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निर्दलीय पार्षदों के भाजपा को समर्थन देने से मतदाता आहत : राजेंद्र
Fri, 15 May 2026 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 15 May 2026 11:44 PM IST
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रेवाड़ी। एसयूसीआई कम्युनिस्ट के राज्य सचिव राजेंद्र ने कहा कि नगर परिषद के चुनाव में जीते 19 निर्दलीय पार्षदों की ओर से भाजपा को समर्थन देने से मतदाओं की भावना आहत हुई है।
उन्होंने कहा कि नगर परिषद चुनाव में भाजपा को चेयरपर्सन पद मिला। 12 पार्षद भाजपा, 19 निर्दलीय और एक कांग्रेस समर्थित पार्षद उम्मीदवार विजयी हुआ। चुनाव जीतने के तुरंत बाद अधिकांश निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा के समर्थन में चले गए जिससे मतदाताओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
राजेंद्र सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि विपक्ष कमजोर हो जाए तो जनहित के मुद्दों पर सरकार पर अंकुश लगाना मुश्किल हो जाता है।
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उन्होंने सवाल उठाया कि जिन मतदाताओं ने भाजपा के विरोध में मतदान कर निर्दलीय उम्मीदवारों को जिताया, उन्हीं पार्षदों का बाद में भाजपा के साथ जाना जनता के जनादेश का अपमान है।
उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों के नाम पर सत्ता पक्ष के साथ खड़ा होना लोकतंत्र की मजबूरी नहीं है। यदि निर्दलीय पार्षद एकजुट रहते तो वे शहर के विकास और पारदर्शी प्रशासन का नया उदाहरण पेश कर सकते थे। पार्षदों के इस फैसले से नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि नगर परिषद चुनाव में भाजपा को चेयरपर्सन पद मिला। 12 पार्षद भाजपा, 19 निर्दलीय और एक कांग्रेस समर्थित पार्षद उम्मीदवार विजयी हुआ। चुनाव जीतने के तुरंत बाद अधिकांश निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा के समर्थन में चले गए जिससे मतदाताओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
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राजेंद्र सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि विपक्ष कमजोर हो जाए तो जनहित के मुद्दों पर सरकार पर अंकुश लगाना मुश्किल हो जाता है।
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उन्होंने सवाल उठाया कि जिन मतदाताओं ने भाजपा के विरोध में मतदान कर निर्दलीय उम्मीदवारों को जिताया, उन्हीं पार्षदों का बाद में भाजपा के साथ जाना जनता के जनादेश का अपमान है।
उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों के नाम पर सत्ता पक्ष के साथ खड़ा होना लोकतंत्र की मजबूरी नहीं है। यदि निर्दलीय पार्षद एकजुट रहते तो वे शहर के विकास और पारदर्शी प्रशासन का नया उदाहरण पेश कर सकते थे। पार्षदों के इस फैसले से नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।