{"_id":"28889661508564be7df197b2c9a1b366","slug":"will-not-give-an-inch-of-land","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक इंच भी नहीं देंगे जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक इंच भी नहीं देंगे जमीन
रेवाड़ी
Updated Mon, 19 May 2014 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली-मुंबई इंडिस्ट्रयल कॉरिडोर पर विकसित किये जाने औद्योगिक क्षेत्र के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के खिलाफ किसानों ने सरकार से साफ शब्दों में कहा कि वह इसके लिए एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। किसान मुआवजा राशि का भी बहिष्कार करेंगे।
रविवार को बावल क्षेत्र के प्रभावित 16 गांवों सहित आसपास के गांवों की पातूहेड़ा में आयोजित हुई महापंचायत में किसानों ने यह निर्णय लिया हालांकि महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत को आना था लेकिन वह किन्हीं कारणों से नहीं आ पाए और उनके स्थान भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव राजपाल शर्मा ने ही किसानों को संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार साफ तौर से एक कंपनी की तरह काम कर रही है और यह सब उद्योगपतियों के हितों के लिए किये जा रहे हैं। यदि सरकार ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। महापंचायत की अध्यक्षता करते हुए प्रताप सिंह बणीपुर ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संघर्ष समिति अंतिम दम तक अपनी यह लड़ाई जारी रखेगी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में किसानों को पूरी तरह से गुमराह करके केवल उद्योगपतियों के हितों की पैरवी कर रही है। अब तक हुई छह-सात दौर की वार्ता के बाद भी सरकार किसानों की बात सुनने की बजाय अपनी ही नीतियां थोपने पर लगी हुई है। सरकार अब इस नीति में कामयाब नहीं हो रही तो आसपास के गांवों के लोगों को गुमराह करने के साथ किसानों में भी फूट डालने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने साफ कहा कि किसान किसी भी तरह से सरकार के बहकावे में नहीं आए और संघर्ष समिति अपने मकसद में जरूर कामयाब होगी। अखिल भारतीय किसान यूनियन के महासचिव राजपाल शर्मा और राज्य किसान यूनियन के अध्यक्ष शमशेर सिंह दहिया ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक किसी जमीन का अवार्ड नही हो जाता तब तक किसान उस जमीन का मालिक है। किसानों की सहमति के बिना जबरन भूमि अधिग्रहण नही किया जा सकता। प्रदेश में 76 हजार एकड़ भूमि का विभिन्न स्थानों पर विकास के नाम पर भूमि अधिग्रहण किया गया है जबकि जनहित से संबंधित कार्यों के लिए केवल 24 हजार एकड़ जमीन का ही उपयोग किया गया है शेष 52 हजार एकड़ जमीन बेकार पड़ी हुई है। सरकार किसानों को बर्बाद करने में लगी हुई है।
भूमि अधिग्रहण विरोध संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष रामकिशन महलावत ने कहा कि सरकार सेक्शन चार, छह व सात के नोटिस रद नहीं करती, तब तक उसके प्रतिनिधियों से अब आगे कोई बातचीत नहीं की जाएगी। समिति का संघर्ष जब तक जारी रहेगा तब तक इस जमीन को अधिग्रहण से मुक्त नहीं किया जाएगा। यदि अधिग्रहण किया जाना है तो नई अधिग्रहण नीति के तहत किसानों की सहमति के साथ किया जाए।
अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो किसान बड़ा आंदोलन करेंगे। महापंचायत को चौ. माडाराम प्राणपुरा, रणधीर सिंह कापडीवास, गीता बासदूधा, सुभाष छाबडी, कन्हैया लाल राणौली, आजाद सिंह मेवका, कर्नल जी आर चौकन, कृष्ण जेलदार, बने सिंह, रामचंद्र टीकला, जयसिंह, शिव यादव के अलावा गुड़गांव, मेवात व अलवर के किसानों ने भाग लिया।
क्या है मामला
राज्य सरकार ने जिले के बावल क्षेत्र के इन गांवों से गुजरने वाले दिल्ली-जयपुर-मुंबई इंडिस्ट्रियल कॉरिडोर में औद्योगिक क्षेत्र के लिए 3700 एकड़ जमीन अधिग्रहण की कार्ययोजना तैयार की हुई है। इस योजना के मानेसर-बावल आईएमटी में भी उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ यहां पर नए शहरों के भी बसाने की योजना बना हुई है।
जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार की नई नीति के तहत जमीन का अधिग्रहण किया जाए। यह आंदोलन दो बार हिंसक रूप भी ले चुका है। 16 जुलाई 2012 को जिला सचिवालय में पहुंचे किसानों ने सुनवाई नहीं होने से खफा होकर तोड़फोड़ कर डाली थी जिसमें कर्मचारियों और किसानों के बीच जमकर पत्थरबाजी भी हुई थी। पुलिस की ओर से इस पर मामला दर्ज करने के विरोध में जब 22 जुलाई 2012 को आसलवास गांव में महापंचायत आयोजित की जा रही थी तब भी यह आंदोलन हिंसक हो गया था।
विज्ञापन
रविवार को बावल क्षेत्र के प्रभावित 16 गांवों सहित आसपास के गांवों की पातूहेड़ा में आयोजित हुई महापंचायत में किसानों ने यह निर्णय लिया हालांकि महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत को आना था लेकिन वह किन्हीं कारणों से नहीं आ पाए और उनके स्थान भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव राजपाल शर्मा ने ही किसानों को संबोधित किया।
विज्ञापन
वक्ताओं ने कहा कि सरकार साफ तौर से एक कंपनी की तरह काम कर रही है और यह सब उद्योगपतियों के हितों के लिए किये जा रहे हैं। यदि सरकार ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। महापंचायत की अध्यक्षता करते हुए प्रताप सिंह बणीपुर ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संघर्ष समिति अंतिम दम तक अपनी यह लड़ाई जारी रखेगी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में किसानों को पूरी तरह से गुमराह करके केवल उद्योगपतियों के हितों की पैरवी कर रही है। अब तक हुई छह-सात दौर की वार्ता के बाद भी सरकार किसानों की बात सुनने की बजाय अपनी ही नीतियां थोपने पर लगी हुई है। सरकार अब इस नीति में कामयाब नहीं हो रही तो आसपास के गांवों के लोगों को गुमराह करने के साथ किसानों में भी फूट डालने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने साफ कहा कि किसान किसी भी तरह से सरकार के बहकावे में नहीं आए और संघर्ष समिति अपने मकसद में जरूर कामयाब होगी। अखिल भारतीय किसान यूनियन के महासचिव राजपाल शर्मा और राज्य किसान यूनियन के अध्यक्ष शमशेर सिंह दहिया ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक किसी जमीन का अवार्ड नही हो जाता तब तक किसान उस जमीन का मालिक है। किसानों की सहमति के बिना जबरन भूमि अधिग्रहण नही किया जा सकता। प्रदेश में 76 हजार एकड़ भूमि का विभिन्न स्थानों पर विकास के नाम पर भूमि अधिग्रहण किया गया है जबकि जनहित से संबंधित कार्यों के लिए केवल 24 हजार एकड़ जमीन का ही उपयोग किया गया है शेष 52 हजार एकड़ जमीन बेकार पड़ी हुई है। सरकार किसानों को बर्बाद करने में लगी हुई है।
भूमि अधिग्रहण विरोध संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष रामकिशन महलावत ने कहा कि सरकार सेक्शन चार, छह व सात के नोटिस रद नहीं करती, तब तक उसके प्रतिनिधियों से अब आगे कोई बातचीत नहीं की जाएगी। समिति का संघर्ष जब तक जारी रहेगा तब तक इस जमीन को अधिग्रहण से मुक्त नहीं किया जाएगा। यदि अधिग्रहण किया जाना है तो नई अधिग्रहण नीति के तहत किसानों की सहमति के साथ किया जाए।
अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो किसान बड़ा आंदोलन करेंगे। महापंचायत को चौ. माडाराम प्राणपुरा, रणधीर सिंह कापडीवास, गीता बासदूधा, सुभाष छाबडी, कन्हैया लाल राणौली, आजाद सिंह मेवका, कर्नल जी आर चौकन, कृष्ण जेलदार, बने सिंह, रामचंद्र टीकला, जयसिंह, शिव यादव के अलावा गुड़गांव, मेवात व अलवर के किसानों ने भाग लिया।
क्या है मामला
राज्य सरकार ने जिले के बावल क्षेत्र के इन गांवों से गुजरने वाले दिल्ली-जयपुर-मुंबई इंडिस्ट्रियल कॉरिडोर में औद्योगिक क्षेत्र के लिए 3700 एकड़ जमीन अधिग्रहण की कार्ययोजना तैयार की हुई है। इस योजना के मानेसर-बावल आईएमटी में भी उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ यहां पर नए शहरों के भी बसाने की योजना बना हुई है।
जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार की नई नीति के तहत जमीन का अधिग्रहण किया जाए। यह आंदोलन दो बार हिंसक रूप भी ले चुका है। 16 जुलाई 2012 को जिला सचिवालय में पहुंचे किसानों ने सुनवाई नहीं होने से खफा होकर तोड़फोड़ कर डाली थी जिसमें कर्मचारियों और किसानों के बीच जमकर पत्थरबाजी भी हुई थी। पुलिस की ओर से इस पर मामला दर्ज करने के विरोध में जब 22 जुलाई 2012 को आसलवास गांव में महापंचायत आयोजित की जा रही थी तब भी यह आंदोलन हिंसक हो गया था।