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ग्रामीण बनेंगे पुलिस के ‘सहायक’, अपराध पर रखेंगे निगरानी
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रेवाड़ी। पुलिस के सहायक रूप में ग्रामीण काम करेंगे। साथ ही वे अपराध पर निगरानी रखेंगे। साथ ही समय रहते पुलिस को सूचना देकर आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाएंगे। इसे लेकर ग्रामीण समन्वय कमेटियां बननी शुरू हो गईं हैं। वहीं, चौकीदारों की बैठकों का दौर भी जारी हो चुका है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्दी के मौसम में आपराधिक वारदात पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ग्रामीणों की समन्वय कमेटियां बनाने में जुटी हुई है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों से जुड़े प्रतिनिधियों, पंच-सरपंच, नंबरदार, चौकीदार तथा प्रबुद्घ लोगों को कमेटी के दायरे में लाने का निर्णय लिया है। अहम बात यह है कि इस संबंध में थाना स्तर पर ग्रामीण चौकीदारों की बैठकें संबंधित एसएचओ और डीएसपी के माध्यम से बुलाकर उनमें पुलिस विभाग अपनी बात रख चुका है। इन बैठकों में साफ तौर पर ग्रामीण चौकीदारों को पुलिस विभाग की आंख-कान बनकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
56 गांवों में बना दी समन्वय कमेटी
बावल थाना अंतर्गत 59 गांव हैं, जिनमें एक बे-चिराग है। 58 गांवों में से 56 में समन्वय कमेटियां बना दी गई हैं। इनके सहयोग से पुलिस को अपराध से जुड़ी सूचनाएं मिलने और गांवों में आपसी भाईचारा कायम रखने में मदद मिलेगी।
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-बिजेंद्र सिंह, एसएचओ बावल।
असामाजिक तत्वों पर निगरानी बनाए रखने के लिए ग्रामीणों का सहयोग जरूरी है। इसके बिना सभी जगहों पर निगरानी रखना मुश्किल काम है। ग्रामीणों के साथ समन्वय कमेटी बनाने का काम चल रहा है। गांवों में अपराध से जुड़ी हर सूचना पुलिस के पास पहुंच पाए और समय रहते अपराध पर अंकुश लगाया जा सके। इसके लिए एसपी के आदेश पर ऐसा हो रहा है।
-राजेश कुमार डीएसपी बावल।
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जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्दी के मौसम में आपराधिक वारदात पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ग्रामीणों की समन्वय कमेटियां बनाने में जुटी हुई है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों से जुड़े प्रतिनिधियों, पंच-सरपंच, नंबरदार, चौकीदार तथा प्रबुद्घ लोगों को कमेटी के दायरे में लाने का निर्णय लिया है। अहम बात यह है कि इस संबंध में थाना स्तर पर ग्रामीण चौकीदारों की बैठकें संबंधित एसएचओ और डीएसपी के माध्यम से बुलाकर उनमें पुलिस विभाग अपनी बात रख चुका है। इन बैठकों में साफ तौर पर ग्रामीण चौकीदारों को पुलिस विभाग की आंख-कान बनकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
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56 गांवों में बना दी समन्वय कमेटी
बावल थाना अंतर्गत 59 गांव हैं, जिनमें एक बे-चिराग है। 58 गांवों में से 56 में समन्वय कमेटियां बना दी गई हैं। इनके सहयोग से पुलिस को अपराध से जुड़ी सूचनाएं मिलने और गांवों में आपसी भाईचारा कायम रखने में मदद मिलेगी।
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-बिजेंद्र सिंह, एसएचओ बावल।
असामाजिक तत्वों पर निगरानी बनाए रखने के लिए ग्रामीणों का सहयोग जरूरी है। इसके बिना सभी जगहों पर निगरानी रखना मुश्किल काम है। ग्रामीणों के साथ समन्वय कमेटी बनाने का काम चल रहा है। गांवों में अपराध से जुड़ी हर सूचना पुलिस के पास पहुंच पाए और समय रहते अपराध पर अंकुश लगाया जा सके। इसके लिए एसपी के आदेश पर ऐसा हो रहा है।
-राजेश कुमार डीएसपी बावल।