{"_id":"660b09379b278bc169083c66","slug":"will-have-to-wait-for-water-for-two-more-days-rewari-news-c-198-1-rew1003-202716-2024-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: पानी के लिए दो दिन और करना पड़ेगा इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: पानी के लिए दो दिन और करना पड़ेगा इंतजार
Tue, 02 Apr 2024 12:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 02 Apr 2024 12:51 AM IST
विज्ञापन
रेवाड़ी। शहर की तीन लाख की आबादी को पानी के लिए दो दिन और इंतजार करना पड़ेगा। सिंचाई विभाग के पास 31 मार्च को पानी आने का शेड्यूल आया था, लेकिन अब चार अप्रैल तक पानी छोड़े जाने का शेड्यूल जारी किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जेएलएन नहर में 6 मार्च को पानी आना बंद हुआ था। शेड्यूल के पानी 31 मार्च को आना था।
दरअसल शहर की जरूरत पूरी करने के लिए जवाहरलाल नेहरू नहर में भले ही पर्याप्त मात्रा पानी मिल रहा हो, लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल स्टोरेज करने के लिए पूरे इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में अब गर्मी के दिनों में फिर से शहरवासियों को पीने के पानी के लिए संकट झेलना पड़ेगा। कालाका में अभी सिर्फ 5 वाटर टैंक हैं, लेकिन टैंकों में इतना ही पानी स्टोरेज हो पाता है कि शहर के लोगों को 15 से 20 दिन ही पानी मिल सके। 70 फीसदी शहर को अक्सर पानी की समस्या उठानी पड़ती है। यदि कालाका से होने वाली सप्लाई के लिए एक अतिरिक्त वाटर टैंक का निर्माण हो जाए तो शहरवासियों को पानी की समस्या के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार वाटर टैंक के लिए पिछले कई सालों से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। नजदीक के कई गांवों में जमीन देखी गई। उन गांवों में ही नागरिक अस्पताल और राजकीय कॉलेज के लिए जमीन देखी जा रही थी। ग्रामीणों की पहली प्राथमिकता ये दोनों संस्थान थे। ऐसे में वाटर टैंक के लिए हर जगह कोई न कोई रोड़ा अटक जाता। अब नागरिक अस्पताल और कॉलेज के लिए जमीन फाइनल हो गई है। उम्मीद है कि अब वाटर टैंक के लिए जमीन मिल सकती है। वाटर टैंक के लिए लगभग 30 एकड़ जमीन चाहिए।
विज्ञापन
शहर में हर रोज 2 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी की खपत होती है। दोनों जगह से पानी की सप्लाई के लिए कॉलोनियों में बूस्टिंग स्टेशन बने हैं। इन बूस्टिंग स्टेशनों के जरिए ही कॉलोनियों में पानी की सप्लाई मिलती है।
इंसेट
एक अतिरिक्त वाटर टैंक बनना जरूरी
शहर के 70 प्रतिशत हिस्से को कालाका जलघर से पानी की सप्लाई की जाती है। इस हिस्से में पेयजल सप्लाई के लिए फिलहाल कालाका में 5 वाटर टैंकों का निर्माण किया गया है। जिनकी स्टोरेज क्षमता 680 लाख गैलन की है। स्टोरेज पानी से शहर को ज्यादा से ज्यादा 15 से 20 दिन नियमित पानी सप्लाई हो सकती है, लेकिन गर्मी के दिनों में नहरी शेड्यूल में थोड़ी गड़बड़ी होने पर शहर में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में अगर एक और अतिरिक्त टैंक निर्माण हो जाए तो शहर में पीने के पानी की समस्या नहीं रहेगी। फिलहाल भगवानपुर में टैंक निर्माण के लिए जमीन देखी गई है, उम्मीद है कि जल्द मसला सिरे चढ़ सकता है।
टैंकों की क्षमता : कालाका जलघर
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
