर निकायों की बात करें तो एक भी व्यक्ति ने कॉल कर फीडबैक नहीं दिया। इसका एक बड़ा कारण लोगों को इसकी जानकारी नहीं होना है। लेकिन लोगों को जानकारी देना भी नप अधिकारियों का जिम्मा था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

सवाल: क्या गलत फीडबैक के डर से बचना चाहते हैं जिम्मेदार
शहर के सेक्टर-1, 3 व 4 में ठेकेदार के 60 सफाईकर्मी सफाई कार्यों में लगे हुए हैं। जबकि शहर के अंदर व बाहरी कॉलोनियों में स्थायी व डीसी रेट पर लगे हुए करीब 320 सफाई कर्मचारियों पर हर रोज सफाई का जिम्मा होता है। सेक्टर को छोड़ दिया जाए तो पुराने शहर व बाहरी कॉलोनियों के लोगों में सफाई नहीं होने से जिम्मेदारों के प्रति रोष है। कई ऐसी गलियां है, जहां पर सफाई कर्मचारी 10 से 12 दिन में एक बार पहुंचते हैं। ऐसे में यदि यहां के लोग सर्वे में अपने राय देंगे तो उनकी राय क्या होगी आसानी से समझा जा सकता है। ऐसे में सवाल है कि आखिर क्या नगर निकाय अधिकारी लोगों को सर्वे से दूर रखना चाहते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो शहर के लोगों को सर्वे के बारे में जानकारी होती। क्योंकि आम आदमी तो दूर शहर के पार्षदों को सर्वेक्षण के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। पार्षदों का आरोप है कि नप अधिकारियों की ओर से उनको किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी गई है। या फिर नप अधिकारी लोगों तक सर्वे की जानकारी ही नहीं देना चाहते हैं, क्योंकि सेक्टर व पार्षदों के घरों के आसपास के स्थानों को छोड़ दिया जाए तो अभी भी सफाई कर्मी गलियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed