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सींचेवाला विधि से दूषित पानी को बनाया जाएगा सिंचाई योग्य
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ठोठवाल गांव में सीचेवाले मॉडल पर तैयार कुंए।
- फोटो : Rewari
घरों से निकलने वाले पानी को सींचे वाला विधि से फिल्टर कर सिंचाई योग्य बनाया जाएगा। प्रशासन की ओर से पहले चरण में 14 गांवों को शामिल किया गया है। लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत इस प्रक्रिया से भूजल खराब होने से बचेगा साथ ही फसलों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा। डीसी यशेंद्र सिंह ने कहा कि दूषित पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा पहले चरण में रेवाड़ी जिले के खुशपुरा, रसूूली, गाजी गोपालपुर, खिजुरी, ईबराहिमपुर, बास, बिसौवा, ठोठवाल, खड़गवास, छुरियावास, जाटूवास, आकेड़ा, कापडीवास व बैरियावास गांव में सींचेवाला मॉडल लगाया जा रहा है। इससे इन गांवों में बहने वाले नालियों के दूषित पानी को खेती योग्य बनाया जाएगा।
गलियों में नहीं दिखेगा दूषित पानी
डीसी ने कहा कि इस योजना के कई लाभ हैं। पहला गांव की गलियों में दूषित पानी के भराव से निजात मिल जाएगी। डीसी ने बताया कि पंजाब सूबे के सीचेवाला मॉडल से दूषित पानी को शुद्ध करके खेती उपयुक्त बनाया जा रहा है। पंचायती राज विभाग हरियाणा पंजाब के सींचे वाला मॉडल की तर्ज पर उपरोक्त गांवों के गंदे पानी को फिल्टर कर खेतों तक पहुंचायेगा। डीसी ने बताया कि घरों से निकलने वाला दूषित पानी जगह-जगह एकत्रित होता है इसे एक जगह एकत्रित कर शुद्ध किया जाएगा। जिसमें लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट का काम किया जाएगा।
गंदे पानी को ट्रीट करने का मैथड़ सींचे वाला विधि
सामान्य रूप से गंदे पानी की बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 150 से 300 तक होती है। इसे सींचेवाला मॉडल से शुद्ध करने की तकनीक अपनाकर इस पानी की बीओडी 18 से 20 तक आ जाएगी। यह खेती के लिए उपयुक्त है। इस पानी को खेती के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। गौरतलब है कि रेवाडी और गुरुग्राम जिला के पंचायती राज विभाग के उपमंडल अभियंता व कनिष्ट अभियंताओं ने पंजाब जाकर इस मॉडल को बारीकि से देखा और इसके बारे में जानकारी हासिल की। रेवाड़ी जिले में इस पर काम करने की अनुमति ली। पंजाब के संत बलबीर सिंह सींचेवाला ने सबसे पहले गन्दे पानी की शुद्धिकरण के लिए इस पर काफी काम किया, उनके इस काम की केन्द्रीय मंत्री और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने काफी सराहा।
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इस तरह से काम करेगा मॉडल
डीसी ने बताया कि सींचेवाला मॉडल पर सामान्य रूप से आठ बाई आठ की परिधि के तीन कुएं बनाए जाएंगे, जिनकी गहराई भिन्न होगी। घरों का गन्दा पानी सबसे पहले एक पिट तक ले जाया जाएगा। यह पिट आठ फीट गहराई की होगी। इस पिट में जहां से दूषित पानी गिरेगा वहां पर लोहे की एक जाली लगाई जाएगी जिसमें मोटा कूड़ा और पॉलिथीन रुक जाएगी। इसके बाद पानी पहले कुएं में जाएगा। जिसमें गंदगी रुक जाएगी, दूसरे कुएं में साफ पानी जाएगा जिसमें चिकनाई समाप्त हो जाएगी। यहां ऑक्सीडाईजेशन सिस्टम के तहत पानी घूमेगा यहां से पानी तीसरे कुएं में जाएगा यहां भी ऑक्सीडाईजेशन होगा। साफ पानी को खेतों तक पहुंचाने के लिए एक डीजल पंप लगाया जाएगा।
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गलियों में नहीं दिखेगा दूषित पानी
डीसी ने कहा कि इस योजना के कई लाभ हैं। पहला गांव की गलियों में दूषित पानी के भराव से निजात मिल जाएगी। डीसी ने बताया कि पंजाब सूबे के सीचेवाला मॉडल से दूषित पानी को शुद्ध करके खेती उपयुक्त बनाया जा रहा है। पंचायती राज विभाग हरियाणा पंजाब के सींचे वाला मॉडल की तर्ज पर उपरोक्त गांवों के गंदे पानी को फिल्टर कर खेतों तक पहुंचायेगा। डीसी ने बताया कि घरों से निकलने वाला दूषित पानी जगह-जगह एकत्रित होता है इसे एक जगह एकत्रित कर शुद्ध किया जाएगा। जिसमें लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट का काम किया जाएगा।
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गंदे पानी को ट्रीट करने का मैथड़ सींचे वाला विधि
सामान्य रूप से गंदे पानी की बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 150 से 300 तक होती है। इसे सींचेवाला मॉडल से शुद्ध करने की तकनीक अपनाकर इस पानी की बीओडी 18 से 20 तक आ जाएगी। यह खेती के लिए उपयुक्त है। इस पानी को खेती के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। गौरतलब है कि रेवाडी और गुरुग्राम जिला के पंचायती राज विभाग के उपमंडल अभियंता व कनिष्ट अभियंताओं ने पंजाब जाकर इस मॉडल को बारीकि से देखा और इसके बारे में जानकारी हासिल की। रेवाड़ी जिले में इस पर काम करने की अनुमति ली। पंजाब के संत बलबीर सिंह सींचेवाला ने सबसे पहले गन्दे पानी की शुद्धिकरण के लिए इस पर काफी काम किया, उनके इस काम की केन्द्रीय मंत्री और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने काफी सराहा।
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इस तरह से काम करेगा मॉडल
डीसी ने बताया कि सींचेवाला मॉडल पर सामान्य रूप से आठ बाई आठ की परिधि के तीन कुएं बनाए जाएंगे, जिनकी गहराई भिन्न होगी। घरों का गन्दा पानी सबसे पहले एक पिट तक ले जाया जाएगा। यह पिट आठ फीट गहराई की होगी। इस पिट में जहां से दूषित पानी गिरेगा वहां पर लोहे की एक जाली लगाई जाएगी जिसमें मोटा कूड़ा और पॉलिथीन रुक जाएगी। इसके बाद पानी पहले कुएं में जाएगा। जिसमें गंदगी रुक जाएगी, दूसरे कुएं में साफ पानी जाएगा जिसमें चिकनाई समाप्त हो जाएगी। यहां ऑक्सीडाईजेशन सिस्टम के तहत पानी घूमेगा यहां से पानी तीसरे कुएं में जाएगा यहां भी ऑक्सीडाईजेशन होगा। साफ पानी को खेतों तक पहुंचाने के लिए एक डीजल पंप लगाया जाएगा।