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Rewari News: रेवाड़ी में जर्जर प्राथमिक स्कूल की दीवार गिरी, हादसा टला
Sun, 03 Aug 2025 01:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 03 Aug 2025 01:12 AM IST
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फोटो : 17प्राथमिक पाठशाला के भवन की गिरी दीवार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बावल (रेवाड़ी)। बावल के राजकीय प्राथमिक पाठशाला (सराय) के जर्जर भवन की दीवार शनिवार सुबह भरभराकर गिर गई। शुक्र रहा कि जिस वक्त हादसा हुआ, स्कूूल बंद था। इसका मलबा मकान तक पहुंच जाने से पड़ोसी जरूर दहल गए। चकित करने की बात है कि इसी पुराने भवन के चौथाई हिस्से की कामचलाऊ मरम्मत कराकर पढ़ाई कराई जा रही है।
स्कूल के पड़ोस में रहने वाले रमाकांत बताते हैं कि यह भवन प्राचीन सराय था। यहां स्कूल तो खोल दिया लेकिन देखभाल नहीं की गई। तीन दिनों से हो रही बारिश के कारण शनिवार सुबह करीब साढ़े छह बजे दीवार गिर गई। मलबा उनके घर तक आ गिरा। स्कूली बंद था और वह भी घर के अंदर, इसलिए कोई नुकसान नहीं हुआ।
रमाकांत के मुताबिक, स्कूल के जर्जर भवन गिरने का अंदेशा उन्होंने एसडीएम, नगर पालिका और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखे पत्रों मेें जताया था। कहा था, प्राथमिक पाठशाला के जर्जर भवन से अक्सर कुछ न कुछ गिरता रहता है। कई बार इसका मलबा उनके मकान पर गिरा भी है। लिहाजा, जहां बच्चे नहीं पढ़ते, उस हिस्से को गिरा दिया जाए।
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इनसेट
आठ साल पहले जर्जर घोषित, तीन कमरों में पढ़ रहे 220 बच्चे
यह स्कूल 8 साल पहले जर्जर घोषित किया जा चुका है। नया भवन बना नहीं। स्कूल चालू रहे, इसलिए दो साल पहले यहां के तीन कमरों की छतों की 6 लाख रुपये खर्च करके फौरी तौरपर मरम्मत करा दी गई। इन्हीं तीन कमरों में पहली से पांचवीं तक के 220 बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। यह कमरे पर्याप्त नहीं हैं। अधिकांश बच्चे गैरहाजिर भी रहते हैं क्योंकि उन्हें बैठने की जगह नहीं मिल पाती। न्बैहें ठने की पर्याप्त जगह ही नहीं है।
वर्जन:
स्कूल का नया भवन बनाना चाहिए। लोग इसकी लंबे समय से मांग भी करते आ रहे हैं। इसके बावजूद स्कूल की दशा नहीं सुधरी। इससे अभिभावकों में डर का माहौल है।
अर्जुन चौकन, उप प्रधान बावल नगर पालिका
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दो साल पहले स्कूल के तीन कमरों की मरम्मत कराई गई थी। वहीं पर बच्चे पढ़ा रहे हैं। पूरी तरह जर्जर कमरों में खतरा है और वहां बच्चों को नहीं जाने देते हैं। स्कूल की हालत को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र भी लिख चुका हूं। -समुंदर सिंह, हेड मास्टर, राजकीय प्राथमिक पाठशाला सराय
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बावल (रेवाड़ी)। बावल के राजकीय प्राथमिक पाठशाला (सराय) के जर्जर भवन की दीवार शनिवार सुबह भरभराकर गिर गई। शुक्र रहा कि जिस वक्त हादसा हुआ, स्कूूल बंद था। इसका मलबा मकान तक पहुंच जाने से पड़ोसी जरूर दहल गए। चकित करने की बात है कि इसी पुराने भवन के चौथाई हिस्से की कामचलाऊ मरम्मत कराकर पढ़ाई कराई जा रही है।
स्कूल के पड़ोस में रहने वाले रमाकांत बताते हैं कि यह भवन प्राचीन सराय था। यहां स्कूल तो खोल दिया लेकिन देखभाल नहीं की गई। तीन दिनों से हो रही बारिश के कारण शनिवार सुबह करीब साढ़े छह बजे दीवार गिर गई। मलबा उनके घर तक आ गिरा। स्कूली बंद था और वह भी घर के अंदर, इसलिए कोई नुकसान नहीं हुआ।
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रमाकांत के मुताबिक, स्कूल के जर्जर भवन गिरने का अंदेशा उन्होंने एसडीएम, नगर पालिका और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखे पत्रों मेें जताया था। कहा था, प्राथमिक पाठशाला के जर्जर भवन से अक्सर कुछ न कुछ गिरता रहता है। कई बार इसका मलबा उनके मकान पर गिरा भी है। लिहाजा, जहां बच्चे नहीं पढ़ते, उस हिस्से को गिरा दिया जाए।
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आठ साल पहले जर्जर घोषित, तीन कमरों में पढ़ रहे 220 बच्चे
यह स्कूल 8 साल पहले जर्जर घोषित किया जा चुका है। नया भवन बना नहीं। स्कूल चालू रहे, इसलिए दो साल पहले यहां के तीन कमरों की छतों की 6 लाख रुपये खर्च करके फौरी तौरपर मरम्मत करा दी गई। इन्हीं तीन कमरों में पहली से पांचवीं तक के 220 बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। यह कमरे पर्याप्त नहीं हैं। अधिकांश बच्चे गैरहाजिर भी रहते हैं क्योंकि उन्हें बैठने की जगह नहीं मिल पाती। न्बैहें ठने की पर्याप्त जगह ही नहीं है।
वर्जन:
स्कूल का नया भवन बनाना चाहिए। लोग इसकी लंबे समय से मांग भी करते आ रहे हैं। इसके बावजूद स्कूल की दशा नहीं सुधरी। इससे अभिभावकों में डर का माहौल है।
अर्जुन चौकन, उप प्रधान बावल नगर पालिका
दो साल पहले स्कूल के तीन कमरों की मरम्मत कराई गई थी। वहीं पर बच्चे पढ़ा रहे हैं। पूरी तरह जर्जर कमरों में खतरा है और वहां बच्चों को नहीं जाने देते हैं। स्कूल की हालत को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र भी लिख चुका हूं। -समुंदर सिंह, हेड मास्टर, राजकीय प्राथमिक पाठशाला सराय