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राशनिंग के बावजूद शहर के पास महज एक दिन के लिए बचा पानी

Thu, 12 Mar 2020 11:45 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2020 11:45 PM IST
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Water Crices in Rewari
दिल्ली रोड स्थित जेएलएन पर बना पंप हाऊस, यहीं से कालका स्थित पांच जलघरों में भरा जाता है नहरी पानी? - फोटो : Rewari
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेयजल आपूर्ति में राशनिंग करने के बावजूद अब जिले के कालका व लिसाना के जलघरों में महज एक दिन का पानी बचा हुआ है। यदि 14 मार्च तक भी शहर में नहरी पानी नहीं पहुंचा तो पहले से परेशानी झेल रहे शहर के 31 वार्डों में रहने वाले 1.5 लाख से अधिक शहरवासियों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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बता दें कि 17 फरवरी के बाद 7 मार्च को शहर में नहरी पानी पहुंचना था। इसके बाद 11 मार्च कहा गया, लेकिन अब 14 मार्च सुबह तक नहरी पानी पहुंचने की बात कही जा रही है।
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पानीपत स्थित खुबडू हेड से 114 किमी. दूरी तय कर रेवाड़ी तक पहुंचने वाला नहरी पानी सिंचाई तो दूर भंडारण एवं तय मात्रा से कम मिलने के कारण रेवाड़ी के लोगों की प्यास तक नहीं बुझा पा रहा है। गांव कालाका में 1064 लाख गैलन के पांच वॉटर टैंक भंडारण के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके चलते बीते पांच साल से लगातार एक अतिरिक्त वाटर टैंक निर्माण की बात प्रशासन की ओर से कही जा रही है।
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कम पानी और रोस्टर बदलनेे से बढ़ी परेशानी
पश्चिम यमुना कैनाल प्रणाली से रेवाड़ी को चालीस दिन में 16 दिन नहरी पानी मिलने का रोस्टर बनाया है। सर्दी के मौसम में जहां पर 40 दिन में 25 दिन से ज्यादा नहरी पानी चलता था, वहीं बारिश के मौसम में लगातार नहरी पानी चला है। लेकिन बीते सालों की तरह मार्च शुरू होते ही रोस्टर बदल दिया गया। अब 40 दिनों में महज 16 दिन ही पानी मिल रहा है। झज्जर स्थित अकेड़ी पंप तक नहरी पानी 927 क्यूसेक प्रति सेकेंड की बजाय 600 क्यूसेक प्रति सेकेंड की दर से पानी पहुंचता है। इसका बड़ा कारण पंजाब सरकार की ओर से 32 की बजाय 18 एकड़ फीट पानी मिलना है। कम बहाव एवं मात्रा में कम मिलने के बावजूद पब्लिक हेल्थ विभाग की ओर से अतिरिक्त संसाधन जुटाकर पानी का भंडारण किया जाता है। लेकिन गांव कालाका में महज पांच वॉटर टैंक होने के चलते भंडारण पूरा नहीं हो पाता है।
शहर पूरी तरह नहरी पानी पर निर्भर
रेवाड़ी में पब्लिक हेल्थ एवं इंजीनियरिंग विभाग की ओर से शहर के 27 हजार घरों तक हर महीने करीब 45 हजार लाख लीटर पानी सप्लाई किया जाता है। इसमें झज्जर रोड स्थित गांव लिसाना से 80 लाख एवं कॉलाका से करीब 170 लाख लीटर पानी दिया जाता है। भू-जल स्तर बहुत नीचे एवं फ्लोराइडयुक्त होने के कारण शहर के लोगों के पास नहरी पानी के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है।

पटौदी रोड पर 6 एकड़ में होना था निर्माण
शहर के पटौदी रोड पर शहर के लिए पेयजल आपूर्ति के लिए अलग से पटौदी रोड पर 6 एकड़ मेें जलघर बनाया जाना था। लेकिन पांच साल से महज प्रोजेक्ट ही बन रहा है, एक ईंट तक जिम्मेदार नहीं लगा पाए हैं। जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता जितेंद्र हुड्डा ने बताया कि फाइल एस्टिमेट की फाइल तैयार कर चंडीगढ़ भेजी गई थी, लेकिन उसमें अड़चन लग गई। दोबारा से फाइल तैयार कर भेजी जाएगी। वहीं विभाग के जेई अशोक डागर ने बताया कि राशनिंग कर काम चलाया जा रहा है। सिंचाई विभाग की ओर से पहले 11 मार्च तक नहरी पानी आनेे की बात कही गई थी। अब उम्मीद है कि 14 मार्च तक नहरी पानी पहुंच जाएगा। राशनिंग कर दो दिन का ही काम चलाया जा सकता है। नहरी पानी नहीं आया तो परेशानी बढ़ सकती है।
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