- टैंक नंबर 1- 134.22 लाख गैलन
- टैंक नंबर 2- 140.72 लाख गैलन
- टैंक नंबर 3- 120.96 लाख गैलन
- टैंक नंबर 4- 103.31 लाख गैलन
- टैंक नंबर 5- 180.91 लाख गैलन
वर्जन
नहर में 31 मार्च को पानी आना था, लेकिन अचानक शेड्यूल में बदलाव होने के कारण शहरवासियों को 4 अप्रैल तक पानी आने का इंतजार करना पड़ेगा। लोगों से अपील है कि पानी को व्यर्थ न बहाएं।- हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग, रेवाड़ी
विज्ञापन
दरअसल शहर की जरूरत पूरी करने के लिए जवाहरलाल नेहरू नहर में भले ही पर्याप्त मात्रा पानी मिल रहा हो, लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल स्टोरेज करने के लिए पूरे इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में अब गर्मी के दिनों में फिर से शहरवासियों को पीने के पानी के लिए संकट झेलना पड़ेगा। कालाका में अभी सिर्फ 5 वाटर टैंक हैं, लेकिन टैंकों में इतना ही पानी स्टोरेज हो पाता है कि शहर के लोगों को 15 से 20 दिन ही पानी मिल सके। 70 फीसदी शहर को अक्सर पानी की समस्या उठानी पड़ती है। यदि कालाका से होने वाली सप्लाई के लिए एक अतिरिक्त वाटर टैंक का निर्माण हो जाए तो शहरवासियों को पानी की समस्या के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार वाटर टैंक के लिए पिछले कई सालों से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। नजदीक के कई गांवों में जमीन देखी गई। उन गांवों में ही नागरिक अस्पताल और राजकीय कॉलेज के लिए जमीन देखी जा रही थी। ग्रामीणों की पहली प्राथमिकता ये दोनों संस्थान थे। ऐसे में वाटर टैंक के लिए हर जगह कोई न कोई रोड़ा अटक जाता। अब नागरिक अस्पताल और कॉलेज के लिए जमीन फाइनल हो गई है। उम्मीद है कि अब वाटर टैंक के लिए जमीन मिल सकती है। वाटर टैंक के लिए लगभग 30 एकड़ जमीन चाहिए।
विज्ञापन
शहर में हर रोज 2 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी की खपत होती है। दोनों जगह से पानी की सप्लाई के लिए कॉलोनियों में बूस्टिंग स्टेशन बने हैं। इन बूस्टिंग स्टेशनों के जरिए ही कॉलोनियों में पानी की सप्लाई मिलती है।
इंसेट
एक अतिरिक्त वाटर टैंक बनना जरूरी
शहर के 70 प्रतिशत हिस्से को कालाका जलघर से पानी की सप्लाई की जाती है। इस हिस्से में पेयजल सप्लाई के लिए फिलहाल कालाका में 5 वाटर टैंकों का निर्माण किया गया है। जिनकी स्टोरेज क्षमता 680 लाख गैलन की है। स्टोरेज पानी से शहर को ज्यादा से ज्यादा 15 से 20 दिन नियमित पानी सप्लाई हो सकती है, लेकिन गर्मी के दिनों में नहरी शेड्यूल में थोड़ी गड़बड़ी होने पर शहर में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में अगर एक और अतिरिक्त टैंक निर्माण हो जाए तो शहर में पीने के पानी की समस्या नहीं रहेगी। फिलहाल भगवानपुर में टैंक निर्माण के लिए जमीन देखी गई है, उम्मीद है कि जल्द मसला सिरे चढ़ सकता है।
टैंकों की क्षमता : कालाका जलघर
- टैंक नंबर 1- 134.22 लाख गैलन
- टैंक नंबर 2- 140.72 लाख गैलन
- टैंक नंबर 3- 120.96 लाख गैलन
- टैंक नंबर 4- 103.31 लाख गैलन
- टैंक नंबर 5- 180.91 लाख गैलन
वर्जन
नहर में 31 मार्च को पानी आना था, लेकिन अचानक शेड्यूल में बदलाव होने के कारण शहरवासियों को 4 अप्रैल तक पानी आने का इंतजार करना पड़ेगा। लोगों से अपील है कि पानी को व्यर्थ न बहाएं।- हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग, रेवाड़ी